अतरी विधानसभा सीट पर आर-पार की लड़ाई, 2020 में रोचक हुआ मुकाबला

लाइव सिटीज, आशुतोष कुमार / पटना : बिहार विधानसभा की चुनावी जंग में मुकाबला रोचक होता जा रहा है. ​कई ​विधानसभा में आर-पार की लड़ाई है. ऐसा ही मुकाबला अतरी विधानसभा में होने की उम्मीद है. 2015 के चुनाव में राजद की ओर कुंती देवी लोजपा के अरविंद सिंह को हराकर दोबारा विधानसभा पहुंची थीं. इसके पहले कुंती देवी फरवरी 2005 में हुए चुनाव में जीती थीं. कुंती देवी के पति राजेंद्र यादव भी अतरी से तीन बार विधायक रह चुके हैं. राजेंद्र यादव इस समय हत्या के केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. वहीं वर्तमान विधायक कुंती देवी पर भी हत्या की साजिश का केस चल रहा है. इस बार राजद ने राजेंद्र यादव व कुंती देवी के पुत्र नीमचक बथानी के पूर्व प्रमुख अजय यादव उर्फ रंजीत यादव को उम्मीदवार बनाया है. उन पर कई मामले चल रहे हैं, लेकिन अभी जमानत पर हैं. 

राजेंद्र यादव के इस किले को ध्वस्त करने का सपना लेकर जदयू की विधान पार्षद मनोरमा देवी मैदान में उतरी हैं. उनके पति स्व बिंदी यादव की छवि भी दबंग के रूप में रही है और वे जिला परिषद अध्यक्ष भी रहे चुके हैं. इस साल कोरोना की वजह से असमय ही बिंदी यादव का निधन हो गया. आदित्य सचदेवा हत्याकांड में यह परिवार अचानक से चर्चा में आ गया था. अजय यादव और मनोरमा देवी के बीच आर-पार के मुकाबले को 2015 में रनर रहे लोजपा के अरविंद सिंह तिकोना बनाने की कोशिश में लगे हैं. रालोसपा के अजय कुशवाहा समेत कुल 11 प्रत्याशी इस बार अतरी से अपना भाग्य आजमा रहे हैं.



1951 में अतरी सीट का हुआ था गठन

अतरी विधानसभा सीट का गठन 1951 में हुआ था. यहां से सबसे पहले 1952 रामेश्वर प्रसाद निर्दलीय जीतकर विधायक बने थे. उसके बाद 1957 और 1962 में कांग्रेस के शिवरत्न सिंह लगातार दो बार विधायक रहे. इसी तरह, 1967 में किशोरी प्रसाद, 1969 के उपचुनाव में बाबूलाल सिंह, 1972 में महेश्वर प्रसाद, 1977 में जनता पार्टी से मुद्रिका सिंह और 1980 में कांग्रेस के टिकट पर सुरेंद्र प्रसाद विधायक चुने गये थे. 1985 और 1990 में कांग्रेस के टिकट रंजीत सिंह लगातार दो बार विधायक बने. इसके बाद 1995, 2000 और फरवरी 2005 में लगातार तीन बार राजेंद्र यादव जनता दल एवं राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर विधायक रहे. नवंबर 2005 में राजेंद्र यादव की पत्नी कुंती देवी विधायक बनीं. फिर 2010 में जदयू के कृष्णनंदन यादव ने कुंती देवी को हराया. एक बार फिर 2015 में कुंती को सफलता मिली.