EXCLUSIVE : 500-1000 वाले 127 करोड़ रुपये की खेप पटना में, बिल्‍डर – ज्‍वेलर रडार पर

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्‍क : जी हां, पूरे 127 करोड़ रुपये पटना में हैं . खबर कंफर्म है . पटना पुलिस को भी पता है . जब्‍ती को तार जोड़े जा रहे हैं, लेकिन असली ठिकाना नहीं मिल रहा है . आसपास में भटक जा रहा है . 500-1000 वाले पुराने नोटों की यह खेप भी कानुपर से ही आई है . आपको पता ही होगा कि अभी कानुपर में कोई 97 करोड़ और मेरठ में 25 करोड़ के पुराने वाले 500 – 1000 रुपये के नोटों की जब्‍ती हुई है .

500-1000 वाले रद्दी नोटों के बदले असली नोट लेकर नेपाल से इंडिया लौटे अमिताभ ओझा

प्रधान मंत्री नरेन्‍द्र मोदी की सरकार ने भारतीयों के लिए अब इन नोटों को पास रखना भी गुनाह कर दिया है, लेकिन भारत सरकार की बड़ी चूक के कारण ये रुपये आज भी नेपाल में बदले जा रहे हैं . कानपुर के रेड के बाद सबसे पहले आपको लाइव सिटीज ने ही बताया था कि कैसे नेपाल में 500 – 1000 के पुराने नोट बदले जा रहे हैं . अब न्‍यूज 24 के बिहार एडिटर अमिताभ ओझा नेपाल में स्टिंग ऑपरेशन कर 500 रुपये के पुराने नोटों की बदली कराकर इंडिया लौट चुके हैं .

कंटेनर में कानपुर से आया नोट

पटना में 127 करोड़ के पुराने नोट कानुपर से आए हैं . कंफर्म जानकारी के मुताबिक इसे न्‍यूजप्रिंट लाने वाले कंटेनर के कांट्रैक्‍टर के माध्‍यम से पटना लाया गया है . कानपुर से पटना तक का भाड़ा 17 लाख रुपये तय किया गया था . यह खेप पटना में कानुपर की जब्‍ती से बहुत पहले दिसंबर के अंतिम हफ्ते में ही पटना पहुंच गई थी . आगे इसे किस्‍तों में नेपाल भेजने का प्‍लान था, जो अभी (शायद) फंसा पड़ा है . NIA ने बताया, यहां खप रहे हैं 500-1000 के प्रतिबंधित नोट, बदल भी जायेंगे

खेप को पटना में रिसीव करने वालों को भी लग गया है कि पुलिस पीछे है . हैरत की बात यह है कि इस धंधे में बैंकों के एटीम को रिफील करने वाली एजेंसी का भी नाम प्रमुखता से आ रहा है . खुफिया खबर के मुताबिक जो खेप कंटेनर से पटना आई, उसे कोईलवर के पास सुबह में अनलोड किया गया था . फिर इसे रिफील करने वाली एजेंसी के सहयोग से पटना लाया गया .

बिल्‍डर – ज्‍वेलर है खोजी दस्‍ते के रडार पर

500 -1000 के पुराने नोटों की बदला-बदली करने वाले गिरोह का सबसे बड़ा हेडक्‍वार्टर कानपुर में ही है . जिनके ठिकाने से 97 करोड़ रुपयों की जब्‍ती हुई, वे कानपुर के खत्री बंधु हैं . इनका भी दिखाने वाला धंधा बिल्‍डर का ही था . खत्री बंधुओं ने ही पटना का नेटवर्क तैयार किया था . पटना आगे नेपाल के लास्‍ट डेस्टिनेशन के पहले का बड़ा पड़ाव है .

पटना में 127 करोड़ की खेप का पता-ठिकाना जानने में लगी सभी टीमों की जुबान पर एक बिल्‍डर का नाम है . वैसे इस बिल्‍डर को उनकी ही जमात के बड़े लोग नहीं जानते हैं . साथ में, एक ज्‍वेलर का नाम आ रहा है . इस ज्‍वेलर की भूमिका नेपाल से वापसी के रास्‍ते में होती है .

दरअसल, नेपाल में भारत के नये 500 – 2000 वाले नोट अब भी लीगल नहीं हैं . ऐसे में, वहां के बैंकों के पास एक्‍सचेंज के लिए ये रुपये नहीं होते हैं . सो, जब 500 – 1000 के पुराने नोटों के बदले में भारत के धंधेबाजों को वापसी में पेमेंट कैश के बदले गोल्‍ड में किया जा रहा है . पटना वाले ज्‍वेलर का स्‍मगलिंग वाला नेपाल कनेक्‍शन बहुत लोगों को पता है .

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