अरे वाह ! अब बिहार नहीं है देश का सबसे करप्‍ट प्रदेश, अधिक करप्‍ट है गुजरात  

पटना : जी हां,2005 में बिहार देश के सर्वाधिक करप्‍ट प्रदेशों की टॉप सूची में शामिल था. 2005 में ही नीतीश कुमार चुनावी संग्राम में राजद को परास्‍त कर सत्‍ता में आये थे. तब भाजपा भी साथ थी. नीतीश कुमार ने वायदे पूरे करने को भ्रष्‍ट व्‍यवस्‍था पर लगातार चोट किया. परिणाम,2017 में जब सत्‍ता में मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार के साथ लालू प्रसाद की राजद है,फिर भी देशव्‍यापी सर्वे में भ्रष्‍टाचार के मामले में बिहार निचले पायदान की ओर बढ़ा है. मतलब साफ है,2005 की तुलना में 2017 में बिहार में भ्रष्‍टाचार बहुत कम हो गया है.

ये हम-आप नहीं कह रहे हैं. रिपोर्ट सेंटर फॉर मीडिया स्‍टडीज (CMS) ने गुरुवार को नई दिल्‍ली में जारी की है. सीएमएस ने भ्रष्‍टाचार के देशव्‍यापी स्‍तर को जानने को 20 प्रदेशों में सर्वे किया था. अगले महीने मई में नरेन्‍द्र मोदी की सरकार तीन साल पूर्ण कर लेगी,ऐसे में भ्रष्‍टाचार संबंधी इस सर्वे रिपोर्ट को बहुत महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है. रिपोर्ट में चर्चा है कि देश का यह परसेप्‍शन है कि नरेन्‍द्र मोदी की सरकार बनने के बाद करप्‍शन के खिलाफ एक्शन तेज हुए हैं.

इस रिपोर्ट को जारी किये जाने के वक्‍त दिल्‍ली में नीति आयोग के मेंबरान भी उपस्थित थे. सर्वे में 20 प्रदेशों के शहरी और ग्रामीण परिवेश के 3000 हाउसहोल्‍ड्स को शामिल किया गया था. निष्‍कर्ष यह निकला कि 2005 में इन प्रदेशों के लोगों ने पब्लिक सर्विसेज को हासिल करने को जहां 20500 करोड़ रुपये की रिश्‍वत दी थी,वहीं 2016 में मात्र 6350 करोड़ रुपये दिए गए.

बिहार में भ्रष्‍टाचार बहुत कम हुआ

सेंटर फॉर मीडिया स्‍टडीज की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में देश के टॉप-5 करप्‍ट स्‍टेट पब्लिक सर्विसेज के मामले में कर्नाटक (77 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (74 प्रतिशत), तमिलनाडु (68 प्रतिशत), महाराष्‍ट्र (57 प्रतिशत), जम्‍मू – कश्‍मीर (44 प्रतिशत) और पंजाब (42 प्रतिशत) है.

बिहार में भ्रष्‍टाचार कितना कम हुआ,यह जानने को सेंटर फॉर मीडिया स्‍टडीज के 2005 की रिपोर्ट को देखते हैं. तब 74 प्रतिशत के साथ बिहार देश का सबसे करप्‍ट प्रदेश था. बिहार के पीछे जम्‍मू-कश्‍मीर (69 प्रतिशत), ओड़ीसा (60 प्रतिशत), राजस्‍थान (59 प्रतिशत) व तमिलनाडु (59 प्रतिशत) थे.

तुलनात्‍मक एनालिसिस ये है कि 2017 में बिहार के पब्लिक सर्विसेज में भ्रष्‍टाचार का प्रतिशत 26 पाया गया. अर्थ यह कि 2005 की तुलना में 48 प्रतिशत करप्‍शन कम हो गया. लेकिन गुजरात की रिपोर्ट अलग है. गुजरात में करप्‍शन बिहार की तुलना में कम घटा,रिपोर्ट कह रही है. 2005 में गुजरात में 43 प्रतिशत करप्‍शन था,अब 6 प्रतिशत घटकर 37 प्रतिशत पर आया है. एनालिसिस यह भी बता रही है कि साल 2017 में बिहार (26 प्रतिशत) गुजरात (37 प्रतिशत) से कम करप्‍ट स्‍टेट है.

ये हैं सबसे कम भ्रष्‍ट प्रदेश

साल 2017 की रिपोर्ट में देश के सबसे कम भ्रष्‍ट प्रदेशों की सूची में हिमाचल प्रदेश (3 प्रतिशत), केरल (4 प्रतिशत), और छत्‍तीसगढ़ (13 प्रतिशत) है. ध्‍यान रखें,गुजरात ने अपना स्‍थान खोया है. 2005 की सूची में सबसे कम भ्रष्‍ट प्रदेशों में गुजरात भी शामिल था. 2005 की रिपोर्ट में देश के सबसे कम भ्रष्‍ट प्रदेश थे – केरल (35 प्रतिशत), महाराष्‍ट्र (39 प्रतिशत) व गुजरात (43प्रतिशत).

बिहार-झारखंड के लिए ये है खतरे की घंटी

रिपोर्ट कहती है कि सर्वे में पब्लिक का परसेप्‍शन ये रहा कि पिछले एक साल में पब्लिक सर्विसेज में करप्‍शन बढ़ा है. प्रतिशत से देखें,तो रिपोर्ट का गणित ओड़ीसा (68 प्रतिशत), कर्नाटक (65 प्रतिशत), झारखंड (59 प्रतिशत), बिहार (59 प्रतिशत) और छत्‍तीसगढ़ (56 प्रतिशत) है.

नजरिया केन्‍द्र – राज्‍य के प्रति

सेंटर फॉर मीडिया स्‍टडीज की रिपोर्ट यह बता रही है कि बिहार के 54 फीसदी लोगों ने माना कि भ्रष्‍टाचार रोकने को केन्‍द्र सरकार ने बहुत कुछ किया है,जबकि 45 प्रतिशत लोगों ने एक्‍शन को सीमित हद तक ही माना है. राज्‍य सरकार के मामले में बिहार के 19 फीसदी लोगों ने माना कि काफी कुछ किया गया है,लेकिन 65 प्रतिशत ने कहा कि कार्रवाई सीमित है.

गुजरात की बात करें,तो सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों ने कहा कि केन्‍द्र ने बहुत कुछ किया है,शेष 69 प्रतिशत एक्‍शन को सीमित ही मान रहे हैं. गुजरात की सरकार के बारे लोगों का नजरिया रहा कि 13 प्रतिशत ने एक्‍शन को बहुत ठीक कहा,जबकि 60 प्रतिशत ने कहा कि एक्‍शन सीमित ही है.

कहां-कितना करप्‍शन

अब आप नीचे के चार्ट को देखें,जो सेंटर फॉर मीडिया स्‍टडीज की रिपोर्ट का अंश है. यह चार्ट आपको बता रहा है कि किस पब्लिक सेक्‍टर में कितना करप्‍शन है –

यह भी पढ़ें-
भोजपुर के लाल ऋषि ने कुपवाड़ा में मार गिराये दो आतंकी
सहारा प्रमुख को चेतावनी : चेक बाउंस हुए तो फिर भेज दिये जायेंगे तिहाड़