मिथिला से देश-दुनिया की घट गईं दूरियां, रंग लाई नीतीश की मेहनत

लाइव सिटीज, आशुतोष/ पटना : नीतीश कुमार जब रेलमंत्री थे, उस समय से ही उनकी चाहत रेलमार्ग को लेकर काफी चर्चाओं में रही. नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही लगातार बिहार में रेल या सड़क सेवा के प्रति दृढ़संकल्पित रहे. उसका असर अब दिखने लगा है. यही वजह है कि पीएम नरेंद्र मोदी भी नीतीश कुमार की प्रशंसा करते नहीं अघा रहे हैं.

मिथिला से देश-दुनिया की घट गईं दूरियां, रंग लाई नीतीश की मेहनत. जी हां, हम बात कर रहे हैं बिहार के मुखिया नीतीश कुमार की. इनके सार्थक प्रयास ने मिथिला के लोगों का सपना साकार कर दिया है. मिथिला के लोग भूकंप व बाढ़ की वजह से रेल संकट की त्रासदी को झेल रहे थे. खासकर कोसी बेल्ट के लोगों को पटना आने पर भी दूरी का संकट छाया रहता था.



लेकिन अब इस संकट से मिथिला के लोगों को निजात  मिल गई है. कोसी महासेतु ने उनके सपनों को साकार कर दिया है. इसी सप्ताह कोसी महासेतु का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था. अब वहां से रेल दौड़ने लगी. पीएम ने कहा, नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार तेजी से विकास कर रहा है.

कुशल रणनीति से संभव

इस रेल महासेतु के कारण अब सुपौल के निर्मली के लोगों को जिला मुख्यालय आने के लिए 300 किलोमीटर की जगह मात्र 22 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी. वहीं इससे महासेतु के पूर्वी छोर में सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया व खगड़िया तो पश्चिमी छोर पर मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी व समस्तीपुर जिले के लाखों लोगों को सीधा लाभ होगा. यह सब नीतीश कुमार की कुशल रणनीति व विकास की ललक से संभव हो पाया.

तब रेलमंत्री थे नीतीश कुमार

दरअसल, नीतीश कुमार जब रेलमंत्री थे, उस समय से ही उनकी चाहत रेलमार्ग को लेकर काफी चर्चाओं में रही. नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही लगातार बिहार में रेल या सड़क सेवा के प्रति दृढ़संकल्पित रहे. उनकी कोशिश रही कि प्रदेश के किसी कोने में ​आवागमन 5 घंटे में ही पूरा कर लिया जाए. पहले ऐसे हालात नहीं थे. नीतीश की मेहनत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद वर्चुअल उद्घाटन समारोह में कहा कि वैसे ये महासेतु और रेल परियोजनाएं श्रद्धेय अटल जी और नीतीश बाबू का ड्रीम प्रोजेक्ट भी रहा है. जब नीतीश कुमार रेल मंत्री और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब नई कोसी रेल लाइन परियोजना की परिकल्पना की गई थी. वर्ष 2003 में इसका शिलान्यास हुआ, पर साल 2004 में सरकार चली गई. उसके बाद कोसी रेल लाइन परियोजना की रफ्तार ठप पड़ गई. अब पुन: एनडीए की सरकार है. इस सरकार में नीतीश कुमार की हनक बढ़ी है. इस बाबत यहां के लोगों को सौगात मिल रही है.

कहते हैं नीतीश कुमार

नीतीश कुमार भी कहते हैं कि इस क्षेत्र के लोगों से किया वादा वह निभा रहे हैं. जब वो यहां रेलमंत्री रहते आये थे. उस समय वो यहां के स्थानीय लोगों की समस्या भी सुनी. लोगों से बात कर इस योजना की कल्पना की थी. वे कहते हैं कि 300 किमी का सफर घटकर 22 किमी हो गया है. इससे लोगों का समय और धन दोनों की बचत होगी.