5 हजार की भीड़ ने किया था तांडव, आज 28 साल बाद पटना हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

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पटना हाईकोर्ट

पटना (एहतेशाम अहमद) : तारीख पर तारीख , 28 साल, सात न्यायाधीश की खण्डपीठ की अलग-अलग सुनवाई,  49 अभियुक्तों के जीवन का फैसला आखिर पटना हाईकोर्ट ने अंतत: दे ही दिया. वर्ष 1983 के बहुचर्चित कोदई हत्याकांड में शामिल 49 अभियुक्तों को निचली अदालत द्वारा दिये गये आजीवन कारावास की सजा पर पटना हाईकोर्ट ने 3 अभियुक्तों को जूवेनाइल घोषित करते हुए अन्य 46 अभियुक्तों की सजा को बरकरार रखा है.

जस्टिस राकेश कुमार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने महेन्द्र राय एवं अन्य की ओर से दायर अपील पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया. मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि 24 वर्षों तक मामला लंबित रहने के बाद वर्ष 2013 से शुरु हुई इसकी सुनवाई पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस सहित सात अन्य न्यायाधीशों की खण्डपीठ ने की. मगर फैसला नहीं आ सका था. और जीवित बचे अभियुक्तों की आयु 65 से 85 वर्ष हो चुकी है.

गौरतलब है कि यह बहुचर्चित घटना मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत गायघाट थाना क्षेत्र के कोदई गांव में 29 मार्च 1983 को घटित हुआ था.  इस घटना में करीब चार-पांच हजार की संख्या में रहे भीड़ ने आपसी विवाद में पांच लोगों की हत्या कर दी थी. मामले में पुलिस द्वारा 52 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज की गयी.

वहीं अनुसंधान के बाद 81 लोगों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गयी थी. जिसमें गायघाट थाना के तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर भी अभियुक्त बनाये गये थे. करीब छह साल तक निचली अदालत में मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 1989 में अदालत ने 49 लोगों जिसमें गायघाट के तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर भी शामिल थे को दोषी करार दिया और 9 लोगों को बरी कर दिया था.

निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए 1 जनवरी 1989 को पटना हाईकोर्ट में आजीवन कारावास की सजा के विरुद्ध अपील दायर की गयी, जिसपर पटना हाईकोर्ट में करीब 24 वर्षों तक यह मामला लंबित रहा. वर्ष 2013 में  इस मामले की सुनवाई शुरु की गयी. जिसमें जस्टिस श्याम किशोर शर्मा, जस्टिस बीएन सिन्हा, जस्टिस धरनीधर झा, तत्कालीन चीफ जस्टिस, जस्टिस समरेन्दर प्रताप सिंह, जस्टिस डा. रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई परंतु फैसला नहीं आ पाया.

अंतत: जस्टिस राकेश कुमार एवं जस्टिस मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने इस मामले की दस दिनों तक लगातार त्वरित सुनवाई करते हुए करीब 300 पन्ने में दिये गये अपने फैसले में घटना में शामिल तीन अभियुक्तों को जूवेनाइल घोषित कर दिया. वहीं अन्य अभियुक्तों को निचली अदालत द्वारा दिये गये आजीवन कारावास की सजा को सही ठहराते हुए सजा को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया.

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