Exclusive : परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है- आनंद किशोर

बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर (फाइल फोटो)

पटना (नियाज़ आलम) : इंटरमीडिएट परीक्षा में सख्ती क्या हुई, दो तिहाई छात्र तो पास ही नहीं हुए. दरअसल पिछले साल बिहार टॉपर्स घोटाले को लेकर देशभर में हुई फजीहत के बाद बिहार बोर्ड ने सख्ती से काम लिया. परीक्षा आवेदन व आयोजन से लेकर उत्तर पुस्तिका की जांच तक में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई.

नतीजतन कुल 12 लाख 40 हजार 168 छात्रों में से मात्र 4 लाख 37 हज़ार 115 यानि 35.25 प्रतिशत छात्र ही पास हो सके. इस बार रिजल्ट इतने कम क्यों आए और क्या पहले कदाचार के कारण अधिक छात्र पास होते थे. ऐसे ही कई प्रश्नों को लेकर लाइव सिटीज ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनन्द किशोर से खास बातचीत की. 

पेश है बातचीत के प्रमुख अंशः-

रिपोर्टर-  इस साल बोर्ड ने सख्ती की तो मात्र 35.25 प्रतिशत छात्र ही पास हुए, क्या हर साल कदाचार होता रहा है?
आनंद किशोर- पिछली परीक्षाओं में कदाचार की बात नहीं कही जा सकती है. हर साल परीक्षा का अपना मापदंड होता है. हां, कुछ स्तरों पर कदाचार की संभावनाएं रहती थी, जैसे मूल्यांकन के दौरान रोल कोड और रोल नंबर होने से कई बार छात्रों की पहचान कर उन्हें फायदा पहुंचाया जा सकता है.

उन संभावनाओं को समाप्त करते हुए बोर्ड ने इस बार केवल उत्तर पुस्तिका में बार कोड को इस्तेमाल किया ताकि किसी की पहचान न हो सके. इसके अलावा पहले  रिजल्ट हाथ से तैयार किया जाता था, लेकिन इस बार इस व्यवस्था को भी बदला गया है. रिजल्ट बनाने में मानव हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त करते हुए इसे कम्प्यूटरीकृत किया गया है.

रिपोर्टर- पिछले साल की तरह फिर टॉपर्स घोटाले जैसी कोई बात न हो इसके लिए किस तरह की तैयारी की गई थी?
आनंद किशोर- इसके लिए सभी जिलों के टॉपर्स की कापियों को मंगवा कर उसकी पुनः जांच कराई गई. इतना ही नहीं एक कमेटी गठित कर विशेषज्ञों द्वारा भी कापी की जांच करवाई गई है. समिति द्वारा इस साल हर स्तर पर पूरी सावधानी बरती गई है. भले ही इस साल रिजल्ट का प्रतिशत कम हुआ है लेकिन जो टॉपर्स हुए हैं, वह अपनी काबलियत के दम पर ही बने हैं. सभी को बधाई.

रिपोर्टर- रिजल्ट का प्रतिशत काफी कम रहा, आगामी वर्षो में ऐसा न हो इसके लिए बोर्ड की क्या योजनाएं हैं?
आनंद किशोर- देखिए, बिहार बोर्ड का काम परीक्षा आयोजन से संबंधित है. इस लिए इस दिशा में इस वर्ष जो भी किया गया है, अगले वर्ष इससे भी बेहतर किया जाएगा. उदाहरण के तौर पर इस साल पहली बार ऑनलाइन आवेदन शुरू किया गया. इसी अनुभव के आधार पर अगले वर्ष समिति द्वारा अपने एजेंसी के माध्यम से पूरे बिहार में लगभग 200 केन्द्र खोले जाएंगे.

प्रत्येक अनुमंडल मंर ऑनलाइन फार्म भरने की सुविधा मुहैया कराई जाएगी. इसके अलावा भी कई ऐसे मापदंडों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि परीक्षा प्रक्रिया को स्वच्छ,  पारदर्शी एवं कदाचार मुक्त बनाया जा सके. हमारी कोशिश होगी कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का शुमार देश के बेहरीन परीक्षा समितियों में हो.

रिपोर्टर- जो छात्र इस बार किसी कारण से पास नहीं हो पाए हैं, उन्हें क्या सन्देश देना चाहेंगे.
आनंद किशोर- छात्रों को यही सन्देश देना चाहते हैं कि कठिन परिश्रम का कोई विकल्प और सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं है. हमेशा अपनी मेहनत पर भरोसा करें.

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