कन्हैया से जुड़ी इस मांग पर राजी नहीं है सुप्रीम कोर्ट, कर दिया खारिज

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कन्हैया कुमार (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्कः सुप्रीम कोर्ट ने साल 2016 में दाखिल उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें जेएनयू के छात्र संघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर अदालत में पेशी के दौरान हमला हुआ था. उस दौरान कुछ लोगों द्वारा किए गए हमले की एसआईटी से जांच कराने की मांग की गई थी. कन्हैया कुमार के साथ पटियाला हाउस कोर्ट में उस वर्ष 15 और 17 फरवरी को वकीलों ने मारपीट की थी. जबकि वह उस समय पुलिस की हिरासत में थे.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत में सुनवाई के दौरान जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर हुए हमले की एसआइटी से जांच कराने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि मरे हुए घोड़े को चाबुक मारकर जिंदा नहीं किया जा सकता. कन्हैया पर फरवरी 2016 में पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में हमला हुआ था.  चाईबासा मामले में लालू प्रसाद व जगन्नाथ मिश्रा को 5 साल की सजा

जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की पीठ ने कहा कि पुलिस अधिकारियों एवं अन्य के खिलाफ अवमानना की दलीलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता. याची ने घटना को डरावनी कार्रवाई करार दिया है. याची वकील कामिनी जायसवाल की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण से पीठ ने पूछा कि डरावनी कार्रवाई क्या है.

कोर्ट में 15 और 17 फरवरी 2016 की घटना का उल्लेख किया गया. उस समय पटियाला हाउस जिला अदालत परिसर में कन्हैया, पत्रकारों, छात्रों और जवाहरलाल नेहरू विवि के शिक्षकों पर हमला किया गया था. पीठ ने कहा कि हम नहीं समझते कि आगे सुनवाई जरूरी है. एसआईटी जांच की जरूरत नहीं है.

इसके जवाब में भूषण ने कहा कि यदि कोई कार्रवाई नहीं की गई तो लोगों को ऐसा करने का प्रोत्साहन मिलेगा. पीठ ने इसके जवाब में कहा, हम आगे नहीं सुनेंगे. हम नहीं मानते कि मरे हुए घोड़े को चाबुक मारकर जिंदा किया जा सकता है. यदि आपकी कुछ अपेक्षा है तो आप उपयुक्त कदम उठा सकते हैं. आप एफआईआर दर्ज करा सकते हैं. याचिका खारिज की जाती है.

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