BIG BREAKING : चारा घोटाला में लालू प्रसाद दोषी, जगन्नाथ मिश्रा बरी

लालू प्रसाद

लाइव सिटीज डेस्कः बिहार की सियासत से जुड़ी सबसे बड़ी खबर आ रही है रांची से. रांची सीबीआई कोर्ट ने चारा घोटाला मामले में अपना फैसला सुना दिया है. सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है.बहुचर्चित चारा घोटाला केस में सीबीआई की विशेष अदालत ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को दोषी करार दिया है. इसी केस में उन्हें फिर जेल जाना पड़ेगा. वहीं इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिस्र सहित सात आरोपियों को बरी कर दिया है. आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह भी पहुंचे सीबीआई कोर्ट. कहा- लड़ाई जारी रहेगी.

बता दें कि इससे पहले कोर्ट ने आज शनिवार 23 दिसंबर की सुबह 11 बजे का वक्त दिया था. लेकिन इसी बीच खबर आई कि कोर्ट अन्य मामलों की सुनवाई में बिजी था. जिसके बाद राजद चीफ लालू प्रसाद पर फैसले के लिए 3 बजे का समय दिया गया था. राजद प्रमुख पर फैसले को लेकर बिहार में भी पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है. राजधानी पटना में राजद कार्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है. राजधानी में प्रकाश पर्व समारोह को लेकर प्रशासन पहले से ही चौकस है. फिर भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है.



रांची में भी सुरक्षा कड़ी

रांची में सीबीआई कोर्ट परिसर में भी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है. लालू प्रसाद के समर्थन में वहां भी राजद के कई नेता और कार्यकर्ता जुटे हुए हैं. लालू प्रसाद सहित अन्य आरोपी सुबह 10:30 बजे के आसपास कोर्ट पहुंचे थे. लालू प्रसाद भी सुबह अपने वक्त से कोर्ट पहुंचे थे लेकिन फैसले में देरी की वजह से वो गेस्ट हाउस लौट आए थे. मामले की संवेदनशीलता और हाईप्रोफाइल आरोपियों को देखते हुए रांची पुलिस भी अलर्ट पर है.  जिसने लालू प्रसाद को भिजवाया था जेल, आज उसने दिया है चौंकाने वाला बयान

रांची सीबीआई कोर्ट के बाहर बढ़ाई गई है सुरक्षा

लालू ने बताया है खुद के खिलाफ साजिश

शुक्रवार को ही रांची रवाना होने से पहले लालू प्रसाद ने कहा कि कुछ लोग मेरे खिलाफ साजिश कर रहे हैं. मुझे जेल भिजवाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जनता हमारे साथ है. इस घोटाले में बीजेपी सरकार ने साजिश के तहत मुझे फंसाया है. उन्होंने कहा कि जेल तो मुझे पहले भी भेजा गया था. हम इससे डरने वाले नहीं हैं. कोर्ट का जो भी फैसला होगा वो स्वीकार होगा. मेरे बच्चे और अन्य साथियों ने राजद को खूब अच्छे से संभाला है. उन्होंने कहा कि जब-जब मुझे इस तरह की सजा दी गई है. हम उतने ही मजबूत हो कर सामने आए हैं. हमारी पार्टी को जनता आज भी उतना ही समर्थन करती है.

लालू प्रसाद , राजद सुप्रीमो

क्या है पूरा मामला

चारा घोटाले से संबंधित यह देवघर कोषागार से 84 .54 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला था. आरसी 64 ए /96 के इस मामलें में बुधवार को दोनों पक्षों की बहस समाप्त होते ही सीबीआई कोर्ट ने फैसले की तारीख निर्धारित की थी. इस मामले में संलिप्त लोगों में शुरुआत से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है. सरकारी गवाह पीके जायसवाल एवं सुशील झा ने निर्णय से पहले ही अपना दोष स्वीकार कर लिया था. अब 21 साल बाद चारा घोटाले के इस चर्चित मामले में 23 दिसंबर को फैसला सुनाया जायेगा. इस मामले में सीबीआई ने 23 जुलाई 1997 को चार्जशीट फाइल की थी.

रांची सीबीआई कोर्ट के बाहर बढ़ाई गई है सुरक्षा

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने फैसले के दिन सभी आरोपियों को निजी तौर पर उपस्थित होने का आदेश दिया था. इनमें लालू प्रसाद यादव, डॉ जगन्नाथ मिश्र, सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व सांसद डॉ आर के राणा, बिहार के पूर्व पशुपालन मंत्री विद्या सागर निषाद के अलावा आईएएस अधिकारी एवं पशुपालन अधिकारी का भी फैसला होना था. चारा घोटाला सीबीआई के इतिहास का वो मामला है जिसमें बड़ी संख्या में आरोपियों को सज़ा हुई है.

ये है घटनाक्रम

  • जनवरी, 1996 : उपायुक्त अमित खरे ने पशुपालन विभाग के दफ्तरों पर छापा मारा और ऐसे दस्तावेज जब्त किए जिनसे पता चला कि चारा आपूर्ति के नाम पर अस्तित्वहीन कंपनियों द्वारा धन की हेराफेरी की गई. उसके बाद यह चारा घोटाला सामने आया.
  • 11 मार्च, 1996 : पटना उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस घोटाले की जांच का आदेश दिया. उच्चतम न्यायालय ने इस आदेश पर मुहर लगाई.
  • 27 मार्च, 1996 : सीबीआई ने चाईंबासा खजाना मामले में प्राथमिकी दर्ज की.
  • 23 जून, 1997 : सीबीआई ने आरोप पत्र दायर किया और लालू प्रसाद को आरोपी बनाया.
  • 30 जुलाई, 1997 : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण किया. अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा.
  • 5 अप्रैल, 2000 : विशेष सीबीआई अदालत में आरोप तय किया.
  • 5 अक्टूबर, 2001 : उच्चतम न्यायालय ने नया राज्य झारखंड बनने के बाद यह मामला वहां स्थानांतरित कर दिया.
  • फरवरी, 2002 : रांची की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई शुरू हुई.
  • 13 अगस्त, 2013 : उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत के न्यायाधीश के स्थानांतरण की लालू प्रसाद की मांग खारिज की.
  • 17 सितंबर, 2013 : विशेष सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
  • 30 सितंबर, 2013 : बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों- लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र तथा 45 अन्य को सीबीआई न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने दोषी ठहराया.
  • 3 अक्टूबर, 2013 : सीबीआई अदालत ने लालू यादव को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उन पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी किया.