जदयू नेता भागचंद जैन के निधन से सीएम नीतीश दुखी, व्यक्त की गहरी शोक-संवेदना

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क : किशनगंज जिला जदयू के व्यावसायिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भागचंद जैन के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. अपने शोक-संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व0 भागचंद जैन पार्टी के समर्पित एवं अनुशासित कार्यकर्ता थे. वे पार्टी से गहरे रूप से जुड़े हुये थे. उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में अपूरणीय क्षति हुयी है. उन्होंने दिवंगत आत्मा की चिर शान्ति तथा उनके परिजनों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है.

वहीं बिहार के पूर्व राज्यपाल बूटा सिंह के निधन पर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है.अपने शोक-संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व0 सरदार बूटा सिंह के रूप में देश ने एक वरिष्ठ नेता को खो दिया है. स्व0 बूटा सिंह ने बिहार के राज्यपाल एवं केन्द्रीय मंत्रिमंडल में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया था. वे गरीबों के उत्थान के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे. उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में अपूरणीय क्षति हुयी है.



सरदार बूटा सिंह के सम्मान में बिहार सरकार ने एक दिन 2 जनवरी को राजकीय शोक घोषित किया है. मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शान्ति तथा उनके परिजनों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बूटा सिंह का आज सुबह साढ़े 5 बजे निधन हो गया. वह 86 साल के थे. बूटा सिंह को पिछले साल ब्रेन हेमरेज के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया था और वह गत वर्ष अक्टूबर महीने से कोमा में थे.

बता दें कि 21 मार्च 1934 को पंजाब में जालंधर जिले के मुस्तफापुर गांव में जन्मे बूटा सिंह राजनीति में आने से पहले पत्रकारिता से जुड़े थे. उन्होंने अकाली दल की ओर से पहला चुनाव जीता था और बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गये. दलितों और गरीबों की सशक्त आवाज के रूप में विशिष्ट पहचान बनाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह ने अकाली दल से राजनीतिक जीवन शुरू किया और नेहरू काल में कांग्रेस का दामन थामा तथा देश के चार प्रधानमंत्रियों के साथ काम करके अपनी दक्षता का परिचय दिया.

वो 8 बार लोकसभा के सांसद रहे. 1977 में जब कांग्रेस काफी मुश्किल घड़ी से गुजर रही थी, कई दिग्गज नेता पार्टी को छोड़कर जा चुके थे. उस दौर में भी बूटा सिंह ने इंदिरा गांधी का साथ नहीं छोड़ा. उनके साथ हर कदम पर चट्टान की तरह खड़े रहे. यहां तक की कांग्रेस दो हिस्से में बंट भी गयी थी फिर इन्होंने कांग्रेस का हाथ पकड़े रखा.