पुराने जमाने की टेलीपैथी अब हुई सच, मन ही मन में अब कर सकेंगे आपसी बातें

लाइव सिटीज, साहुल पांडेयः हमेंशा से हम सुनते आ रहे थे कि पूराने जमाने में लोग बिना किसी से बाते करते हुए भी आपस में मन में बात कर लेंते थे. अंग्रेजी में कहें तो इसे टेलीपैथी के नाम से जाना जाता है. लेकिन आज के समय में ये काम एक कहानी मात्र लगता है. लेकिन साइंस के इस युग में कुछ भी इम्पॉसिबल नहीं है. जी हां.. अब वैज्ञानिकों ने टेलीपैथी जैसी ही एक तकनीक को विकसित कर लिया है. लेकिन इस तकनीक का प्रयोग अभी सिर्फ गेम खेलते समय किया जा सकता है.

बिना बात किए विचारों को साझा कर सकते हैं !

जानकारी के अनुसार वाशिंगटन विश्वविद्यालय और कार्नेगी मेलॉन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को विकसित किया है. इस तकनीक की मदद से हम अपने विचारों का उपयोग करके एक-दूसरे के साथ बिना बात किए ही अपने विचारों को साझा कर सकेंगे. आपको बता दे कि यह तकनीक अभी भी अपने शिशु चरण में है. यानि अभी इस तकनीक को सिर्फ एक लेवल पर ही विकसित किया गया है. लेकिन वैज्ञानिकों की माने तो जल्द ही इस तकनीक का इस्तेमाल बड़े स्तरों पर भी किया जा सकता है.

वैज्ञानिकों ने अपने एक प्री-प्रकाशन रिलीज में लिखा है, हम ब्रेननेट प्रस्तुत कर रहे हैं. जो हमारे ज्ञान के लिए, समस्या निवारण के लिए पहला बहु-व्यक्ति ब्रेन टू ब्रेन इंटरफेस है. इस तकनीक के बारे में बताते हुए कहा गया है कि यह ब्रेन टू ब्रेन इंटरफेस जिसका नाम ब्रेननेट रखा गया है. तीन-तरफा तंत्रिका कनेक्शन से जुड़ा है. इसके साथ ही दो इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राम (ईईजी) और ट्रांसक्रैनियल चुंबकीय उत्तेजना (टीएमएस) का उपयोग करके इसे संचालिक किया जाता है. ईईजी से एक व्यक्ति दूसरे को जिसने टीएमएस पहना होता है उसे निर्देश या जानकारी साझा करता है.

अभी गेमर्स के लिए विकसित है तकनीक

आपको बता दे कि इस डिवाइस का प्रयोग फिलहाल टेट्रिस प्रकार के वीडियो गेम खेलनेवाले गेमर्स के बीच उनके विचारों को साझा करने के लिए किया जा रहा है. वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तकनीक को टेस्ट करते समय सबसे पहले ईईजी से दो लोगों जो टेट्रिस-स्टाइल गेम खेलते थे को खेलने को कहा गया. फिर टीएमएस के जरिए रिसीवर को मैसेज भेजा गया.

इस प्रकिया में प्रेशक अपनी प्रतिक्रिया को रिले भी कर सकते हैं कि रिसीवर ने टेलीपैथिक निर्देशों को सही ढंग से समझा है या टेलीपैथिक निर्देशों को समझ नहीं लिया है. वहीं रिसीवर पूरी तरह ब्रेन संचार के आधार पर कॉल का भी कर सकता है. आपको बता दें कि इस प्रकिया को 5 बार दोहराया गया जिसमें कुल 81 प्रतिशत ऐक्यूरेसी देखी गई.

About Md. Saheb Ali 3496 Articles
Md. Saheb Ali

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*