BIG NEWS:चुनावी राजनीति से संन्यास की सीएम नीतीश ने कर दी घोषणा, धमदाहा के मंच से कहा- यह मेरा अंतिम चुनाव है

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : चुनावी राजनीति से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सन्यास लेने की घोषणा कर दी है. पूर्णिया के धमदाहा की चुनावी सभा के मंच से उन्होंने इस बात का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि 2020 का चुनाव उनका अंतिम चुनाव होगा. लोगों से अपील करते हुए नीतीश कुमार ने लोग से लेशी सिंह को जिताने की अपील की.

उन्होंने मंच से ही कहा कि अंत भला तो सब भला. यह मेरा अंतिम चुनाव है. जब से सत्ता मिली तब से काम करता रहा हूं. हर वर्ग, हर समाज के विकास के लिए काम करता रहा हूं. सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के क्षेत्र में काम किया गया है.



सीएम नीतीश कुमार ने लोगों से यह भी कहा कि जब उन लोगों को काम करने का मौका मिला तो कुछ नहीं किया. लेकिन जब से हम लोगों को काम करने का मौका मिला तो बिहार को विकास के रास्ते पर लाने का काम किया गया. इतना ही नहीं अपराध को कंट्रोल किया गया. हर घर तक पक्की गली, नाली बनाने का काम किया गया.

बता दें कि  बिहार के पटना इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले नीतीश कुमार का जन्म साल 1951 में बिहार के एक दलित परिवार में हुआ था. नीतीश का उपनाम मुन्ना है. नीतिश के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे. नीतीश ने राजनीति के गुण जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर और जॉर्ज फर्नाडीज से सीखे थे.नीतीश ने 22 फरवरी 1973 को पेशे से इंजीनियर मंजू कुमारी सिन्हा से शादी की थी. नीतीश कुमार का एक पुत्र है जो बीआईटी से ग्रेजुएट है. नीतीश का उपनाम मुन्ना है.

नीतीश के राजनीतिक करियर की शुरूआत साल 1977 में हुई थी. इस साल नीतीश ने जनता पार्टी के टिकट पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा. साल 1985 को नीतीश बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए. नीतीश का राजनीतिक कद धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था. इसी बीच साल 1987 को नीतीश कुमार बिहार के युवा लोकदल के अध्यक्ष बन गए. नीतीश राजनीति में पारंगत हो ही रहे थे कि साल 1989 को नीतीश कुमार को जनता दल का महासचिव बना दिया गया. अब तक नीतीश ने अच्छी खासी राजनीतिक पहचान बना ली थी.

साल 1989 नीतीश के राजनीतिक करियर के लिए काफी अहम था. इस साल नीतीश 9वीं लोकसभा के लिए चुने गए. लोकसभा के लिए ये नीतीश का पहला कार्यकाल था. इसके बाद साल 1990 में नीतीश अप्रैल से नवंबर तक कृषि एवं सहकारी विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री रहे. नीतीश का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता जा रहा था. साल 1991 में दसवीं लोकसभा का चुनाव हुए नीतीश एक बार फिर से संसद में पहुंचे.

इसी साल नीतिश कुमार जनता दल के महासचिव बने और संसद में जनता दल के उपनेता भी बने. करीब दो साल बाद 1993 को नीतीश को कृषि समित का चेयरमैन बनाया गया. एक बार फिर से आम चुनाव ने दस्तक दी. साल 1996 में नीतीश कुमार 11वीं लोकसभा के लिए चुने गए. नीतीश साल 1996–98 तक रक्षा समिति के सदस्य भी रहे. साल 1998 ने नीतीश फिर से 12वीं लोकसभा के लिए चुने गए. 1998-99 तक नीतीश कुमार केंद्रीय रेलवे मंत्री भी रहे.

एक बार फिर चुनाव हुए साल 1999 में नीतीश कुमार 13वीं लोकसभा के लिए चुने गए. इस साल नीतीश कुमार केंद्रीय कृषि मंत्री भी रहे. साल 2000 नीतीश के राजनीतिक करियर का सबसे अहम मोड़ था. इस साल नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने. उनका कार्यकाल 3 मार्च 2000 से 10 मार्च 2000 तक चला. साल 2000 में नीतीश एक बार फिर से केंद्रीय कृषि मंत्री रहे.

साल 2001 में नीतीश को रेलवे का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. साल 2001 से 2004 तक नीतीश केंद्रीय रेलमंत्री रहे. साल 2002 के गुजरात दंगे भी नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान हुए थे. साल 2004 में नीतीश 14वीं लोकसभा के लिए चुने गए. साल 2005 में नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने. बतौर 31वें मुख्यमंत्री नीतीश का ये कार्यकाल 24 नवंबर 2005 से 24 नवंबर 2010 तक चला. 26 नवंबर 2010 को नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने. 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव उन्होंने राजद के साथ मिलकर लड़ा, और मुख्यमंत्री बने. लेकिन 18 महीने में ही आरजेडी के साथ गठबंधन टूट गया, दोनों अलग-अलग हो गए. बीजेपी के साथ मिलकर फिर इन्होंने सरकार बनायी. 2020 के चुनाव में भी वो एनडीए गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार है.