गया में डीएम आवास की होगी नीलामी, कोर्ट के आदेश के बाद चिपकाया गया इश्तेहार

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार के गया से एक ऐसा मामाल प्रकाश में आया जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. कोर्ट कचहरी के चक्करों में चप्पलें घिस जाती हैं ये आपने सुना तो होगा लेकिन गया का ये मामला वाकई इस बात को साबित कर देता है. बता दें कि एक केस में सिविल कोर्ट के आदेश पर डीएम आवास की नीलामी का इश्तेहार चिपकाया गया है. 44 वर्ष पुराने एक मामले में कोर्ट के आदेश की अवहेलना के कारण कोर्ट ने ये आदेश जारी किया है. मामला साल 1976 से चला आ रहा है.

मामले में खुद को पीड़ित वकील वसीमुद्दीन अहमद जो कि नसीम गोरगानवी के बेटे हैं की याचिका पर सुनवाई करते हुए गया सिविल कोर्ट ने इश्तेहार चिपकाने का आदेश जारी किया है. सब-जज 12 के जज संदीप कुमार सिंह के आदेश पर यह इश्तेहार चिपकाया गया है. मामले की अगली सुनवाई  11 नवंबर को फिर से होगी जिसमें कोर्ट मामले की समीक्षा करेगा.

डीएम आवास की नीलामी का इश्तेहार

इस मामले की अपील करने वाले नसीम गोरगानवी के बेटे वसीमुद्दीन अहमद ने बताया कि वर्ष 1976 में उनके पिता नसीम गोरगानवी के लाइसेंसी हाथियार के दुकान को तत्कालीन डीएम ने जबरदस्ती बंद कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. जिन्हें बाद में कोर्ट ने मामला खत्म करते हुए जब्त हथियार के बदले मुआवजा देने का आदेश दिया था. लेकिन, उस आदेश का पालन जिलाधिकारी ने नहीं किया. इसके विरोध में उन्होंने कोर्ट के आदेश की अवहेलना की शिकायत की थी. मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने डीएम आवास की नीलामी का इश्तेहार चिपकाया है.

वहीं, डीएम  ​अभिषेक सिंह ने इस मामले पर कहा कि यह काफी पुराना मामला है. इसमें बिहार सरकार खुद हाईकोर्ट में अपील में है. इस अपील पर इसी माह में फैसला आने वाला है. माननीय कोर्ट का जो भी फैसला इस मामले पर आएगा, उसे लागू किया जाएगा.

ये है पूरा मामला

बता दें कि 22 नवंबर 1976 को शुरू हुए इस मामले के संबंध में वसीमुद्दीन अहमद ने बताया कि तत्कालीन डीएम के.एच सुब्रमण्यम की पहल पर धर्मसभा भवन में महिला टेबुल टेनिस चैंपिंयनशिप का आयोजन कराया जा रहा था. इसका विरोध करते हुए उनके पिता नसीम गोरगानवी ने 200 रूपया का चंदा देने से मना कर दिया था. आरोप है कि इसके बाद तत्कालीन डीएम ने इसे व्यक्तिगत मामला बनाते हुए उनके हथियार के लाइसेंसी दुकान को सील करके हथियार जब्त कर लिया था और उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था.

15 दिनों के बाद वे जले से बाहर आ पाए थे. जिला प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ नसीम ने कमिश्नर के यहां शिकायत की पर वहां उन्हें राहत नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट का रूख किया और 1995 में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन जिलाधिकारी राजबाला वर्मा के द्वारा उनके हथियार के दुकान का लाइसेंस बहाल कर दिया गया.

प्रशासन के जब्त किए गए हथियार के बदले 44 हजार 555 रुपए दिए गए जिसे अपील करने वाले ने विरोध के साथ स्वीकारते हुए पटना हाईकोर्ट में उचित मुआवजा के लिए अपील की जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 1995 के रेट के हिसाब से मुआवजा देने का आदेश दिया. हालांकि उस आदेश का जिला प्रशासन ने पालन नहीं किया. इसके बाद पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट के आदेश के अवहलेना का आरोप लगाते हुए 2001 में गया सिविल कोर्ट में मामला दर्ज कराया.

कोर्ट ने 31 मार्च 2017 को अपील करने वाले को 9.57 लाख रुपये देने का आदेश दिया. इस आदेश के खिलाफ बिहार सरकार हाईकोर्ट चली गई पर हाईकोर्ट से किसी तरह का आदेश अभी तक नहीं मिलने की स्थिति में सब जज-12 की कोर्ट ने डीएम आवास के नीलामी की प्रकिया शुरू कर दी है.

राजद सुप्रीमो का बढ़ गया इंतजार, बेल याचिका पर अब 22 नवंबर को होगी सुनवाई

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*