बिहार में अब फर्जी कॉलेजों की जांच करेगी CBI, हाईकोर्ट ने दिया है आदेश

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लाइव सिटीज डेस्कः पटना हाईकोर्ट ने सूबे में धड़ल्ले से चल रहे फर्जी शिक्षण संस्थानों की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा है. कोर्ट ने राज्य सरकार के सभी संबंधित अधिकारियों को सीबीआई जांच में हर संभव सहयोग करने का आदेश दिया है. साथ ही सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान करने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने उमेश चांद एवं अन्य की ओर से दायर रिट याचिका पर बुधवार को सुनवाई की. हाईकोर्ट ने BPSC से मांगा है जवाब, जानिए-परीक्षा से जुड़ी इस सुनवाई में अदालत ने क्या कहा 

मालूम हो कि इसके पूर्व केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय ने कोर्ट को बताया कि अदालती आदेश के बाद उच्चस्तरीय बैठक में फर्जी कॉलेजों की जांच करने का निर्णय लिया गया. जांच के दौरान पता चला की फर्जी तरीके से काउंसिल ऑफ पेटेंट मेडिसिन के नाम से संस्थान आरा में चलाया जा रहा है. इसी संस्थान का दूसरा ब्रांच मुजफ्फरपुर में जेपीआईपी मेडिकल साइंस के नाम से चलाया जा रहा है. यहां तक कि यह राज्य के बाहर फरीदाबाद, कोलकाता एवं अन्य शहरों में चल रहा है. उन्होंने कहा, ये संस्थान छात्रों को लूटने का काम कर रहे हैं. संस्थान अब तक 812 लोगों को डिग्री जारी कर चुका है.



हाईकोर्ट में अन्य मामले पर सुनवाई

उधर भोजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी बुधवार को जेल जाते-जाते बचे. कोर्ट ने उन्हें एक और मौका देते हुए गलती सुधारने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने डॉ. ओमप्रकाश की अवमानना अर्जी पर सुनवाई की. कोर्ट को बताया गया कि डीईओ ने अदालती आदेश का पालन करने के पूर्व निदेशक से मार्गदर्शन लेने के बाद कोर्ट आदेश का पालन करने की बात कह रहे हैं. आवेदक की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी से कोर्ट ने पूछा कि क्या यह बात सही है.

कोर्ट का कड़ा रूख देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी माफी मांगने लगे. कोर्ट ने उनकी एक नहीं सुनी व कोर्ट मार्शल को बुला लिया. एएजी आशुतोष रंजन पांडेय के आरजू मिन्नत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को एक मौका और दे दी. कोर्ट ने उन्हें 20 दिसंबर को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया. न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने सुनवाई की.