बागियों को बीजेपी ने दी चेतावनी, नाम वापस लें, वरना 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिए जाएंगे…

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बीजेपी ने अपने बागी नेताओं को अल्टीमेटम देना शुरू कर दिया है. वैसे नेताओँ को पार्टी की ओर से फोन घुमाया जाने लगा है जो पार्टी से बगावत कर चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. पार्टी की ओर से उन्हें अंतिम मौका दी जा रही है. ताकि वो अपना नॉमिनेशन वापस ले सकें.

पहले चरण के 71 सीटों पर हो रहे चुनाव में अब तक आधा दर्जन से अधिक चर्चित चेहरों ने बीजेपी से नाता तोड़ते हुए दूसरे दलों से चुनावी मैदान में कूद गए हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ बीजेपी ने अब कड़ा रूख अख्तियार कर लिया है. उन्हें नाम वापसी की तिथि तक का समय दिया गया है.



सूत्रों की माने तो बागी नेताओं को पार्टी नेतृत्व ने फोन कर साफ कहा है कि वे नाम वापस लें वरना उन्हें छह साल के लिए दल की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया जाएगा. हालांकि इस आदेश का बागी नेताओं पर कितना असर पड़ता है तो 12 अक्टूबर तक पता चला पाएगा. क्योंकि पहले चरण के चुनाव के लिए नाम वापसी की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर है.

बात करें साल 2015 के बिहार चुनाव की तो बीजेपी 157 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. जिसमें कई नेताओं को मैदान में ताल ठोकने का मौका मिला था. लेकिन इसबार जेडीयू के साथ आ जाने से बीजेपी के खाते में 110 सीटें ही आयी है. जिससे पिछली बार की तुलना में इस बार पार्टी 47 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ पाएगी. ऐसे में जिन-जिन नेताओं ने पिछली बार पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में भाग्य आजमाया था, वे इस बार भी दूसरे दलों का दामन थामकर अपनी किस्मत आजमाना चाह रहे हैं.

बीजेपी में बागियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है. बागियों में सबसे चर्चित चेहरा राजेन्द्र सिंह व रामेश्वर चौरसिया हैं. रामेश्वर चौरसिया पार्टी के फायरब्रांड नेता माने जाते थे. प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा करते थे. लेकिन नोखा सीट जैसे ही जदयू के खाते में गई कि वे पार्टी छोड़कर लोजपा के टिकट पर सासाराम से चुनावी मैदान में उतर गए. वहीं साल 2015 में पार्टी के सीएम फेस के रूप में अचानक से चर्चा में आए राजेन्द्र सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष थे. दिनारा सीट जदयू कोटे में चली गई तो वे भी बिना देरी किए भाजपा से नाता तोड़ लिए और लोजपा के उम्मीदवार बन चुके हैं. 

इसी तरह पालीगंज सीट जदयू के कोटे में जाने के बाद वहां की विधायक रहीं उषा विद्यार्थी ने भी लोजपा का दामन थाम लिया. भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश प्रवक्ता रहीं श्वेता सिंह भी लोजपा के टिकट पर संदेश से चुनावी मैदान में उतर गई हैं.

जबकि भाजपा कार्यसमिति की सदस्य इंदू कश्यप जहानाबाद तो एक समय भाजपा से नाता रखने वाले राकेश कुमार सिंह ने भी पार्टी का दामन त्यागकर घोसी से लोजपा के उम्मीदवार बन चुके हैं. साल 2015 के चुनाव में अमरपुर से मृणाल शेखर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ च़ुके हैं. इस बार यह सीट जदयू के कोटे में चली गई तो मृणाल शेखर ने पार्टी को त्यागकर लोजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर गए हैं.