पटना में राबड़ी आवास पर हो रही है पूजा, तेजप्रताप ने मंदिर जाकर मांगी पिता के लिए दुआएं

लाइव सिटीज डेस्कः चारा घोटाला मामले में आज फैसले का दिन है. आज शनिवार 23 दिसंबर को राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद पर चारा घोटाले के एक मामले में रांची में फैसला आयेगा. लंबी सुनवाई के बाद रांची में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट यह फैसला सुनाने जा रही है. इसको लेकर पटना से रांची तक सभी निगाहें सीबीआई कोर्ट पर लगी हुई हैं.  इसी को लेकर पटना के दस सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास पर पूजा चल रही है. पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने आज सुबह-सुबह मंदिर जाकर मत्था टेका. और लालू प्रसाद के लिए दुआएं मांगी.लालू पर फैसला : रांची पर लगी बिहार की नजरें, पटना RJD ऑफिस में सन्नाटा

बता दें कि राजद प्रमुख पर फैसले को लेकर बिहार में भी पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है. राजधानी पटना में राजद कार्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है. राजधानी में प्रकाश पर्व समारोह को लेकर प्रशासन पहले से ही चौकस है. फिर भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है. पटना में लालू आवास से लेकर राजद कार्यालय तक सन्नाटा पसरा है. सभी 11 बजने के इंतजार में है.

रांची में भी सुरक्षा कड़ी

रांची में सीबीआई कोर्ट परिसर में भी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है. लालू प्रसाद के समर्थन में वहां भी राजद के कई नेता और कार्यकर्ता जुटे हुए हैं. लालू प्रसाद सहित अन्य आरोपियों के सुबह 10:30 बजे के आसपास कोर्ट पहुंचने की संभावना है. मामले की संवेदनशीलता और हाईप्रोफाइल आरोपियों को देखते हुए रांची पुलिस भी अलर्ट पर है. कोर्ट परिसर के अंदर आरोपियों के अलावा और किसी को जाने की मनाही है.

लालू ने बताया है खुद के खिलाफ साजिश

शुक्रवार को ही रांची रवाना होने से पहले लालू प्रसाद ने कहा कि कुछ लोग मेरे खिलाफ साजिश कर रहे हैं. मुझे जेल भिजवाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जनता हमारे साथ है. इस घोटाले में बीजेपी सरकार ने साजिश के तहत मुझे फंसाया है. उन्होंने कहा कि जेल तो मुझे पहले भी भेजा गया था. हम इससे डरने वाले नहीं हैं. कोर्ट का जो भी फैसला होगा वो स्वीकार होगा. मेरे बच्चे और अन्य साथियों ने राजद को खूब अच्छे से संभाला है. उन्होंने कहा कि जब-जब मुझे इस तरह की सजा दी गई है. हम उतने ही मजबूत हो कर सामने आए हैं. हमारी पार्टी को जनता आज भी उतना ही समर्थन करती है.

क्या है पूरा मामला

चारा घोटाले से संबंधित यह देवघर कोषागार से 84 .54 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला था. आरसी 64 ए /96 के इस मामलें में बुधवार को दोनों पक्षों की बहस समाप्त होते ही सीबीआई कोर्ट ने फैसले की तारीख निर्धारित की थी. इस मामले में संलिप्त लोगों में शुरुआत से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है. सरकारी गवाह पीके जायसवाल एवं सुशील झा ने निर्णय से पहले ही अपना दोष स्वीकार कर लिया था. अब 21 साल बाद चारा घोटाले के इस चर्चित मामले में 23 दिसंबर को फैसला सुनाया जायेगा. इस मामले में सीबीआई ने 23 जुलाई 1997 को चार्जशीट फाइल की थी.

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने फैसले के दिन सभी आरोपियों को निजी तौर पर उपस्थित होने का आदेश दिया था. इनमें लालू प्रसाद यादव, डॉ जगन्नाथ मिश्र, सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व सांसद डॉ आर के राणा, बिहार के पूर्व पशुपालन मंत्री विद्या सागर निषाद के अलावा आईएएस अधिकारी एवं पशुपालन अधिकारी का भी फैसला होना था. चारा घोटाला सीबीआई के इतिहास का वो मामला है जिसमें बड़ी संख्या में आरोपियों को सज़ा हुई है.

ये है घटनाक्रम

  • जनवरी, 1996 : उपायुक्त अमित खरे ने पशुपालन विभाग के दफ्तरों पर छापा मारा और ऐसे दस्तावेज जब्त किए जिनसे पता चला कि चारा आपूर्ति के नाम पर अस्तित्वहीन कंपनियों द्वारा धन की हेराफेरी की गई. उसके बाद यह चारा घोटाला सामने आया.
  • 11 मार्च, 1996 : पटना उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस घोटाले की जांच का आदेश दिया. उच्चतम न्यायालय ने इस आदेश पर मुहर लगाई.
  • 27 मार्च, 1996 : सीबीआई ने चाईंबासा खजाना मामले में प्राथमिकी दर्ज की.
  • 23 जून, 1997 : सीबीआई ने आरोप पत्र दायर किया और लालू प्रसाद को आरोपी बनाया.
  • 30 जुलाई, 1997 : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण किया. अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा.
  • 5 अप्रैल, 2000 : विशेष सीबीआई अदालत में आरोप तय किया.
  • 5 अक्टूबर, 2001 : उच्चतम न्यायालय ने नया राज्य झारखंड बनने के बाद यह मामला वहां स्थानांतरित कर दिया.
  • फरवरी, 2002 : रांची की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई शुरू हुई.
  • 13 अगस्त, 2013 : उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत के न्यायाधीश के स्थानांतरण की लालू प्रसाद की मांग खारिज की.
  • 17 सितंबर, 2013 : विशेष सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
  • 30 सितंबर, 2013 : बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों- लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र तथा 45 अन्य को सीबीआई न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने दोषी ठहराया.
  • 3 अक्टूबर, 2013 : सीबीआई अदालत ने लालू यादव को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उन पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी किया.

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