आधार कार्ड पर सुप्रीम फैसला आज, 5 जजों की संवैधानिक बेंच करेगी एलान

लाइव सिटीज डेस्कः सुप्रीम कोर्ट ने समाज कल्याण योजनाओं को आधार से जोड़ने और नए बैंक खाते खोलने के लिए आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाने के मामले में सुनवाई पूरी कर ली. इस मुद्दे पर कोर्ट आज शुक्रवार को अंतिरम आदेश देगा. इस बीच केंद्र ने इन योजनाओं को आधार से जोड़ने की अनिवार्यता की समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी है.

सीजेआई दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि आधार योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई अगले साल 17 जनवरी से की जाएगी. आधार का विरोध करने वालों की दलीलों पर कोर्ट ने कहा कि आयकर रिटर्न में हम अपने खातों की जानकारी हर साल सरकार को देते हैं. फिर खातों को आधार से लिंक करने में क्या समस्या है.अब SBI में इसके लिए भी देना होगा आधार नंबर, सर्कुलर जारी

एक वकील ने कहा कि सरकार ने ढाई लाख फर्जी खाते पकड़े हैं, जो बेहद ही छोटा फीसद है, इस बुनियाद पर सभी खातों को आधार से लिंक नहीं किया जा सकता. इस पर कोर्ट ने कहा कि किसी शहर में यदि 20 हजार लोग रहते हों और वहां 200 लोग भ्रष्ट हैं, यह कुल लोगों का 1 फीसद है, तो क्या सिर्फ इसलिए उन्हें छोड़ दें कि उनकी संख्या बहुत कम है. कोर्ट ने कहा कि फीसदी के चक्कर में मत रहिए फीसदी का मामला बहुत ही विनाशक है. बिहार के IAS जितेंद्र झा की दिल्ली में मिली डेडबॉडी, तीन दिनों से थे लापता

केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने संविधान पीठ से कहा कि नया बैंक खाता खोलने के लिए आधार की अनिवार्यता बनी रहनी चाहिए. मनी लांडरिंग पर रोकथाम के लिए खातों को आधार से जोड़ना आवश्यक है. आधार के कारण ढाई लाख से ज्यादा फर्जी खातों को समाप्त किया गया है, अब 57 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते आधार से जुड़ गए हैं.

सरकार ने बैंक खातों और चुनिंदा वित्तीय लेनदेन के लिए आधार और पैन की जानकारी देने की अनिवार्यता की अवधि 31 मार्च तक बढाने संबंधी अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी. लेकिन मोबाइल सिमकार्ड को आधार से जोड़ने की समय सीमा 6 फरवरी, 2018 से आगे बढ़ाने के बारे में कोई जिक्र नहीं है. आधार कार्ड को मोबाइल सेवाओं से जोड़ने के मुद्दे पर अटार्नी जनरल ने कहा कि 6 फरवरी की समय सीमा शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद निर्धारित की गई थी और संविधान पीठ इसकी समय सीमा बढाने पर भी विचार कर सकती है.

शीर्ष अदालत ने 27 नवंबर को कहा था कि विभिन्न सेवाओं और समाज कल्याण योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आधार से जोड़ना अनिवार्य करने के केंद्र के कदम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार के लिए संविधान पीठ गठित करने पर विचार किया जाएगा. हाल ही में 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है. आधार की वैधता को चुनौती देने वाली अनेक याचिकाओं में दावा किया गया था कि इससे निजता के अधिकार का उल्लंघन होता है.

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