भोरे-भोरे : जहानाबाद में ‘मुर्गा लड़ाई’ शुरु, विजेता को ही मिलेगा चुनाव लड़ने का टिकट

लाइव सिटीज, जहानाबाद/पटना : आज शुक्रवार 15 दिसंबर को भोरे से ही जहानाबाद में पोलिटिकल मुर्गे बहुत तेजी से बांगने लगे हैं . नस्‍ल देसी है तो मुकाबले को फारम वाले मुर्गे भी हैं . ‘मुर्गा लड़ाई’ का वक्‍त आ गया, जहानाबाद गुरुवार 14 दिसंबर की रात को ही जान गया था . जब सभी न्‍यूज चैनल तेजी से गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव का एग्जिट पोल दिखा रहे थे, तभी यह खबर भी चुपके से आ गई थी कि बिहार में खाली पड़े लोक सभा / विधान सभा के उप चुनाव फरवरी 2018 में होंगे .

जहानाबाद खाली है . 2015 में राजद के टिकट पर विधायक बने मुंद्रिका सिंह यादव का निधन पिछले महीनों में हो गया था . तब से, जहानाबाद के भावी विधायक को लेकर ढ़ेर सारी बातें होती हैं . पर, अब तो उप चुनाव वाले ‘मुर्गा लड़ाई’ के लिए उम्‍मीदवार तय करने का वक्‍त आ गया है .

जहानाबाद के दिवंगत विधायक मुंद्रिका सिंह यादव

जहानाबाद के बहाने बिहार के एनडीए गठबंधन के एका की परीक्षा भी होनी है . 2015 में लड़ाई महागठबंधन बनाम एनडीए गठबंधन की थी . तब जदयू ने जहानाबाद की जीती हुई सीट राजद के लिए कुर्बान की थी . एनडीए में सीट रालोसपा के खाते में गई थी . उपेन्‍द्र कुशवाहा और अरुण कुमार 2015 में एक थे . पर, अब नहीं हैं . 2015 में अरुण कुमार ने बहुतों को चौंकाते हुए प्रवीण कुमार को टिकट दिला दिया था . लेकिन प्रवीण राजद के मुंद्रिका सिंह यादव के हाथों चुनाव हार गये थे .

सुदय के पीछे लग गये हैं उदय

आज सुबह से जहानाबाद के उप चुनाव के संबंध में बांग रहे पोलिटिकल मुर्गों के चाल-दांव को जब पढ़ना शुरु किया गया, तो पता चला कि राजद का चुनाव लड़ना तय है . मुंद्रिका सिंह यादव के निधन के बाद संवेदना व्‍यक्‍त करने आए लालू प्रसाद ने परिवार से कहा था, दोबारा मुंद्रिका बाबू को मंत्री न बना पाने का मलाल है . परिवार का ख्‍याल रखेंगे . विरासत भी जरुर मिलेगी .

लालू प्रसाद के भरोसे ने स्‍पष्‍ट कर दिया कि टिकट मुंद्रिका सिंह यादव के बेटे सुदय यादव को ही मिलेगा . सुदय पहले से अपने पिता के कामों में हाथ बंटाते थे . पर, घर में आते टिकट ने तूफान बढ़ा दिया . जानकार कहते हैं कि कइयों ने मुंद्रिका सिंह यादव के दूसरे पुत्र उदय यादव को चढ़ा दिया . वे भी चुनाव-चुनाव बांगने लगे . पर, पिछले दिनों लालू प्रसाद गया जाने के क्रम में सुदय यादव को ही अपने साथ ले गये, सो पलड़ा इधर ही भारी है .

रालोसपा में बहुत कंफ्यूजन है

सबों को पता है कि नीतीश कुमार फिर से एनडीए के मुख्‍य मंत्री हैं . लेकिन रालोसपा प्रमुख उपेन्‍द्र कुशवाहा के साथ अब भी बहुत कफर्ट रिश्‍ते नहीं हैं . खुद कुशवाहा भी लालू प्रसाद के प्रति सॉफ्ट रहते हैं . ऐसे में, भविष्‍य की सियासत को लेकर कई तरीके की चर्चा रहती है .

रालोसपा जहानाबाद को अपना मानती है . कुछ दिन पहले ही कुशवाहा के सामने रालोसपा में नये आए पुराने नेता नागमणि ने कहा था, पंखा भी हमारा और जहानाबाद भी हमारा . जहानाबाद तो हम ही लड़ेंगे . किसी तरह कुशवाहा ने एनडीए में फिर से जहानाबाद की सीट को रालोसपा के लिए रख भी लिया, तो कैंडिडेट कौन, बहुत कंफ्यूजन है . कोई दूसरी पार्टी से इंपोर्ट भी हो सकता है . अभी गोपाल शर्मा लगे हैं, जो 2015 में बागी लड़ गए थे और मात्र 3015 वोट लाकर जमानत गंवा बैठे थे . दावेदारी तो पिंटू कुशवाहा भी करते हैं, पर जहानाबाद या तो यादव अथवा भूमिहार की सीट ही बनती है .

सांसद अरुण कुमार की चाहत

सांसद अरुण कुमार का रिश्‍ता उपेन्‍द्र कुशवाहा से 36 का हो गया है . जानकार कहते हैं कि अरुण अब भाजपा के अधिक करीब हो गये हैं . 2019 के लोक सभा चुनाव में वे भाजपा के ही प्रत्‍याशी बनेंगे .

पर, जहानाबाद विधान सभा के उप चुनाव की दावेदारी वे ऐसे ही नहीं छोड़ देंगे . मन पढ़ने वाले का दावा रखने वाले लोग कहेंगे कि अरुण कुमार उप चुनाव में भाजपा प्रत्‍याशी चाहेंगे . इच्‍छा तो कुमार ही जानें, लेकिन बहुत लोगों ने इधर के दिनों में उनके बेटे ऋतुराज को भी पोलिटिकली एक्टिव होते देखा है . 2015 में कुमार के खास प्रवीण कुमार 46 हजार वोट लाकर 30 हजार वोटों से हारे थे .

जदयू कह रहा, दावा तो हमारा है

जदयू भी दावा ऐसे ही नहीं छोड़ देना चाहती . जहानाबाद के जदयू के नेताओं की बातचीत से ऐसा ही लगेगा . आधार कि 2010 में जदयू के प्रत्‍याशी अभिराम शर्मा जीते थे . 2015 में जदयू ने महागठबंधन में राजद के लिए सीट कुर्बान की . फिर से जदयू समर्थित राजद के मुंद्रिका सिंह यादव को ही जीत मिली . सो, दावा तो जदयू का ही बनता है .

मुंद्रिका सिंह यादव के निधन के बाद से ही पुराने अभिराम शर्मा ने फिर से जहानाबाद में दौड़ना शुरु कर दिया था . उनके राजनीतिक पिता राज्‍य सभा सांसद किंग महेन्‍द्र हैं . पर, देखना यह होगा कि 2018 के मार्च में किंग महेन्‍द्र को फिर से अपने लिए टिकट की जरुरत होगी, ऐसे में वे अभिराम के लिए कितनी पैरवी कर पाते हैं .

जगदीश शर्मा को इग्‍नोर कैसे करेंगे

बात जहानाबाद की हो तो पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के प्रभाव को इग्‍नोर तो नहीं कर सकते . चारा घोटाले में सजायाफ्ता हैं . खुद चुनाव नहीं लड़ सकते .  2015 के विधान सभा चुनाव में बेटा राहुल मजबूत किला घोसी से हार गये . कहने वाले कह रहे हैं कि जहानाबाद के विधान सभा के उप चुनाव में जगदीश शर्मा की अभी बहुत दिलचस्‍पी नहीं है . पर 2019 के लोक सभा चुनाव में राहुल को उम्‍मीदवार के रुप में जरुर देखना चाहते हैं . जल्‍द ही लालू प्रसाद के साथ वक्‍त गुजारने का मौका फिर से आने वाला है, इसमें भविष्‍य की बातें जरुर होगी .

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