‘पर्यावरण है तो हम हैं’ जल जीवन हरियाली दिवस के मौके पर बोले सीएम नीतीश- आओ इसकी रक्षा करें

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : पटना के अधिवेशन भवन में जल जीवन हरियाली दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जल जीवन हरियाली अभियान में जन भागीदारी विषयवस्तु पर आयोजित परिचर्चा में सीएम नीतीश, दोनों डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी, मंत्री विजय कुमार चौधरी समेत कई विभाग के मंत्री व अधिकारी मौजूद रहे.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश ने कहा कि जल जीवन हरियाली के तरफ उनका ध्यान 2019 में गया. पहले झारखंड के साथ होने के कारण इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया. लेकिन झारखंड अलग होने के बाद इसका असर दिखने लगा. बिहार का प्रजनन दर भारत ही नहीं विश्व के एकाध देश को छोड़कर सबसे ज्यादा है. जिसको ध्यान में रखकर तैयारी नहीं की गयी तो आने वाले समय में पर्यावरण पर संकट उत्पन्न हो सकता है.



जब से हमलोगों को ध्यान इसकी ओर गया तब से अब तक करीब 19 करोड़ से ज्यादा वृक्षारोपण किया गया. सरकार के प्रयास के कारण पहले जहां हरियाली का आंकड़ा 9 प्रतिशत था वो अब 15 फीसदी हो गया. यह दर लगातार बढ़ता ही जा रहा है. सब सब लोगों को इसके प्रति जागरूक करने से संभव हो सका.

मंच से ही सीएम नीतीश ने जल संसाधन विभाग के एक अभियंता द्वारा पेश किए गए आंकड़े पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें जानकारी का अभाव है. बिहार में वृक्षारोपण का कार्यक्रम 2010-11 से ही शुरू हो गया था. इसके लिए स्कूल के बच्चों को प्रेरित किया गया. आपको जल संसाधन विभाग का जो जिम्मा मिला है उसको ठीक से समझिए. यह एक महत्ती जिम्मेवारी है.

पर्यावरण को हरा भरा करने के लिए सरकार ने हरियाली को 11 पार्ट में बांट कर काम किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने 11 भाग के बारे में विस्ता से बताया. उन्होंने कहा कि 11 में से 7 पार्ट का संबंध सीधे जल से हैं. 8 वां का संबंध कृषि से हैं. जबकि 9वां और 10वां भाग का संबंध सौर ऊर्जा से तथा 11वें पार्ट का संबंध हरियाली अभियान को जारी रखने से हैं.  

वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की बात पर सीएम नीतीश ने कहा कि वहां अच्छी चीजों की पूछ नहीं है. ज्यादातर खराब चीजें ही प्रचारित प्रसारित होती है. कोरोना काल में किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि पूरे कोरोना काल के दौरान बिहार में काफी कार्य किए गए, लेकिन बोलने वाले सोशल मीडिया पर अनाप शनाप बोलते रहे. ये बातें घर-घर तक पहुंच भी गयी. उन्होंने कहा कि केन्द्र के गाइडलाइन के अनुसार हमने दूसरे राज्य से आने वाले लोगों को रोका तो सोशल मीडिया पर लोग चिल्लाने लगे कि नीतीश कुमार अपने लोगो को प्रदेश में प्रवेश करने से रोक रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं था.

बाद में जब ट्रेन का परिचालन हुआ तो बिहार में 15 लाख से ज्याद लोग दूसरे प्रदेश से आए, जहां कोरोना का प्रभाव ज्यादा था. सभी को यहां क्वारंटाइन सेंटर मे रखा गया. एक-एक पर 53 सौ रूपया राज्य सरकार ने अपनी ओर  से खर्च किया. बराबर उनका हालचाल जाना गया. हर चीज की मॉनिटरिंग की जाती रही, लेकिन सोशल मीडिया पर गलत प्रचार प्रसार किया गया.

सीएम नीतीश ने कहा कि प्रत्येक दिन हमारे पास कोरोना के आंकड़े आते है. आज भी आंकड़े  आते हैं. अगल मीडिया वालों को कभी देखना होगा तो मैं उपलब्ध करा दूंगा. मोटी मोटी फाइल की कई किताबे बन गयी है. मैं लगातार इसकी मॉनिटरिंग करता रहा हूं. जिसके परिणामस्वरूप बिहार में जांच का दर देश में सबसे ज्यादा है. मृत्यु दर सबसे कम है. फिर भी लोग अनाप शनाप बयान देते रहते हैं.

उन्होंने कहा कि घर-घर तक बिजली पहुंचा दी गयी है. अब सौर ऊर्जा पर काम किया जा रहा है. जब तक पृथ्वी है तबतक सुर्य है. ऐसे में सौर ऊर्जा ही असली ऊर्जा है. जिसे हमलोग आज बिजली समझ रहे हैं वो दरअसव नकली ऊर्जा है. ये कभी भी खत्म हो सकता है. लेकिन सौर ऊर्जा अक्षय है, जो कभी भी खत्म नहीं हो सकता है.

इससे पहले कार्यक्रम में लोगों से पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कई तरह की शपथ भी दिलाई गई. जैसे मैं संकल्प लेता हूं कि प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करूंगा. अपने आस-पास के जल श्रोतों को प्रदूषित नहीं होने दूंगा. जरूरत से ज्यादा जल का उपयोग नहीं करूंगा. इस्तेमाल के बाद नल को बंद कर दूंगा. बिजली का उपयोग आवश्यकता के अनुसार ही करूंगा. घर से बाहर निकलते समय बिजली के उपकरण बंद कर दूंगा. कूड़ा-कचड़ा कूड़ेदान में ही डालूंगा. प्लास्टिक और पॉलिथिन का उपयोग नहीं करूंगा. इसके अलावा जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों से प्रेम भाव रखने का, कागज का अनावश्यक उपयोग नहीं करने का और खुले में शौच नहीं करने का भी संकल्प दिलाया गया.