देखिए! कोरोना से लड़ने के लिए कितना तैयार है बिहार, क्या जंग जीत जाएंगे?

लाइव सिटीज, लक्ष्मीकांत दुबे: राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 16 सौ के पार पहुंच गई है. इसमें एक हज़ार से ज्यादा नए संक्रमित सिर्फ मई महीने में मिले हैं. वहीं, अब तक नौ लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है, जिसमें सात की मौत इसी महीने में हुई है. पिछले कुछ दिन से रोजाना औसतन सौ से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. नए संक्रमित लोगों में प्रवासियों की संख्या सबसे ज्यादा है.

बिहार में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी भी प्रवासी श्रमिकों के आने के बाद से ही बढ़ी है. अभी अगले कुछ दिनों में कम से कम दस लाख प्रवासियों के बिहार लौटने की उम्मीद है. अगर इसी रफ्तार से संख्या बढ़ती रही, तो जून के पहले हफ्ते तक मरीजों की संख्या पांच से ज्यादा होने का अंदेशा है. अगर ऐसा होता है और हालात बिगड़ते हैं तो संभालना भी मुश्किल हो जायेगा. क्योंकि, आंकड़े बताते हैं कि हमारे यहां अस्पताल में न पर्याप्त संख्या में आईसीयू बेड हैं और ना ही वेंटिलेटर.

प्रदेश में न सिर्फ अस्पतालों में सुविधाओं की कमी है बल्कि डॉक्टरों की भी कमी है. जुलाई 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 28931 लोगों पर एक डाक्टर है. ये आंकड़ा डब्ल्यूएचओ के मानक से भी कम हैं. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, हर 1 हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए.

सेंटर फॉर डिसीज डायनामिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी यानी सीडीडीईपी की रिपोर्ट बताती है कि बिहार में सिर्फ 3034 अस्पताल हैं. इनमें से 1147 सरकारी और 1887 प्राइवेट अस्पताल हैं. इन अस्पतालों में 30 हजार 857 बेड ही हैं. रिपोर्ट के अनुसार बिहार के अस्पतालों में कुल 1543 आईसीयू हैं. इनमें से 583 सरकारी अस्पताल में और 960  प्राइवेट अस्पताल में हैं. वेंटिलेटर्स की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार बिहार में मात्र 771 वेंटिलेटर्स हैं. इनमें से 292  सरकारी अस्पताल में और 480 प्राइवेट अस्पताल में हैं.

बढ़ते मरीजों के साथ अब सुविधाओं पर देना होगा ध्यान

अनुमान लगाया जा रहा है कि जैसे-जैसे प्रवासी मजदूरों के लौटने की संख्या और जांच बढ़ेगी संक्रमित मरीजों की संख्या भी बढ़ेगी. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि यदि हालात बिगड़े तो उससे सरकार कैसे निपटेगी. यूं तो कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए एनएमसीएच में 800 बेड हैं. यहां पर आइसीयू के 20 बेड और 20 वेंटिलेटर हैं. यहां पर 12 बेडों का आइसोलेशन वार्ड है. गया के एएनएमसीएच में भी 544 बेड और 60 आइसीयू की व्यवस्था है.

एनएमसीएच में 60 आइसीयू बेड व 18 वेंटिलेटर है. साथ ही जेएलएनएमसीएच, भागलपुर में हजार बेड और 36 बेडों का आइसीयू व 12 वेंटिलेटर मशीनें हैं. इसके अलावा केंद्र सरकार के संस्थान एम्स में भी अपना आइसीयू व वेंटिलेटर मशीनें हैं. लेकिन अब राज्य में मरीजों की संख्या बढ़ रही है और जोखिम भी बढ़ने की आशंका है. अगर तैयारियों में थोड़ी भी सुस्ती होगी, तो स्थिति बिगड़ सकती है.