भारत बंद के दौरान नेता जी के साथ कार्यकर्ताओं ने की खूब मनमानी, बन सकती है कोरोना संक्रमण की लंबी चेन !

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क :  भारत बंद का असर सबसे ज्यादा पटना के डाकबंगला चौराहे पर दिखा. दिनभर ड्रामा चलता रहा. विभिन्न राजनीति दलों ने बवाल किया. यहां तक कि पुलिस के साथ झड़प तक हो गई. मामला इतना बढ़ा कि विपक्ष ने सत्ताधारी दल भाजपा व जदयू के पोस्टर तक फाड़ डाले.

मगर खास बात रही कि जिन किसानों के लिए यह आंदोलन हो रहा था. ऐसे किसान यहां कम ही दिखे. वहीं कोरोना काल में प्रशासन की सख्ती भी काम न आयी. जिला प्रशासन ने जहां कोरोना को लेकर कई सख्त आदेश जारी किये हैं. उनकी खुलेआम अनदेखी की गयी. सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर मास्क प्रयोग तक, हर प्रकार से अनदेखी हुई. पुलिस के जवान भी तमाशा देखते रहे. राजनीतिक दलों ने कोरोना को खुलेआम चुनौती दी.



अब सवाल उठता है कि जो कार्यकर्ता इस बवाल में शामिल थे. जो खुलकर प्रदर्शन कर रहे थें. वह अपना विरोध गाईडलाइन के अनुसार भी कर सकते थें. इस प्रकार का प्रदर्शन राजधानी के अन्य इलाकों में भी हुआ. जहां कोरोना को लेकर कोई सख्ती नहीं दिखी. कुछ लोग को छोड़. कई ऐसे थें जों यहां मास्क नहीं लगाकर आये थें. यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण व कोरोना को ध्यान में रखकर भी किया जा सकता था.

डाकबंगला चौराहा अक्सर प्रदर्शन का केंद्र रहता है. यहां गाड़ियों को रोका जा रहा था. कई गाड़ियों पर प्रदर्शनकारी चढ़ भी ​गये. पुलिस के बीच बचाव के बाद उनको वहां से छोड़ा गया. पूरी तरह से यातयाता व्यवस्था चरमरा गयी. दिन भर लोगों को इस बंद से परेशानी उठानी पड़ी. कई राजनीतिक दल के कार्यकर्ता यहां प्रदर्शन करते रहें. बिहार में इस बंद का असर शहरी क्षेत्रों में आंशिक रूप से दिख रहा है.

किसानों के बिल का विरोध कितना जायज

जिस बिल को किसान विरोधी बता कर प्रदर्शन किया गया. जानकार बताते हैं कि बिहार में इस बंद से किसान लगभग अनभिज्ञ हैं.किसानों के नाम पर भारत बंद का आह्वान विरोधी पार्टियों ने किया है. लेकिन जिन किसानों के लिए यह बंद बुलाया गया है. वह विरोध-प्रदर्शन से इतर अपने खेतों में काम करते नजर आ रहे हैं.

पटना से सटे दानापुर में जब पता लगाया गया तो पता चला कि वहां ट्रैक्टर से खेतों की जुताई हो रही थी. किसान खेती के काम में मशगूल थे.  जब पूछा गया कि आज तो आपलोगों के लिए विरोधी दलों ने भारत बंद किया है तो किसानों ने कहा कि हम किसान हैं हम खेती कर रहे हैं. लगे हाथों किसानों ने कहा कि क्या होगा इस बंद में शामिल होकर.