क्या है SC/ST एक्ट, आखिर क्यों पूरे देश में आज मचा है हंगामा ?

bharat band

लाइव सिटीज डेस्कः एससी/एसटी एक्ट संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित समाज ने आज दो अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है. संगठनों ने भारत बंद को सफल बनाने के लिए जगह-जगह लोगों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है. वहीं प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए चौकसी कड़ी कर दी गई है. आज सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद करने का ऐलान किया गया है. आज सुबह से ही इसका असर भी देखने को मिलने लगा है. भारत बंद के नाम पर रफ्तार रोक दी गई है. चाहे वो ट्रोन हो या फिर सड़क मार्ग. लेकिन इन सबसे पहले ये जानना बहुत जरूरी है कि आखिर यह हंगामा हो क्यों रहा है.

क्या है SC/ST एक्ट

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 को 11 सितम्बर, 1989 को संसद में पारित किया गया था. 30 जनवरी, 1990 को इस कानून को जम्मू-कश्मीर छोड़ पूरे देश में लागू किया गया. एक्ट के मुताबिक कोई भी ऐसा व्यक्ति जो कि एससी-एसटी से संबंध नहीं रखता हो, अगर अनुसूचित जाति या जनजाति को किसी भी तरह से प्रताड़ित करता है तो उस पर कार्रवाई होगी. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 के तहत आरोप लगने वाले व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा.

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वहीं जुर्म साबित होने पर आरोपी को एससी-एसटी एक्ट के अलावा आईपीसी की धारा के तहत भी सजा मिलती है. आईपीसी की सजा के अलावा एससी-एसटी एक्ट में अलग से छह महीने से लेकर उम्रकैद तक की सजा के साथ जुर्माने की व्यवस्था भी है. अगर अपराध किसी सरकारी अधिकारी ने किया है, तो आईपीसी के अलावा उसे इस कानून के तहत 6 महीने से लेकर एक साल की सजा होती है.

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दलित समुदाय ने किया एससी के फैसले का विरोध

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से SC/ST एक्ट के संबंध में सुनाए गए एक फैसले से दलित समुदाय में रोष है. इस समुदाय के लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने भी कोई रीव्यू पटीशन दाखिल नहीं की जिससे केंद्र सरकार का दलित विरोधी रवैया स्पष्ट होता है. इससे दलितों पर होने वाले अत्याचारों में वृद्धि होगी व उन्हें मिलने वाले इंसाफ की उम्मीद और मद्धम हो जाएगी. इसी रोष में देश भर में दलित संगठनों ने उक्त फैसले के खिलाफ 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया है.

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