सात करोड़ में नहीं बिकेगा बिहार का ये IAS दूल्‍हा, बिना दहेज करेंगे राजपूताना शादी

पटना : देश में सबसे अधिक महंगे आईएएस-आईपीएस दूल्‍हे बिकते हैं . बिहार में तो यह रेट और भी टाइट होता है . आईएएस-आईपीएस दामाद राजपूत-भूमिहार/कुर्मी-कोइरी- यादव कास्‍ट से हो, तो ऑफर रेट कई गुणा और बढ़ जायेंगे . पैसों की कमी नहीं है ऐसे दामाद के लिए बिहार में . पांच-सात करोड़ देने वाले थोक भाव में मिल जायेंगे . लेकिन, बिहार के मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार की दहेजबंदी मिशन का असर सबसे अधिक आईएएस डा. विवेक कुमार की शादी में दिखने वाला है . वे बिना दहेज शादी करेंगे .

डा. विवेक कुमार बिहार के औरंगाबाद से हैं . 2015 में सिविल सर्विसेज एग्‍जामिनेशन में 80 वां स्‍थान हासिल किया था . आईएएस होने के पहले एमबीबीएस कर डाक्‍टर बने थे . लेकिन, जिंदगी का संकल्‍प आईएएस बनने का था, जो उन्‍होंने पूरा कर लिया है .



IAS  डा. विवेक के पिता हैं विधायक

डा. विवेक कुमार के पिता वीरेन्‍द्र कुमार सिंह औरंगाबाद के नवीनगर से जदयू के विधायक हैं . मां हाउसवाइफ हैं . पिता वीरेन्‍द्र कुमार सिंह पहले औरंगाबाद के सांसद भी रह चुके हैं . सिंह बिहार के मुख्‍य मंत्री नीतीश कुमार के दहेजबंदी अभियान से प्रभावित हैं . सो, उन्‍होंने आईएएस बेटे डा. विवेक की शादी में ‘नो दहेज’ का निर्णय किया है .

IAS डॉ विवेक को मिठाई खिलाते पिता जदयू विधायक डॉ वीरेन्द्र कुमार

पिता वीरेन्‍द्र कुमार सिंह के निर्णय की जानकारी पत्रकार अखिलेश कुमार ने अपने फेसबुक के माध्‍यम से दुनिया को दे दी है . इस निर्णय का स्‍वागत भी किया जा रहा है .

प. बंगाल कैडर मिला है विवेक कुमार को

आईएएस डा. विवेक कुमार को पश्चिम बंगाल कैडर मिला है . अभी उनकी पदस्‍थापना मिदनापुर में है . आईएएस की तैयारी के बारे में डा. विवेक बताते रहे हैं कि एमबीबीएस करने के बाद ही उन्‍होंने इसके लिए ठोस प्‍लान बनाया था . माता-पिता का समर्थन हर फैसले में मिला . करियर के लिए निर्णय लेने को आजादी मिली हुई थी . अब देश की सच्‍ची सेवा करना चाहते हैं . 

IAS डॉ विवेक कुमार
विवेक पढ़ता भी है, पापा को भरोसा ही नहीं था

डा. विवेक कुमार के पिता जदयू विधायक वीरेन्‍द्र कुमार सिंह कहते रहे हैं कि उन्‍हें पहले तो भरोसा ही नहीं होता था कि बेटा मन लगाकर पढ़ रहा है . मेडिकल की पढ़ाई के दिनों में जब वह छुट्टियों में घर आता था, तो कभी नहीं पढ़ता था . कहने पर भी नहीं . हम गुस्‍सा जाते थे . लेकिन जब उसने एमबीबीएस कर लिया,तो यकीन बढ़ा . फिर तो उसने सिविल सर्विसेज कंपीटिशन को क्रैक कर घर में खुशियां ही खुशियां भर दी .