मीडिया के Iron Man पारस नाथ तिवारी का निधन, बड़े-बड़े डरते थे बाबा के गुस्‍से से

लाइव सिटीज, पटनाः  न कभी झुकने – न कभी डरने वाले बिहार की माडिया के ‘आयरन मैन’ वरिष्‍ठ पत्रकार पारस नाथ तिवारी का गुरुवार 7 दिसंबर की रात नई दिल्‍ली में निधन हो गया है . तिवारी हिंदी दैनिक ‘अमृतवर्षा’ के संस्‍थापक संपादक थे . बदलते जमाने में तिवारी ने टेक्‍नोलॉजी के हिसाब से भले ही ‘अमृतवर्षा’ को अपग्रेड न किया हो, लेकिन जिंदगी के अंतिम क्षण तक अखबार का प्रकाशन उनका जुनून था .

पारस नाथ तिवारी आजकल नई दिल्‍ली के लक्ष्‍मी नगर में रहा करते थे . कई साल पहले उन्‍होंने ‘अमतवर्षा’ का प्रकाशन नई दिल्‍ली से भी प्रारंभ किया था . अंतिम सांस लेने के पहले भी वे अखबार संबंधी कार्य से ही गुरुवार की रात को घर से बाहर निकले हुए थे .



तिवारी के पुत्र वनबिहारी तिवारी ने पटना में लाइव सिटीज को बताया कि वे रात को घर वापसी के क्रम में जंगपुरा मेट्रो स्‍टेशन पर थे . बाथरुम से बाहर आने के बाद उन्‍हें बहुत तेज पसीना आया था . स्‍थानीय लोगों की मदद से पुलिस उन्‍हें एम्‍स के ट्रॉमा सेंटर में ले गई . घर पर पुलिस ने ही खबर दी . सभी घर वाले तुरंत एम्‍स पहुंच गये, जहां उन्‍हें डाक्‍टरों ने मृत घोषित कर दिया . तिवारी को डायबिटीज और ब्‍लड प्रेशर की बीमारी पहले से थी .

वरिष्‍ठ पत्रकार पारस नाथ तिवारी नहीं रहे (फाइल फोटो)

पारस नाथ तिवारी के शव को पटना लाया जाएगा . अंत्‍येष्टि शनिवार 9 दिसंबर को होगी . वे मूल रुप से सीवान के रहने वाले थे . लेकिन असली कर्मभूमि सबसे पहले बोकारो बनी थी . वहां उन्‍होंने मजदूरों के हक की लंबी लड़ाई लड़ी . कांग्रेस व श्रमिक नेता बिंदेश्‍वरी दूबे के काफी करीब रहे . बाद में ‘अमृतवर्षा’ का प्रकाशन शुरु किया .

बाबा का सामान फेंकवा दिया था लालू प्रसाद ने

पारस नाथ तिवारी मीडिया में बाबा के नाम से मशहूर थे . सभी इज्‍जत देते थे . देश के कई बड़े पत्रकारों ने शुरुआत ‘अमृतवर्षा’ से की थी . बाबा मन से जिद्दी थे . जो ठान लेते थे, करते थे . डरते बिलकुल नहीं थे . संघर्ष में बर्बाद हो जाने की फिक्र नहीं करते थे . पटना में पंत भवन में अमृतवर्षा का दफ्तर था .

किसी बात पर ‘अमृतवर्षा’ की लालू प्रसाद से फंस गई . बाबा बिलकुल आक्रामक हो गये . अखबार ने बोलना शुरु कर दिया . लालू प्रसाद बहुत गुस्‍से में आ गये . बाबा को संदेशा भेजा गया . पर वे नहीं माने . अखबार लिखता रहा . आख्रिकार, सरकार ने ‘अमृतवर्षा’ को पंत भवन से बेदखल करा दिया . बाबा ने तब भी हार नहीं मानी . सड़क पर बैठ गये और अखबार निकालने लगे . कोर्ट में लड़ाई लड़ी और फिर से पंत भवन वाली जगह वापस प्राप्‍त की . राजधानी एक्सप्रेस में घूम रहे हैं पियक्कड़ TTE, गाली-गलौज के साथ करते हैं छेड़खानी भी

यह दूसरी बात है कि पारस नाथ तिवारी का लालू प्रसाद व्‍यक्तिगत तौर पर अंतिम समय तक सम्‍मान करते थे . बाबा इतने मुंहफट थे कि लालू प्रसाद जब एक दफे उनके सामने टेबल पर पैर रख बैठ गये थे, तो उन्‍होंने तुरंत टोक-रोक दिया था .

नीतीश कुमार ने कहा था, बाबा हैं-इन्‍हें रोकना मत

पारसनाथ तिवारी को बिहार का कोई शख्सियत कभी वेट करने को नहीं कह सकता था . सभी जानते थे कि बिदक जायेंगे . वाकया तब का है, जब नीतीश कुमार रेल मंत्री थे . बाबा मिलने को गये . किसी ने तुरंत नहीं पहचाना होगा . वेट करने को कह दिया . फिर क्‍या था, बाबा बिदक गये . गुस्‍सा कर लौटने लगे .

तभी किसी ने बाबा के वापस जाने की बात भीतर जाकर नीतीश कुमार को बताई . वे तुरंत बाहर आए . बाबा को अपने साथ भीतर ले गये . तुरंत निर्देश जारी हुआ कि बाबा जब भी आएं, कोई रोकेगा नहीं .