गोपालगंज हादसाः 5 हो गई है मरने वालों की संख्या, घायल अभी तक नहीं पहुंचे हैं PMCH

कई मजदूर बुरी तरह से झुलस गए

लाइव सिटीज डेस्कः गोपालगंज चीनी मिल हादसे में अब मरने वालों की संख्या 5 हो गई है. बताया जा रहा है कि चार की मौत चीनी मिल में ही हो गई थी वहीं एक और मौत रास्ते में हुई है. घटना के बाद गोपालगंज से जख्मी लोगों को पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया गया था. जिसके बाद अचानक अभी बड़ी खबर आई कि रास्ते में ही एक जख्मी की मौत हो गई.

फटे हुए बॉयलर की तस्वीर

बता दें कि सासामुसा चीनी मिल में एक बड़े हादसे में मरने वालों की तादाद 5 पहुंच गई है. इस हादसे में 9 के करीब लोगों के बुरी रुप से झुलसने की खबर है. गंभीर रुप से तीन घायलों को पटना से पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है. मृतकों में कुचायकोट के खजुरी निवासी अर्जुन कुमार कुशवाहा, कुचायकोट के बाणी खजुरी निवासी कृपा यादव और यूपी के पढरौना निवासी 60 वर्षीय मो शमसुद्दीन शामिल है. मोहम्मद शमसुद्दीन इस मिल में पिछले 40 साल से टरबाइन चलाने का काम करते थे. जानकारी के मुताबिक घायल कन्हैया की मौत हो गई है. गोपालगंज में चीनी मिल का बॉयलर फटा, 4 मजदूरों की मौत, 9 से ज्यादा झुलसे



चीनी मिल के बाहर इकट्ठा लोग

घटना के बारे बताया जा रहा है कि मध्य रात्रि करीब साढ़े बारह बजे चीनी मिल का बॉयलर टैंक अचानक ओवर हीट होने की वजह से फट गया, जिसकी वजह से यह बड़ा हादसा हुआ है. मृतक अर्जुन कुमार कुशवाहा के भाई अरुण कुमार ने मीडिया को बताया कि एक सप्ताह पहले भी इसी जगह पर बॉयलर पाइप फट गया था. जिसे स्थानीय लोगों की मदद से रिपेयर किया गया था. मिलकर्मी कई बार पुरानी मशीनों को बदलने और कार्यस्थल पर इंजीनियर को तैनात करने की मांग करते थे. लेकिन मिल प्रबंधन के द्वारा कोई कारवाई नहीं की गयी. जिसकी वजह से यह बड़ा हादसा हुआ है.

चीनी मिल की तस्वीर

मृतक कृपा यादव के बेटे अनिल कुमार यादव के मुताबिक सात दिन पहले भी हादसा हुआ था. जिसमे कई लोग जख्मी हो गए थे. बावजूद इसी जर्जर मशीन से जबरन काम करवाया जा रहा था. ससामुसा चीनी मिल हादसे में तीन लोगों के मरने की जहा अधिकारिक पुष्टि की गयी है. वही प्रत्यक्षदर्शियो के मुताबिक घटनास्थल पर अभी भी कई शव पड़े हुए है. लोगों के मुताबिक इस हादसे में मरने वालों की संख्या 9 के करीब है लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा है. बॉयलर से गर्म पानी का रिसाव हो रहा है. जिसकी वजह से घटनास्थल की दूसरी तरफ जाना मुश्किल है और यही वजह से है मौत का सही आंकड़ा नहीं मिल रहा है.