Exclusive Interview : मैथिली ने कहा- गायिकी मेरा जुनून, बनना चाहती हूं IAS

पटना (नियाज आलम) :  मधुबनी के एक छोटे से गांव की मैथिली ठाकुर ने राइजिंग स्टार में भले ही दूसरा स्थान हासिल किया, लेकिन देश-विदेश में आज बिहार की इस बेटी की चर्चा है. इंडियन आइडल जूनियर से राइजिंग स्टार तक का उनका सफर कैसा रहा? स्टार बनने के बाद गांव में उन्हें देखने के लिए किस तरह से लोगों की भीड़ लगी? बिहार सरकार के मंत्री मदन मोहन झा से मिलने पहुंची मैथिली ठाकुर ने अपने ऐसे ही अनुभवों को लाइव सिटीज के साथ साझा किया.

मैथिली ठाकुर से EXCLUSIVE INERVIEW

रिपोर्टर- मैथिली सबसे पहले आपको राइजिंग स्टार में फ़ाइनल तक के सफ़र के लिए बधाई.
मैथिली- जी, बहुत बहुत शुक्रिया.

रिपोर्टर- मैथिली सबसे पहला सवाल यह है कि राइज़िंग स्टार की विजेता बनने से आप मात्र दो वोट से पीछे रहे गईं, क्या इसका डर था? और सीज़न नहीं जीत पाने का कितना अफसोस रहा आपको?

मैथिली- जी, मुझे बिल्कुल भी अफसोस नहीं हुआ, क्योंकि यहां तक पहुचना भी एक बड़ी बात है. जहां तक हारने के डर का सवाल है, तो मुझे पूरा विश्वास था कि मैं जीत रही हूं. सिर्फ मुझे ही नहीं शो के तीनों जजों को भी यकीन थी कि मैं ही जीत रही हूं, लेकिन अचानक कुछ हुआ और पता चला कि मैं सिर्फ एक फीसदी वोट से हार गई. मुझे इसका बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा, क्योंकि वहां एक सेलिब्रेशन का माहौल था. सबसे बड़ी बात यह कि देश के लोगों ने मुझे इतना प्यार दिया, कि मैं बहुत खुश हूं. 

रिपोर्टर- चलिए हार का दुख नहीं हुआ, यह सकारात्मक सोच की निशानी है. लेकिन क्या शो के विजेता बैनेट दोसांझ को आप खुद से अच्छा सिंगर मानती हैं?

मैथिली- देखिए, टॉप-3 में आए सभी सिंगरों में अलग-अलग क्वॉलिटी थी. तो हम एक-दूसरे से किसी की तुलना नहीं कर सकते. सब एक से बढ़ कर एक थे.

रिपोर्टर- राइज़िंग स्टार के ऑडिशन से लेकर पूरे शो में क्लासिकल पर आपकी अच्छी पकड़ नज़र आई. आपके गाए ‘भोर भयो’ और ‘केसरिया बालम’ जैसे गानों को अभी भी पूरा देश गुनगुना रहा है. लेकिन क्या आपको लगता है कि संगीत के दूसरे फार्मेट पर आपको तैयारी की जरूरत है?

मैथिली- बिल्कुल, क्योंकि बॉलीवुड में पैर जमाना है तो संगीत के सभी फार्मेट पर मजबूत पकड़ रखनी ही होगी. मैं चाहती हूं कि जैसे मैने क्लासिकल में खुद को तैयार किया है, वैसे ही वेस्टर्न व दूसरे फार्मेट में भी खुद को तैयार करूं.

रिपोर्टर- इंडियन आइडल जूनियर में शामिल होने से लेकर राइज़िंग स्टार में आपने बड़ी सफलता हासिल की. बिहार का मान बढ़ाया. पहले और अब में कितना फर्क महसूस करती हैं? 

मैथिली- राइजिंग स्टार के बाद मैं मुंबई से दिल्ली आई और उसके बाद जब अपने गांव आई तो अलग ही बात रही. मेरे घर के बाहर लोगों की भीड़ लग गई. लोग मुझसे मिलने के लिए दरभंगा, मुजफ्फरपुर व दूसरी जगहों से आए. मुझसे मिलने के लिए देर रात तक लोग इंतजार करते थे. ऐसा मेरे साथ पहली बार हुआ. यह अनुभव काफी अलग और मजेदार रहा.

रिपोर्टर- फिलहाल आप दिल्ली में रहती हैं, लेकिन छुट्टियों में अपने गांव जरूर आती होंगी. पहले गांव आने का ज्यादा मन करता था या अब. क्योंकि अब आप बिहार की सबसे बड़ी स्टार बन चुकी हैं? 

मैथिली- (हंसते हुए) दिल से कहूं तो पहले मैं गांव आती थी और छुट्टियां बिता कर, मौज मस्ती कर चली जाती थी. लेकिन अब मैं उनकी नजर में स्टार बन चुकी हूं. पहले सब तनु (निक नेम) कह कर बुलाते थे, लेकिन अब मैं उनके लिए मैथिली ठाकुर बन गई हूं. थोड़ा सा असहज महसूस होता है लेकिन मुझे आगे बढ़ना है तो यह सब समझना होगा.

रिपोर्टर- गायन में आने की प्रेरणा कैसे मिली?

मैथिली- मेरे बाबा (पिता जी) मैथिली गाना गाते थे. जब वह रियाज करते थे तो मैं भी उनके पास जाकर बैठ जाती थी. धीरे-धीरे मुझे हारमोनियम बजाना भी आ गया. दरअसल जब मैं 6-7 साल की थी तभी से मैं संगीत से दूर हटती ही नहीं थी. धीरे-धीरे मैने बाबा से मैथिली फोक गाना सीखा उसके बाद संगीत सीखती रही. मुझे सबसे पहली संगीत की शिक्षा मेरे बाबा से मिली. फिर मुझे बाबा ने क्लासिकल संगीत सीखने के लिए प्रेरणा दी, 7-8 साल मैने क्लासिकल पर काफी मेहनत की है. अब लगता है कि क्लासिकल में कुछ सीखा है. मैं सोचती हूं कि मैं फोक और क्लासिकल तो गा ही लेती हूं तो अब वेस्टचर्न जैसे फार्मेट पर भी काम करूं, ताकि संगीत का पूरा पैकेज बन सकूं.

रिपोर्टर- अक्सर देखा गया है कि रियलिटी शोज के ज्यादातर स्टार कुछ दिनों के बाद गायब हो जाते हैं और बॉलीवुड में वह कहीं नजर नहीं आते. आपको भी इसकी चिंता है?

मैथिली- जी…बिलकुल, यही तो..  लेकिन मैं आगे की तैयारी इस तरह से करना चाहती हूं, कि बस एक बार में बालीवुड पर छा जाऊं.

रिपोर्टर- आपने संगीत की शुरुआती शिक्षा अपने बाबा से ली है. शो के दौरान आपको नहीं लगा कि मैथिली लोक संगीत को राइजिंग स्टार जैसे बड़े मंच के माध्यम से देश और दुनिया तक पहंचा सकें?

मैथिली- मन तो बहुत किया लेकिन शो में केवल बॉलीवुड गाने ही चुने जा सकते थे. हां एक एपिसोड था जिसमें फोक या डिवोशनल गाने गा सकते थे. मेरा मन था कि मैं कोई मैथिली गीत गाऊं, लेकिन बॉलिवुड में कोई ऐसा गाना नहीं मिला जो मैथिली फोक पर हो. इसलिए मैने गुजराती फोक पर आधारित नगाड़ा संग ढोल बाजे गाना गाया. मेरी कोशिश है कि मैथिली फोक को मैं बड़े मंच तक ले जा सकूं. ताकि जो स्थिति मेरे साथ हुआ वह किसी और के साथ न हो सके.  

रिपोर्टर- पढ़ाई के लिए आप बिहार से दिल्ली जाकर रह रही हैं. अब गायन में भी आपको काफी शोहरत मिल चुकी है. पढ़ाई और संगीत, दोनों अलग-अलग क्षेत्र हैं, कैसे तालमेल बैठाती हैं? 

मैथिली- अभी मैं 12वीं में हूं और बोर्ड परीक्षा आने वाले हैं. मैं जितना संगीत को लेकर गंभीर हूं, उतना ही अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान देती हूं. मैं चाहती हूं कि  दोनों में बैलेंस बना कर चलूं. हां कुछ लोग कहते हैं, कि संगीत और पढ़ाई एकसाथ मुश्किल है. हालांकि मैने उनको गलत साबित किया है और दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 96 प्रतिशत मार्क्स हासिल किया. अब वह कहते हैं कि हां, यह दोनों काम कर सकती है. 

रिपोर्टर- आप बिहार में यूथ आइकन बन चुकी हैं. आपको देखकर अब बिहार के छात्र-छात्राएं भी संगीत की तरफ आने लगे हैं,  कहीं लोग यह न कहने लगे कि मैथिली को देख कर बच्चे पढ़ाई छोड़ संगीत की तरफ भागने लगे. उनके लिए आप क्या संदेश देना चाहती हैं?   

मैथिली- (हंसते हुए) जी बिल्कुल… ऐसा नहीं होना चाहिए. पढ़ाई के अलावा बच्चों को दूसरी एक्टिविटीज में समय देना चाहिए, इससे दिमाग फ्रेश रहता है. लेकिन पढ़ाई किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए. मैं सभी को यह सन्देश देना चाहती हूं कि पढ़ाई और दूसरी एक्टिविटीज में परफेक्ट बैलेंस बनाकर ही चलें.

रिपोर्टर- भविष्य में आप गायिका ही बनना चाहती हैं या किसी और क्षेत्र में भी जाने का सोचा है?

मैथिली- सिंगर तो मुझे बनना ही बनना है, यह मेरा जनून है. लेकिन बचपन से मुझे आईएएस अधिकारी बनने का शौक रहा है. मैं इसके लिए भी तैयारी कर रही हूं. मैं यूपीएससी की परीक्षा में हिस्सा जरूर लूंगी.

रिपोर्टर- आपको भविष्य के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं…और ढेरों बधाई.
मैथिली- जी बहुत -बहुत शुक्रिया….

यह भी पढ़ें-
मैथिली की जीत के लिए बड़ा रिस्‍क लिया था मदन मोहन झा ने