कोरोना से जंग जीतने की जल्द उम्मीद, अगस्त तक मिल सकती है वैक्सीन में कामयाबी

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : कोरोना ने पूरी दुनिया को अपने क़ब्ज़े में कर लिया है। दुनिया में शायद ही कोई मुल्क इस अदृश्य वायरस की पहुंच से बच पाया होगा. हर दिन देश और दुनियां में कोरोना संक्रमण और इससे हुई मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है. 29 जुलाई तक दुनियां में कोरोना के  16,341,920 कन्फ़र्म केस आ चुके हैं, वहीं मरने वालों का आंकड़ा 650,805 है. भारत की बात करें तो 1,483,156 संक्रमितों की संख्या और मरने वालों की संख्या 33,425 तक पहुंच चुकी है. वहीं बिहार में संक्रमण 45,919 तक पहुंच चुका है और 269 लोगों की अबतक मौत हुई है.

कोरोना की मार से कराहती दुनियां अब इस वायरस से निजात चाहती है, जिसने हमारी ज़िंदगी के तौर तरीक़े बदल दिये, हमारा खुली हवाओं में सांस लेना मुश्किल कर दिया है. जिसके कारण लोगों ने ख़ुद को घरों में क़ैद किया हुआ है. जो वायरस न सिर्फ़ हमारी जिंदगियों के लिए ख़तरा बना हुआ है, बल्कि इसने पुरी दुनियां की अर्थव्यवस्था को भी चरमरा कर रख दिया है.



टाइम मैग्ज़िन के मुताबिक, अब तक जिस बीमारी की वैक्सीन सबसे तेज़ी से खोजी गई वो है मम्प्स, इस वैक्सीन को बनाने में वैज्ञानिकों को चार साल का समय लगा था.दुनिया अब ये जानने को बेचैन है कि कोविड-19 से बचाव के लिए वैक्सीन कब तक आएगी? बीबीसी में छपी रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ विश्व में वैक्सीन की क़रीब 23 परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, मॉडर्ना फार्मास्युटिकल्स, चीनी दवा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक के वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स अहम हैं। इस वैक्सीन का ट्रायल दुनिया के कई देशों में चल रहा है.

मई में WHO ने ऑक्सफोर्ड के प्रोजेक्ट को सबसे एडवांस कोविड वैक्सीन कहा था. इंग्लैंड में अप्रैल के दौरान इस वैक्सीन प्रोजेक्ट के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल का काम एक साथ पूरा हुआ. इस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल 18 से 55 साल के एक हज़ार से ज़्यादा वॉलिंटियर्स पर किया गया है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का ये वैक्सीन प्रोजेक्ट अब ट्रायल और डेवलपमेंट के तीसरे और अंतिम चरण में है.

भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने भी ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन के भारत में इंसानों पर परीक्षण के लिए सरकार से मंजूरी मांगी है.बोस्टन की कंपनी मॉडर्ना वैक्सीन प्रोजेक्ट, अपने अंतिम चरण के शुरुआती हिस्से में है. इसे डोनल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस के लिए सबसे तेज़ वैक्सीन प्रोजेक्ट कहा है. इसका लक्ष्य 2020 के आख़िर तक वैक्सीन बनाने का है.

उधर चीन की प्राइवेट फार्मा कंपनी, सिनोवैक बॉयोटेक जिस कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, वो ट्रायल के तीसरे और आख़िरी चरण में पहुँच चुकी है. मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड के बाद ट्रायल के अंतिम चरण में पहुँचने वाला ये दुनिया का तीसरा वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है. CoronaVac नाम की इस वैक्सीन का फ़िलहाल ब्राज़ील में नौ हज़ार वॉलिंटियर्स पर ट्रायल चल रहा है.

कोरोना महामारी के लिए जिस रफ़्तार से वैक्सीन डेवलेपमेंट का काम चल रहा है, उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो 2021 की शुरुआत तक सिनोवैक बॉयोटेक की वैक्सीन सरकारी मंज़ूरी के लिए तैयार हो सकती है.

भारत भी इस मुहिम में शामिल है, भारत में दो वैक्सीन प्रोजेक्ट्स को इंसानों पर परीक्षण की मंज़ूरी दी गई है, फार्मा कंपनी भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन उनमें से एक है. वहीं दूसरा वैक्सीन प्रोजेक्ट ज़ाइडस कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड का है.

कोवैक्सीन के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में सरकारी एजेंसी इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी शामिल हैं. इसके ह्यूमन ट्रायल के लिए देश भर में 12 संस्थाओं को चुना गया है, जिनमें रोहतक की पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, हैदराबाद की निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ शामिल हैं.

भारत की पहली स्वदेशी कोरोना वायरस वैक्सीन COVAXIN का भी देशभर में पहला चरण लागू हो चुका है. उधर अमरीकी फार्मा कंपनी ‘फ़ाइज़र’ और जर्मन कंपनी ‘बॉयोएनटेक’ मिलकर एक कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट BNT162b2 पर काम कर रही हैं. ये वैक्सीन प्रोजेक्ट इंसानों पर परीक्षण के आख़िरी चरण में पहुँच चुकी है.

कंपनी की योजना साल 2020 के आख़िर तक, वैक्सीन की 10 करोड़ और साल 2021 के आख़िर तक 1.3 अरब खुराक आपूर्ति करने की है. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का दावा करने वाली इस वैक्सीन के दो खुराक दिए जाएँगे.

वहीं सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की गामालेया इंस्टीट्यूट द्वारा 10 अगस्‍त या उससे पहले विकसित किए गए COVID-19 वैक्सीन को मंजूरी मिलने की उम्मीद कर रहे हैं.रिपोर्ट के मुताबिक वैक्सीन परीक्षण के दूसरे चरण में है, और 3 अगस्त के बाद परीक्षण का तीसरा चरण शुरू करने की योजना बनाई जा रही है. इससे पहले इंटरफैक्स ने रूस के स्वास्थ्य मंत्री का हवाला देते हुए बताया कि चरण 3 के परीक्षणों के साथ वैक्सीन का व्यापक रूप से उपयोग किया जाएगा.