जिसने लालू प्रसाद को भिजवाया था जेल, आज उसने दिया है चौंकाने वाला बयान

लालू प्रसाद की फाइल फोटो

लाइव सिटीज डेस्कः चारा घोटाला मामले में बस कुछ देर में फैसला आना है. पहले कोर्ट ने आज शनिवार 23 दिसंबर की सुबह 11 बजे का वक्त दिया था. लेकिन इसी बीच खबर आई की कोर्ट अन्य मामलों की सुनवाई में बिजी है. जिसके बाद राजद चीफ लालू प्रसाद पर फैसले के लिए 3 बजे का समय दिया गया. इसी बीच लालू प्रसाद को जेल भिजवाने में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी की अहम भूमिका थी, उन्होंने एक बड़ा बयान दिया है. आज की तारीख में तिवारी लालू प्रसाद के सबसे विश्वसनीय सहयोगी माने जाते हैं.

शिवानंद तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चारा घोटाले के खुलासे में मेरी भी भूमिका थी, लेकिन लालू प्रसाद की ये महानता है कि तमाम कड़वाहटों के बावजूद उन्होंने मुझे पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है. तिवारी ने कहा कि चारा घोटाला मामले में जो व्यक्ति पिटिशन फाइल करता है. लालू प्रसाद से लड़ाई लड़ता है और उन्हें जेल भिजवाने में अहम भूमिका का निर्वाह करता है, वो लालू प्रसाद की पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है. तो आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं लालू प्रसाद की शख्सियत क्या है? जिस व्यक्ति ने जेल भिजवाया जिस आदमी ने मुकदमा किया. उसी मुदकमा में रांची पटना हो रहा हैं.



शिवानंद तिवारी(फाइल फोटो)

शिवानंद तिवारी ने कहा कि जिस आदमी की जेल भिजवाने में भूमिका रही वो आज उनका विश्वस्त सहयोगी है तो इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि लालू प्रसाद का दिल कितना बड़ा है और वो किस मिजाज के व्यक्ति हैं. राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने आगे कहा कि मैंने नीतीश कुमार को लालू प्रसाद से ज्यादा मदद की, लेकिन उन्होंने इसलिए पार्टी से निकाल दिया क्योंकि राजगीर शिविर में मैंने नरेंद्र मोदी के बारे में सही बात कही थी. दोनों के व्यक्तित्व में आसमान और जमीन का अंतर है.

शिवानंद तिवारी ने कहा कि बिहार और देश के सामाजिक आंदोलन के इतिहास में लालू प्रसाद का जिक्र हमेशा होगा. लालू प्रसाद ने बिहार के समाज और राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया. उनके संघर्ष का परिणाम है कि आज तमाम राजनीतिक पार्टी में एक नंबर के नेता पिछड़े और वंचित समाज से हैं. बता दें कि साल 1996 में शिवानंद तिवारी, सरयू राय और सुशील कुमार मोदी ने पहली बार चारा घोटाले को लेकर पटना हाईकोर्ट में पीआईएल दायर किया था, जिसके बाद लालू प्रसाद को 1997 में जेल जाना पड़ा. इस केस में तब रविशंकर प्रसाद वकील थे.