भारत बंद के समर्थन में उतरे पप्पू यादव, डाकबंगला चौराहा पर हो रहा है जबरदस्त हंगामा

लाइव सिटीज, पटना डेस्कः राजधानी पटना में भारत बंद को लेकर सड़कों पर बवाल मचा हुआ है. जाप सुप्रीमो और मधेपुरा सांसद पप्पू यादव भी सड़क पर उतर आए हैं. पप्पू यादव भारत बंद के समर्थन में अपने समर्थकों के साथ उतर आए हैं. बता दें कि आज एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद देश में उबाल है. दलित संगठनों ने आज दो अप्रैल को भारत बंद का एलान किया है. पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भारी विरोध हो रहा है. इधर बिहार में आज सुबह से ही भारी विरोध देखने को मिल रहा है. बात करें राजधानी पटना की तो भीम आर्मी सड़क पर है.

हाथों में पोस्टर-बैनर और झंडे के साथ भीम आर्मी सड़क पर उतरी है. मार्च किया जा रहा है पटना की सड़कों पर. भीम आर्मी की ओर से पटना में दुकानों को बंद कराया जा रहा है. पटना के कई इलाकों में चक्का जाम कर दिया गया है. प्रदर्शनकारी सड़क जाम करते हुए आगजनी भी कर रहे हैं. लोगों को सड़क पर नहीं आने की अपील की जा रही है.

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दलित समुदाय ने किया एससी के फैसले का विरोध

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से SC/ST एक्ट के संबंध में सुनाए गए एक फैसले से दलित समुदाय में रोष है. इस समुदाय के लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने भी कोई रीव्यू पटीशन दाखिल नहीं की जिससे केंद्र सरकार का दलित विरोधी रवैया स्पष्ट होता है. इससे दलितों पर होने वाले अत्याचारों में वृद्धि होगी व उन्हें मिलने वाले इंसाफ की उम्मीद और मद्धम हो जाएगी. इसी रोष में देश भर में दलित संगठनों ने उक्त फैसले के खिलाफ 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया है.

क्या है एससी-एसटी एक्ट

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 को 11 सितम्बर, 1989 को संसद में पारित किया गया था. 30 जनवरी, 1990 को इस कानून को जम्मू-कश्मीर छोड़ पूरे देश में लागू किया गया. एक्ट के मुताबिक कोई भी ऐसा व्यक्ति जो कि एससी-एसटी से संबंध नहीं रखता हो, अगर अनुसूचित जाति या जनजाति को किसी भी तरह से प्रताड़ित करता है तो उस पर कार्रवाई होगी. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 के तहत आरोप लगने वाले व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा.

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वहीं जुर्म साबित होने पर आरोपी को एससी-एसटी एक्ट के अलावा आईपीसी की धारा के तहत भी सजा मिलती है. आईपीसी की सजा के अलावा एससी-एसटी एक्ट में अलग से छह महीने से लेकर उम्रकैद तक की सजा के साथ जुर्माने की व्यवस्था भी है. अगर अपराध किसी सरकारी अधिकारी ने किया है, तो आईपीसी के अलावा उसे इस कानून के तहत 6 महीने से लेकर एक साल की सजा होती है

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