मौसम के अनुकूल खेती पर सीएम नीतीश ने दिया जोर, खेतों में पराली जलाने पर जतायी आपत्ति

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : पटना के एक अणे मार्ग स्थित नेक संवाद में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जल जीवन हरियाली अभियान के तहत जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत 30 जिलों के पहले वर्ष और 8 जिलों में दूसरे वर्ष के कार्यक्रम का शुभारंभ किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि मैं कृषि विभाग को विशेष तौर पर इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि राज्य के सभी 38 जिलों में मौसम के अनुकूल कार्यक्रम की शुरूआत की गयी है.

पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले 8 जिलों में इसकी शुरूआत करायी गयी थी और बचे हुए 30 जिलों में आज से इसकी शुरूआत कर दी गयी है. उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में लघु फिल्म के माध्यम से जलवायु के अनुकूल कृषि कार्य के संबंध में कई जानकारी दी गयी है. कृषि विज्ञान केन्द्रो से जुड़कर किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और इससे होने वाले फायदे के बारे में बताया जिसे जानकर खुशी हुई. साल 2019 में जल जीवन हरियाली अभियान की शुरूआत की गयी. इसमें 11 अवयवों को शामिल किया गया है.



मौसम के अनुकूल कृषि कार्यक्रम तथा फसल अवशेष प्रबंधन भी इसमें शामिल है. उन्होंने कहा कि डॉक्टर मार्टिन क्रॉफ से हमारी मुलाकात फरवरी 2016 में हुई थी. साल 2018 में दोबारा उनसे मुलाकात हुए जिसमें कृषि से संबंधित एक प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा हुई थी. उस दौरान मौसम के अनुकूल कृषि कार्य के बारे में हमने अपनी बात रखी. डॉक्टर मार्टिन क्रॉफ ने बिहार में मौसम के अनुकूल किए जा रहे कृषि कार्य के बारे में हमने अपनी बात रखी. जिसकी उऩ्होंने खूब प्रशंसा की. जिसे आप लोगों ने आज कार्यक्रम में दिखाया.

बोलरॉग इस्टीच्यूट फॉर साउथ एशिया के पूसा केन्द्र में 150 एकड़ में कृषि कार्य को देखतने के लिए मार्च 2016 में मैं वहां गया था. एक क्षेत्र में तीन फसलों के एक साथ उत्पादन को दिखाया गया था. उन्होंने कहा कि नई तकनीक यंत्रों के माध्यम से कटनी के बाद हो रहे सीधे बुआई के कार्य को भी आज कृषि विज्ञान केन्द्रों पर दिखाया गया है. जिसे देखकर मुझे खूशी हुई.

सीएम ने कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए हमलोगों ने कई कार्य किए हैं. कृषि रोडमैप की शुरूआत वर्ष 2008 में की गयी और अभी तीसरा कृषि रोडमैप चल रहा है. इससे कृषि क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ी है. राज्य में 76 प्रतिशत लोगों की आजीविका का आधार कृषि है. फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है. साथ ही फसलों के अवशेषों को जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है. फसल कटाई के वक्त खेतों में फसलों का अवशेष नहीं रहे इसके लिए रोटरी मल्चर स्ट्रॉरिपर स्ट्राबेलर एवं रिपर कम बाइंडर का उपयोग किसान करें .