‘लाठी के बल पर भारत बंद कराने की कोशिश नाकाम’, आरजेडी समेत तमाम विपक्ष को सुशील मोदी ने खूब सुनाया

लाइव सिटीज,सेंट्रल डेस्क : लगातार चुनाव में मिल रही शिकस्त से विपक्ष तिलमिला गया है. चुनावी हार का जनता से बदला लेने के लिए लाठी के जोर पर भारत बंद कराने का काम किया गया, जो की पूरी तरह से विफल रहा. बंद का समर्थन करने वाले विपक्ष के नेता खुद लापता रहे. यह कहना है पूर्व डिप्टी सीएम व प्रदेश बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी का. उन्होंने ट्वीट कर विपक्ष के भारत बंद पर हमला बोला है.

ट्वीट में लिखा कि भारत बंद के दौरान बिहार में किसान कहीं सडक पर नहीं दिखे क्योंकि वे सालाना 6 हजार रुपये खाते में पहुंचाने वाली किसान सम्मान योजना और आय दोगुनी करने में सहायक कृषि कानूनों से संतुष्ट हैं. बंद के दौरान विपक्ष के नेता दिल्ली में छुट्टी मना रहे थे, जिससे जाहिर है कि वे इस मुद्दे पर गंभीर नहीं थे.



वंशवादी राजनीति के राजकुमार उत्तर बिहार में चमकी बुखार और भीषण बाढ के समय भी बिहार से लापता थे. बिहार में पहली एनडीए सरकार ने किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए जिस कानून को 2006 में ही समाप्त कर दिया था. 2010 के चुनाव में एनडीए को किसानों-महिलाओं ने 206 सीटों के अपार बहुमत से फिर सेवा का मौका दिया.

विपक्ष ने 14 साल तक जिस मुद्दे पर विरोध करने की हिम्मत नहीं की, उस मुद्दे पर बिहार में “भारत बंद” कराने के लिए लाठी लेकर क्यों निकल पडे?  केंद्र सरकार ने बार-बार कहा कि तीन नए कृषि कानून लागू होने के बाद भी एमएसपी और मंडी व्यवस्था लागू रहेगी, लेकिन गरीबों-किसानों को धोखा देकर मतपेटी से बहुमत का जिन्न निकालना जिनके लिए मुश्किल हो गया, उन सबने मिलकर चुनावी पराजय का जनता से बदला लेने के लिए बंद कराने की कोशिश की. बिहार की जनता ने उस बंद को नकार दिया, जो न किसानों का था, न किसानों के लिए था और न असली किसानों की भागीदारी से संचालित था.