मुख्यमंत्री का जल जीवन हरियाली अभियान नई पीढ़ी को देगा बेहतर भविष्य, ट्यूज्डे टॉक में बोले प्रो. रणबीर नंदन

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: छात्र जनता दल यूनाइटेड के प्रभारी और पूर्व विधान पार्षद प्रो. रणबीर नंदन ने चर्चित ऑनलाइन इवेंट ट्यूजडे टॉक में जल जीवन हरियाली अभियान की चर्चा की. इस सीजन के आखिरी शो में प्रो. रणबीर नंदन ने जल जीवन हरियाली की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर कल देने के उद्देश्य से ही इस कार्यक्रम की शुरुआत की है. झारखंड के बंटवारे के बाद प्रदेश में जिस प्रकार से हरित क्षेत्र कम हुआ है, उसके कारण युवा आबादी को ही परेशानी झेलनी पड़ती. उस संकट से निकालने के लिए मुख्यमंत्री की योजना है. हमारा कर्तव्य है कि हम प्रदेश के तमाम लोगों को अपने कल को बेहतर बनाने के लिए इस योजना को पूरा कराने के लिए प्रेरित करें.

प्रो. रणबीर नंदन ने कहा कि यह एक पड़ाव है. हम कोरोना के इस संकट काल में अपने प्यारे भाई-बहनों से लगातार इसी प्रकार जुड़ते रहेंगे. उन्होंने योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल जीवन हरियाली योजना निश्चित तौर पर प्रदेश में हरित आवरण को बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि इस योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हम सब को जुटना होगा.



उन्होंने कहा कि प्रकृति से अगर हम खिलवाड़ करते हैं तो प्रकृति अपने प्रकोप से हमें दंडित करती है. आप देख रहे हैं, किस प्रकार एक देश के लोगों की अप्राकृतिक खान-पान का नतीजा पूरा विश्व भुगत रहा है. कोरोना महामारी का संकट भी प्रकृति के प्रति हमारी अनदेखी का परिणाम है. हमने विकास की अंधी दौर में प्रकृति को पीछे छोड़ दिया.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी इन बातों से भली प्रकार परिचित हैं. उन्होंने प्रकृति के खिलाफ जंग की जगह प्रकृति को संसाधनों से युक्त करने का बेड़ा उठाया है. जल जीवन हरियाली मिशन अभियान एक शुरुआत है. हमारे यहां तो पेड़ों की पूजा की जाती है. पीपल, बरगद जैसे पेड़ पूजे जाते हैं. वन हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और इसकी रक्षा करना हमारा दायित्व है.

प्रो. नंदन ने कहा कि जब तक जल और हरियाली है, तभी तक जीवन सुरक्षित है. जल और हरियाली के बिना मनुष्य हो या जीव-जंतु या पशु-पक्षी किसी के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती है. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सीमित करने, पारिस्थिकीय संतुलन बनाए रखने और जल संरक्षण व संचयन के उद्देश्य से राज्य की सरकार ने जल जीवन हरियाली अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत 11 बिंदुओं की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिस पर वर्ष 2022 तक 24,524 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं. योजना को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है. सभी जानते हैं कि एक पेड़ एक साल में 20 किलो धूल सोखता है. 700 किलो ऑक्सीजन छोड़ता है तो 20 हजार किलो कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है. गर्मियों में एक पेड़ के पास सामान्य से लगभग 4 डिग्री कम तापमान रहता है. इस तरह घर के पास 10 पेड़ लगे हों तो आदमी की उम्र 7 साल तक बढ़ जाएगी.

प्रो. रणबीर नंदन ने कहा कि योजना के तहत बारिश के पानी को तालाब और मेड़ में संचित करना है, जिससे फसलों की सिंचाई हो सके. इस योजना की खास बात यह है कि तालाब की मेड़बंदी के ऊपर पेड़-पौधों की बुवाई होती है. इसके लिए भी सरकार किसानों को सब्सिडी भी देती है. यह सभी जानते हैं कि अगर किसानों को सिंचाई के साधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो तो देश को सोने की चिड़िया बनने से कोई रोक नहीं सकता. केंद्र व राज्य सरकार किसानों की आय 2022 तक दोगुना करने के लिए लगातार प्रयासरत है. जल-जीवन-हरियाली योजना पर सरकार किसानों को 75,500 रुपए की सब्सिडी देती है, ताकि किसान भूमिगत जल से खेच की सिंचाई कर सकें. हरित आवरण को बढ़ाने की दिशा में भी काम हुआ है. मनरेगा के तहत पिछले दो वर्षों में अभियान चला कर 1 करोड़ पौधे लगाए गए. पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ मिल कर 2019-20 में करीब 1 करोड़ 25 लाख पौधे लगे. इसी प्रकार इसी माह नौ अगस्त को बिहार पृथ्वी दिवस के अवसर पर 3.5 करोड़ से अधिक पौधे लगे.

आगे उन्होंने कहा कि स्वच्छ व संतुलित पर्यावरण के लिए पृथ्वी पर 33 प्रतिशत हरियाली जरूरी है. जल जीवन हरियाली योजना की सफलता के लिए ग्रामीण विकास, पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, राजस्व व भूमि सुधार, लघु जल संसाधन, नगर विकास, पीएसईडी, कृषि, भवन, जल संसाधन, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, ऊर्जा, व सूचना व जनसंपर्क सहित 15 विभाग शामिल हैं. आहर, पोखर, छोटी नदियों, पुराने कुंआ को सुदृढ़ किया जाएगा. चापाकल, कुआं सरकारी भवन में जल संचय के लिए रेन वाटर हारवेस्टिंग होगा. छोटी नदियों, नालों और पहाड़ी क्षेत्र में चेकडैम का निर्माण होगा.

ऊर्जा के क्षेत्र सीमित हैं, इसलिए वैकल्पिक स्रोतों और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा ई रिक्शा जैसे वाहन और सीएनजी चालित वाहन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. इस योजना पर वित्तीय वर्ष 2019-20 में 5870 करोड़, वर्ष 2020-21 में 9874 करोड़ और वर्ष 2021-22 में 8780 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य रखा है. निश्चित तौर पर इस योजना के पूरा होने के बाद राज्य की सूरत बदलेगी. प्राकृतिक चरित्र बदलेगा. जल जीवन हरियाली योजना के तहत वर्ष 2019-20 में लगभग 10 हजार एकड़ जमीन पर सब्सिडी निर्धारित की गई है. इस योजना में किसान मॉडल का चुनाव खुद कर सकते हैं.

बता दें कि पहले सीजन में छात्र जदयू की ओर से प्रो. रणबीर नंदन ने सरकार की ओर से छात्र, युवाओं व नई पीढ़ी को ध्यान में रखकर उठाए गए कार्यक्रमों पर चर्चा की. 7 जुलाई को इस कार्यक्रम का उद्घाटन सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुआ था. इसके बाद 14 जुलाई को स्टूडेंट्स क्रेडिट कार्ड, 21 जुलाई को स्टार्टअप नीति, 28 जुलाई को छात्रवृत्ति योजनाओं, 4 अगस्त को शैक्षणिक संस्थानों में संरचनात्मक विकास और 11 अगस्त को छात्राओं के विकास के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की.