महागठबंधन के प्रस्ताव को चिराग ने ठुकराया, मां रीना पासवान को राज्यसभा प्रत्याशी बनाने से किया इनकार

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : राज्यसभा के लिए रीना पासवान को प्रत्याशी बनाए जाने का महागठबंधन के प्रस्ताव को चिराग पासवान ने ठुकरा दिया है. महागठबंधन की चाल को भांपते हुए चिराग पासवान प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. अब तेजस्वी को दूसरा विकल्प पर विचार करना होगा. राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि चिराग के ना कहने के बाद महागठबंधन अब्दुलबारी सिद्दकी या फिर जगदानंद सिंह पर दांव लगा सकता है.

महागठबंधन स्वर्गीय रामविलास पासवान की पत्नी रीना पासवान को प्रत्याशी बनाकर एक तीर से दो निशाना साधने के फिराक में था. सबसे पहले उसने बिहार की राजनीति में अलग-थलग पड़े लोजपा को महागठबंधन के साथ आने का प्रस्ताव डे डाला, तो दूसरी तरफ इस पेशकश के जरिये भाजपा पर रामविलास पासवान के परिवार की अनदेखी का आरोप भी मढ़ दिया. वहीं इसी बहाने उसने दलित समाज के प्रति अपनी सहानुभूति भी जता दी.



आज ही आरजेडी नेता श्याम रजक ने लाइव सिटीज से बात करते हुए बताया कि बीजेपी ने रामविलास पासवान जी की पत्नी को उम्मीदवान ना बनाकर दलितों का अपमान किया है. जिसे पूरा देश देख रहा है. दलित हितैषी का चोला ओढ़े एनडीए सरकार की कथनी और करनी में आसमान जमीन का फर्क है. यह सीट एक दलिता था, जिसपर दलित उम्मीदवार ही होना चाहिए था.

इधर एनडीए की ओर से पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी प्रत्याशी बनाए गए हैं. जो 2 दिसंबर को 12.30 बजे पर्चा दाखिल करेंगे. इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे. बिहार से एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए 14 दिसंबर को मतदान होगा. 3 दिसंबर को नामांकन की आखिरी तारीख है.

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी यदि राज्यसभा सदस्य बन जाते हैं ​तो वे भी राजद सुप्रीमो लालू यादव की तरह चारों सदन के सदस्य हो जाएंगे. इसके पहले वे विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा जा चुके हैं. केवल राज्यसभा जाना उनका बचा हुआ है. इस बार हो रहे उपचुनाव में यदि सुशील मोदी को सफलता मिलती है तो इस बार राज्यसभा भी पहुंच जाएंगे.

बिहार में नागमणि भी चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं. आंकड़े बताते हैं कि सुशील मोदी 1990 में पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए थे. उस समय उनका विधानसभा क्षेत्र पटना सेंट्रल था. अब उनका नाम बदलकर कुम्हरार हो गया है. इसके बाद वर्ष 2004 में वे भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे.

इतना ही नहीं, 2005 में बिहार में बीजेपी विधान मंडल दल के नेता बने तो उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद बिहार में एमएलसी बन गए. दूसरी बार वे 2012 में एमएलसी निर्वाचित हुए. फिलहाल वे एमएलसी के साथ ही आचार समिति के अध्यक्ष हैं. यदि वे राज्यसभा चले जाते हैं तो विधान परिषद से इस्तीफा देना पड़ेगा.