CBSE नहीं जाएगा सुप्रीम कोर्ट, शिक्षा मंत्री ने कहा – 12वीं के नतीजे में नहीं होगी देरी

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लाइव सिटीज डेस्क : सीबीएसई विवाद में अब नया मोड़ आ गया है. मॉडरेशन पालिसी में बदलाव पर हाईकोर्ट के रोक लगाने से यह माना जा रहा था कि सीबीएसई अब हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा.

लेकिन अब खबर यह है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विभिन्न पहलुओं पर कानूनी राय लेने के बाद कानून विशेषज्ञों के सुझाव पर रणनीति में बदलाव किया है.

सीबीएसई मॉडरेशन पॉलिसी का विरोध शुरू से ही नहीं कर रहा था, बल्कि मॉडरेशन पॉलिसी की आड़ में देशभर के विभिन्न राज्यों के शिक्षा बोर्ड द्वारा रिजल्ट सुधारने के लिए गैरकानूनी तरीके से मॉर्क्स की स्पाइकिंग (अत्यधिक अंक देने) के खिलाफ था.

सूत्रों के मुताबिक, कानून विशेषज्ञों ने सीबीएसई के वर्ष 1992 में  मॉडरेशन पॉलिसी शुरू करने के दौरान बनाई गई ‘एग्जामिनेशन बायलॉज’ के पांच प्वाइंट  का अध्ययन किया, जिसमें मॉडरेशन पॉलिसी के तहत कठिन प्रश्न पत्र आने पर राहत अंक देने की बात थी लेकिन उसमें मार्क्स ऑफ स्पाइकिंग शामिल नहीं था.

इसके अलावा सीबीएसई और राज्यों के बीच पिछले महीने आयोजित बैठक के एजेंडे और सिफारिशों के बारे में भी जानकारी हासिल की. इसी आधार पर कानून विशेषज्ञों ने मंत्रालय और सीबीएसई को कहा कि अदालत के फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की जरूरत नहीं है.

क्योंकि सीबीएसई अदालत के फैसले के तहत मॉडरेशन पॉलिसी को मानता है, जिसमें कठिन सवाल आने पर अतिरिक्त अंक देना शामिल है. जबकि सीबीएसई ने जब मॉडरेशन पॉलिसी लाया था, उस समय उसका मकसद दसवीं या 12वीं की परीक्षा में कठिन प्रश्न पत्र आने पर विशेषज्ञों की कमेटी द्वारा प्रश्न पत्र के आधार पर छात्रों को दस से 25 अतिरिक्त अंक देने का फैसला लेना था. इस कमेटी में शिक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के अलावा विषय विशेषज्ञ भी शामिल होते हैं.

वहीं, विज्ञान भवन में 24 अप्रैल को सीबीएसई की ओर से 32 राज्यों के शिक्षा बोर्ड के सचिव व शिक्षा मंत्रियों के साथ आयोजित बैठक में सीबीएसई ने राज्यों के शिक्षा विभागों से  सिफारिश की थी कि वे गैरकानूनी ढंग से मार्क्स की स्पाइकिंग न करें. क्योंकि यदि हर शिक्षा बोर्ड सौ फीसदी अंक देने लगा तो इससे छात्रों को उच्च शिक्षा में दाखिले की राह मुश्किल होगी.

 वहीं इस मामले में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को कहा कि 12वीं के नतीजों में देर नहीं होगी। जावड़ेकर का आश्वासन ऐसे समय आया है जब दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को अतिरिक्त अंकों की नीति समाप्त करने के निर्णय पर आगे नहीं बढ़ने का आदेश दिया है. परीक्षा में अतिरिक्त अंक दिए जाने की नीति पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) उम्मीद के विपरीत गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंचा.

हालांकि बुधवार को इस बारे में उसने कानूनी सलाह ली थी.बोर्ड अगर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाता है तो नतीजे घोषित करने में देरी तय . इस बीच मंत्रलय ने सीबीएसई को विकल्प भी दिया है कि वह इस साल नीति को बरकरार रखे. इसके तहत कठिन प्रश्नों या गलत प्रश्नों के बदले छात्रों को अतिरिक्त अंक दिए जाएं. सूत्रों का दावा है कि सीबीएसई इस विकल्प पर भी विचार कर रहा है तथा इस कदम से होने वाली देरी का भी आकलन कर रहा है.

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