चंद्रशेखर ने कहा था – लालू को मिटा सकते हो, लेकिन अपराध मत करो, दूसरा लालू बना नहीं सकते

लाइव सिटीज, सेंटल डेस्कः भारत के पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर अब स्मृतिशेष हैं . देवलोक में विराज रहे हैं . लेकिन सभी जानते हैं कि चंद्रशेखर अपने रिश्तों को खुले में निभाते थे . कभी छुपाते नहीं थे अपने संबंधों को . अपनी बातें भी बेबाकी से रखते थे . चारा घोटाले में गिरफ्तार होकर लालू प्रसाद जब पहली बार जेल गए थे, तब भी वे लालू प्रसाद के पक्ष में बोल रहे थे . गिरफ्तारी के लिए सेना की मदद लेने की कोशिशों पर दो टूक राय रखी थी . दूसरों के विरोध की चिंता नहीं की थी . बाद के दिनों में वे लालू प्रसाद से मिलने को पटना के बेऊर जेल तक आए थे . लंबी बातचीत की थी . तब के दिनों में जेल में मुलाकात की तस्वीरें भी फोटोग्राफर ले लिया करते थे . विदेश मंत्री चाहते हैं, Dry Bihar में पर्यटकों को मिले शराब पीने की छूट

चंद्रशेखर, एक्स पीएम (File Pic)

आज पुराने पन्नों को पलटते हुए लाइव सिटीज आपको JNU के रिसर्च स्कॉलर जयंत जिज्ञासु के सहयोग से चंद्रशेखर का वो भाषण पढ़ा रहा है, जो चारा घोटाले में लालू प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद संसद में दिया गया था . चंद्रशेखर ने कहा था – “लालू प्रसाद ने जब ख़ुद ही कहा कि आत्मसमर्पण कर देंगे, तो 24 घंटे में ऐसा कौन-सा पहाड़ टूटा जा रहा था कि सेना बुलाई गई ? ऐसा वातावरण बनाया गया मानो राष्ट्र का सारा काम बस इसी एक मुद्दे पर ठप पड़ा हुआ हो . लालू कोई देश छोड़कर नहीं जा रहे थे . मुझ पर आरोप लगे कि लालू को मैं संरक्षण दे रहा हूँ . मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरी दिलचस्पी किसी व्यक्ति विशेष में नहीं है, ऐसा करके मैं इस संसदीय संस्कृति की मर्यादा का संरक्षण कर रहा हूँ . जब तक कोई अपराधी सिद्ध नहीं हो जाता, उसे अपराधी कहकर मैं उसे अपमानित और ख़ुद को कलंकित नहीं कर सकता . यह संसदीय परंपरा के विपरीत है, मानव-मर्यादा के अनुकूल नहीं है .

जयंत जिज्ञासु, शोधार्थी, जेएनयू

किसी के चरित्र को गिरा देना आसान है, किसी के व्यक्तित्व को तोड़ देना आसान है . लालू को मिटा सकते हो, मुलायम सिंह को गिरा सकते हो, किसी को हटा सकते हो जनता की नज़र से, लेकिन हममें और आपमें सामर्थ्य नहीं है कि एक दूसरा लालू प्रसाद या दूसरा मुलायम बना दें . भ्रष्टाचार मिटना चाहिए, मगर भ्रष्टाचार केवल पैसे का लेन-देन नहीं है . एक शब्द है हिंदी में जिसे सत्यनिष्ठा कहा जाता है, अगर सत्यनिष्ठा (इंटेग्रिटी) नहीं है, तो सरकार नहीं चलायी जा सकती . और, सत्यनिष्ठा का पहला प्रमाण है कि जो जिस पद पर है, उस पद की ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए, उत्तरदायित्व को निभाने के लिए आत्मनियंत्रण रखे, कम-से-कम अपनी वाणी पर संयम रखें . ये नहीं हुआ अध्यक्ष महोदय .

लालू प्रसाद, अध्यक्ष, आरजेडी (File Pic)

सीबीआइ अपनी सीमा से बाहर गयी है, ये भी बात सही है कि उस समय सेना के लोगों ने, अधिकारियों ने उसकी माँग को मानना अस्वीकार कर दिया था . ये भी जो कहा गया है कि पटना हाइ कोर्ट ने उसको निर्देश दिया था कि सेना बुलायी जाये; वो बुला सकते हैं, इसको भी सेना के लोगों ने अस्वीकार किया था . ऐसी परिस्थिति में ये स्पष्ट था कि सीबीआइ के एक व्यक्ति, उन्होंने अपने अधिकार का अतिक्रमण किया था . मैं नहीं जानता कि कलकत्ता हाइ कोर्ट का क्या निर्णय है . उस बारे में मैं कुछ नहीं कहना चाहता . लेकिन ये प्रश्न ज़्यादा मौलिक है जिसका ज़िक्र अभी सोमनाथ चटर्जी ने किया . अगर पुलिस के लोग सेना बुलाने का काम करने लगेंगे, तो इस देश का सारा ढाँचा ही टूट जायेगा .

सेना बुलाने के बहुत-से तरीके हैं . वहाँ पर अगर मान लीजिए मुख्यमंत्री नहीं बुला रहे थे, वहाँ पर राज्यपाल जी हैं, यहाँ पर रक्षा मंत्री जी हैं, होम मिनिस्ट्री थी, बहुत-से साधन थे, जिनके ज़रिये उस काम को किया जा सकता था . लेकिन किसी पुलिस अधिकारी का सीधे सेना के पास पहुँचना एक अक्षम्य अपराध है . मैं नहीं जानता किस आधार पर कलकत्ता हाइ कोर्ट ने कहा है कि उनको इस बात के लिए सजा नहीं मिलनी चाहिए . मैं अध्यक्ष महोदय आपसे निवेदन करूँगा और आपके ज़रिये इस सरकार से निवेदन करूँगा कि कुछ लोगों के प्रति हमारी जो भी भावना हो, उस भावना को देखते हुए हम संविधान पर कुठाराघात न होने दें, और सभी अधिकारियों को व सभी लोगों को, चाहे वो राजनीतिक नेता हों, चाहे वो अधिकारी हों; उन्हें संविधान के अंदर काम करने के लिए बाध्य करें .

और, अगर कोई विकृति आयी है, तो उसके लिए उच्चतम न्यायालय का निर्णय लेना आवश्यक है, और मुझे विश्वास है कि हमारे मंत्री, हमारे मित्र श्री खुराना साहेब इस संबंध में वो ज़रा छोटी बातों से ऊपर उठकर के एक मौलिक सवाल के ऊपर बात करेंगे .”

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