New Twist : ब्रजेश पांडेय, संजीत शर्मा और मृणाल के खिलाफ अरेस्ट वारंट

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पटना : पिछले कुछ महीनों से राजधानी के चर्चित यौन शोषण मामले में आज गुरुवार को पटना में दिनभर हलचल रही. पहले पहर में बहुत बड़ी खबर आई. यह खबर थी निखिल प्रियदर्शी-सुरभि के सुलहनामे की. सुलहनामे की खबर के पहले मीडिया ने सुरभि का नाम प्रिया दे रखा था. सुलहनामा कोर्ट में दाखिल हुआ है. अभी कोर्ट को फैसला करना है. यह खबर चल ही रही थी कि इसी मामले में दूसरी बड़ी खबर आ गयी. पता चला कि कोर्ट ने ब्रजेश पांडेय, संजीत शर्मा और मृणाल के खिलाफ अरेस्ट वारंट इशू कर दिया है. रात होते-होते यह खबर भी फैलने लगी कि गिरफ्तारी के लिए प्रयास शुरु हो गए हैं. पटना के एसएसपी मनु महाराज से मदद करने को कहा गया है.

राजधानी बेचैन है यह जानने को कि जब एक ओर निखिल प्रियदर्शी के साथ सुलहनामा दाखिल हो रहा है तो दूसरी ओर इसी मामले में औरों के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट क्यों जारी हो रहे हैं. मामला तकनीकी है. समझना होगा. इस तकनीकी कारणों की वजह से ही प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वाइस प्रेसीडेंट रहे ब्रजेश पांडेय की उलझनें कम नहीं हुई हैं.

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दरअसल हुआ यह है कि सुरभि का सुलहनामा सिर्फ निखिल प्रियदर्शी व परिवार के सदस्यों के लिए दाखिल हुआ है. सुरभि अब कोर्ट से निखिल को जमानत पर रिहा करने की अर्जी भी लगा रही है. अर्जी इसलिए कि समझौते के तहत जेल से बाहर आकर निखिल उसके साथ शादी कर ले. कोर्ट तारीख तय कर सुलहनामे और जमानत देने की अपील पर विचार करेगी.

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ब्रजेश पांडेय और संजीत शर्मा इसलिए मामले से अभी निकल नहीं पा रहे हैं, क्योंकि दोनों के साथ सुलहनामे की कोई अर्जी नहीं दाखिल की गई है. संजीत शर्मा कांड का नामजद अभियुक्त था. ब्रजेश पांडेय का नाम अनुसंधान के क्रम में आया. ब्रजेश के खिलाफ भी पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए थे. इन आरोपों की पुष्टि में सहारा मृणाल बना था. असल में, जिस वाकये का हवाला दिया गया था, उसका स्पॉट मृणाल का फ्लैट था.

अनुसंधान जब बहुत आगे तक गया और इधर साक्ष्य-सबूत को लेकर जांच कर रही एजेंसी CID में खींचातानी होने लगी, तो मृणाल को भी गवाह की श्रेणी से अलग कर अभियुक्त की श्रेणी में ले आया गया. मृणाल इवेंट कंपनी चलाते हैं. नयी जांच में यह कहा गया कि जिस आधार पर ब्रजेश पांडेय को अभियुक्त बनाया गया है, उसमें मृणाल शामिल रहे हैं. सो, वे अभियुक्त माने जायेंगे. इसी आधार पर कोर्ट से अरेस्ट वारंट की मांग की गयी थी, जिसे कोर्ट ने इशू कर दिया है.

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