कोरोना की लड़ाई में केन्द्र सरकार विफल, अम्फान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे सरकार

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : विपक्षी दलों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सोनिया गांधी ने बैठक की. बैठक में कांग्रेस नेताओं के अलावा राकांपा, शिवसेना, द्रमुक, जेडीएस, राजद, वामदल, हम समेत करीब 22 पार्टियों के नेताओं ने शिरकत किया. बैठक में कोरोना वायरस महामारी के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और आर्थिक पैकेज पर मुख्य रूप से चर्चा की गई.  बैठक की शुरुआत विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा बंगाल और ओडिशा में चक्रवात अम्फान से पीड़ित लोगों के प्रति शोक जता कर हुई.

बैठक में सभी दलों के नेताओं के साथ सोनिया गांधी ने कोरोना को लेकर केन्द्र सरकार की तैयारियों पर चर्चा की. जिसमें सभी दलों के नेताओं ने केन्द्र सरकार की तैयारियों को नकाफा बताया. और केन्द्र सरकार को हर मोर्चे पर विफल करार दिया. सोनिया गांधी ने कहा कि प्रवासी मजदूर और लॉकडाउन को लेकर आगे की क्या रणनीति होगी इसका केन्द्र सरकार के पास कोई प्लान नहीं हैं.

बैठक में अम्फान तूफान को राष्ट्रीय आपदा घोषित की मांग की गयी. साथ ही एक रेजोल्यूशन भी पास किया गया, जिसमें राहत और पुनवर्वास को वरीयता देने की बात कहीं गयी. यह भी कहा गया कि विपक्षी दलों का ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सरकार और वहां के लोगों को सपोर्ट है.

सोनिया गांधी ने केन्द्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार संघवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों को भूल गयी है. देश में प्रवासी मजदूर और 13 करोड़ परिवार आबादी के सबसे नीचले स्तर पर हैं, जिसका ख्याल रखने के बजाए केन्द्र सरकार ने इन्हे दरकिनार कर दिया है. जिससे इनकी स्थिति और दयनीय हो गयी है. सोनिया गांधी ने विपक्ष के राज्य सरकारों से अपने अपने राज्यों में राहत कार्य तेज करने की अपील की.

वहीं पीएम नरेन्द्र मोदी के 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा को देश के साथ मजाक करार देते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि जिस प्रकार से पैकेज का ऐलान किया गया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 दिनों तक इसका ब्रेकअप देती रहीं. यह देश के साथ मजाक नहीं तो और क्या हैं.