छपरा वाले रुडी जी आप कहां हैं, Torch लेकर आपको तलाश रहे हैं रवीश कुमार

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : जानकारी बिलकुल दुरुस्त है . छपरा के सांसद अभी लालू प्रसाद नहीं हैं . वे तो जेल में हैं . 2014 में चुनाव लड़ रहीं राबड़ी देवी हार गईं थीं . सांसद राजीव प्रताप रुडी बने थे . बाद में केंद्रीय मंत्री भी बने . लेकिन अब नहीं हैं . बीजेपी के नेशनल प्रेसीडेंट अमित शाह ने इस्तीफा लेकर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया था . पर, यह सच है कि अभी बिहार और केंद्र में समानधर्मी मतलब एनडीए की सरकार है . कहते हैं, फैसला करने और काम करने वाली सरकार है . छात्रों-युवाओं का भविष्य संवारने वाली गवर्नमेंट है . अच्छे दिनों का सपना दिखाने वाली सरकार है . हाईकोर्ट का चीफ सेक्रेटरी से कड़ा सवाल, शराबबंदी के नाम पर मनमानी क्यों कर रही है पुलिस

राजीव प्रताप रूडी (फाइल फोटो)

तो फिर यह सवाल जरुर पैदा होता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि देश के बड़े पत्रकार रवीश कुमार टॉर्च लेकर छपरा के भाजपा सांसद राजीव प्रताप रुडी को तलाशने में लगे हैं . साथ में, वे छपरा के विधायकों को भी खोज रहे हैं . निश्चित तौर पर इन विधायकों में राजद और जदयू के विधायक भी हैं . लेकिन सच ये है कि रवीश कुमार की तलाश बिहार के बेसिक इश्यूज के लिए है, जिसका सबसे अधिक खामियाजा छात्र और युवा ही भुगतते हैं . कल भी भुगतते थे, आज भी भुगत रहे हैं .

मामला जे पी यूनिवर्सिटी के छात्रों का है

रवीश कुमार ने 23 जनवरी 2018 को ही रात में अपने फेसबुक वाल पर एक पोस्ट लिखा . आगे और बताने के पहले आपको रवीश कुमार का वो स्टेटस ही पढ़ा देते हैं , पढिये – ‘ क्या कोई बिहार में है जो छपरा के जे पी यूनिवर्सिटी के छात्रों को बचा सकता है ? कई बार मेसेज आता है कि बीए के 2014-17 बैच में एडमिशन लिया था . 2018 तक सिर्फ प्रथम वर्ष की परीक्षा हुई है .ये तो हद है . कोई छपरा का सांसद है ? कोई विधायक है ? इन छात्रों के माँ बाप क्या ज़िंदा हैं ? चार साल में बीए के एक साल का इम्तहान ? इन छात्रों को किस बात की सज़ा दी जा रही है ? क्या कोई इस फटीचर यूनिवर्सिटी का छात्र यहाँ कमेंट कर बताएगा कि बात किस हद तक सही है . ‘

रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार (फाइल फोटो)

रवीश ने जैसे ही ये स्टेटस पोस्ट किया, बिहार का दर्द सामने आने लगा . यह भी हुआ कि मुद्दे से इतर कई लोग रवीश से ही सवाल पूछने लगे . जिन्हें इश्यूज से मतलब नहीं, उन्होंने रवीश को घेरना शुरु कर दिया .

पब्लिक बता रही बिहार का हाल

पुष्पेंद्र कुमार द्विवेदी ने रवीश के स्टेटस पर कमेंट करते हुए लिखा – ‘बीआरएबीयू का भी कमोबेश वही हाल है, असल मे बिहार के पटना विश्वविद्यालय को छोड़ बाकी सभी जगह यही नौटंकी है . सत्ता पढ़ाई को प्राथमिकता नही देती क्योंकि पढ़े लोग विरोध करने में सक्षम हो जाते हैं, विपक्ष के लिए ये सरोकार रखने लायक कोई विस्फोटक मुद्दा ही नहीं है . आम जनता तो रुग्ण है, क्योंकि उसे भावनात्मक मुद्दे पसंद हैं . प्रगतिशील बच्चे तो सामाजिक मान्यताओं और रूढ़ियों के लिए भी संकट हैं . ‘

 

मुकुल कुमार लिखते हैं – ‘यह मामला सिर्फ छपरा यूनिवर्सिटी का नहीं , बाबा साहब बिहार यूनिवर्सिटी, मुजफ्फरपुर बिहार का भी है . मैं पीजी (मैथ)2016-18 का छात्र हूं . पर मेरा अभी पहला सेमेस्टर का भी एग्जामिनेशन फॉर्म नहीं भरा गया है . यहाँ छात्रों की कौन सुनता है . ‘

प्रियांश मिश्रा बता रहे हैं – ‘ हां ये सच है 2013 बैच का मैं और अभी अब फाइनल एग्जाम होने जा रहा है . अब समझ नही आ रहा ऐसे में क्या करें ? एक तो ऐसे ही 2 साल पीछे ऊपर से वो भी कन्फर्म नही आगे क्या होगा ? इस वक़्त दूसरे जगह से फॉर्म भरते भी हैं तो 5+3 साल यानी 8 साल में ग्रेजुएशन होगा कम्पलीट . 2 साल से BHU में पढ़ने का सपना सजा रहे . ये हाल रहा तो शायद अब सपना ही रह जाये. किसको दोष दें किस सरकार को ?किस व्यवस्था को ? कोई दोषी नहीं है . दोषी सिर्फ व सिर्फ हम हैं खुद, जो वहां एडमिशन ले लिए और बस साल दर साल देखते रहे .’

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