मोदी जी कुछ कीजिए…नहीं तो खत्म हो जाएगा BSNL !

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : देश की सबसे पुरानी टेलीकॉम कंपनी BSNL के कर्मचारियों के लिए बुरी ख़बर है. ख़बर ये है कि कैश की कमी के कारण सबसे बड़ी सरकारी टेलीकॉम कंपनी  का अपने कर्मचारियों को जून की सैलरी देना बेहद मुश्किल हो गया है.

सैलरी के लिए नहीं हैं पैसे

जानकारी के अनुसार सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने सरकार को बताया है कि कंपनी के पास कामकाज जारी रखने के लिए पैसे नहीं हैं. कैश की कमी के कारण जून महीने में कंपनी के लगभग 1.7 लाख कर्मचारियों को 850 करोड़ की सैलरी दे पाना बेहद मुश्किल है. बता दें कि कंपनी पर अभी करीब 13 हजार करोड़ रुपये की आउटस्टैंडिंग देनदारी है.

BSNL के कॉर्पोरेट बजट एंड बैंकिंग डिवीजन के सीनियर जनरल मैनेजर पूरन चंद्र ने टेलीकॉम मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी को एक पत्र लिखकर इस बाबत जानकारी दी. उन्होंने पत्र में लिखा है कि ‘हर महीने की रेवेन्यू और खर्चों में गैप के चलते अब कंपनी का संचालन जारी रखना चिंता का विषय बन गया है क्योंकि अब यह एक ऐसे लेवल पर पहुंच चुका है जहां बिना किसी पर्याप्त इक्विटी को शामिल किए बीएसएनएल के ऑपरेशंस जारी रखना लगभग नामुमकिन होगा.’

टॉप घाटे की कंपनी है BSNL

गौरतलब है कि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कुछ महीने पहले कंपनी की बिगड़ती स्थिति का जायजा लिया था. कंपनी के चेयरमैन ने बैठक के दौरान पीएम मोदी को एक प्रेजेंटेशन भी दिया था. हालांकि इस बैठक के बाद भी कंपनी की समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पाया. बता दें कि BSNL सबसे ज्यादा घाटे में चल रही पीएसयू है. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2018 के आखिर तक कंपनी को 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का परिचालन नुकसान झेलना पड़ा था.

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पीएम मोदी से कर्मचारियों की गुहार

ऐसे में कंपनी के सामने कर्मचारियों की सैलरी और अन्य बेनिफिट्स सबसे बड़ी समस्या है. इससे पहले रविवार को ही बीएसएनएल के इंजिनियरों और लेखा पेशेवरों के एक संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कंपनी के पुनरूद्धार के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि बीएसएनएल पर कोई कर्ज नहीं है और इसकी बाजार हिस्सेदारी में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में कंपनी को फिर से खड़ा किया जाना चाहिए। कंपनी में उन कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए जो अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं.

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