… तो जाएगी बिहार में स्वास्थ्य कर्मियों की नौकरी, चेता दिया है सरकार ने

लाइव सिटीज डेस्कः हड़ताली संविदा स्वास्थ्यकर्मी यदि शनिवार तक काम पर नहीं लौटे तो उनकी संविदा समाप्त की जाएगी. यह चेतावनी स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी. साथ ही उन्होंने कहा कि पहले ‘नो वर्क नो पे’ का नियम लागू होगा. इसके बाद भी हड़ताली कर्मी नहीं माने तो सख्त कार्रवाई होगी.

आरके महाजन ने कहा कि अभी तक किसी भी हड़ताली कर्मचारी की संविदा समाप्त नहीं की गई है. सरकार कर्मियों की जायज मांगों पर विचार कर रही है. संविदा पर बहाल लगभग 9 हजार आयुष चिकित्सक, एएनएम, जीएनएम, ब्लॉक कम्युनिटी मोबलाइजर, पारामेडिकल, पिछले 4 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. महाजन ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पूरे राज्य में 17 हजार कर्मचारी संविदा पर हैं. इस तारीख से एक मिनट के लिए भी घर में नहीं होगा अंधेरा, अगर हुआ तो मुश्किल में ये पड़ेंगे



उन्होंने कहा कि डाटा ऑपरेटर आउटसोर्सिंग एजेंसी के तहत कार्य कर रहे हैं और वे राज्य स्वास्थ्य समिति व जिला स्वास्थ्य समिति के नियोजित कर्मचारी नहीं हैं. आशा व ममता कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर जाने की सूचना विभाग को नहीं है. प्रधान सचिव ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा रहा है. ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि प्रति प्रसव 100 से बढ़ाकर 300 रुपये कर दी गई है.

इसके साथ ही कहा कि जो संविदा कर्मी तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं उन्हें आहरित मानदेय पर 10 फीसदी एवं जो पांच वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हैं उनके मानदेय में 15 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजने के लिए कार्यकारिणी समिति का अनुमोदन लिया गया है. श्री महाजन ने बताया कि संविदा कर्मियों की संविदा अवधि 3 वर्ष तक करने व 65 वर्ष की उम्र तक सेवा लेने का प्रस्ताव भी कार्यकारिणी समिति से अनुमोदित किया गया है. सेवा अवधि के दौरान आकस्मिक मौत पर परिजनों को चार लाख रुपये का भुगतान व ईपीएफ कटौती के संबंध में विचार किया जा रहा है.