चंदवा की उम्मीद : बाबूजी पीएम न बन सके, पर नीतीश चाहें तो मीरा बन जाएं राष्ट्रपति

लाइव सिटीज डेस्क : देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम और वर्तमान में राष्ट्रपति उम्मीदवार बनी उनकी बेटी मीरा कुमार का गांव चंदवा को आज तक एक बात का मलाल है. मलाल इस बात का है कि इस मिट्टी के सपूत व दलित आइकॉन देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सका. साथ ही 2017 में एक बार फिर से इस गांव को एक नई उम्मीद मिली है.  

यह उम्मीद इस बात से जगी है कि विपक्ष ने इस गांव की बेटी मीरा कुमार को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है. गांव वाले इस आशा में हैं कि अगर किस्मत ने साथ दिया तो इस गांव की बेटी देश के सर्वोच्च पद पर चुनी जाएंगी. चंदवा वाले को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराजगी है. उनका कहना है कि बिहार की बेटी मीरा कुमार के खिलाफ एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देकर कबाब में हड्डी का काम किया है. 

पटना से 55 किलोमीटर पश्चिम आरा जिला का यह गांव बड़े प्यार से बाबू जगजीवन राम के परिवार की कहानी कहता है. चंदवा की पूर्व वार्ड पार्षद व समाज सेवी शारदा देवी कहती हैं कि मैं जब 16 साल की उम्र में शादी कर इस गांव में आई थी तब से बाबू जी (प्यार से राम) और मीरा बहन को जानती हूँ. मीरा जी 7 जुलाई को बाबू जी की पुण्य तिथि पर चंदवा गांव आती हैं. वो जब भी आती हैं हमारे परिवार का हाल पूछती हैं. उन्होंने कहा कि अगर वो राष्ट्रपति बन जाती हैं तो हमारे गांव के लिए यह गर्व की बात होगी. उन्होंने कहा कि मीरा कुमार पिछले साल 7 जुलाई को दो दिन के लिए अपने पति मंजुल कुमार, पुत्र अंशुल और दो बेटियों के साथ चंदवा गांव आयी थीं.

मीरा कुमार के पैत्रिक निवास के पड़ोस में रहने वाली महादलित शकुंतला देवी कहती हैं कि पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार बहुत ही मधुर भाषा में बात करती हैं. शकुंतला देवी कहती हैं कि बाबूजी दलित परिवार से थे इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया. हम लोग यह दर्द भूल जाएंगे अगर मीरा कुमार को राष्ट्रपति चुना जाएगा.

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