Exclusive :  लालू प्रसाद ने थोक में प्राप्‍त किये हैं पड़ोसियों की जमीन के ‘सेल डीड’

पटना : बिहार में महागठबंधन का क्‍या होगा, सिर्फ नीतीश कुमार जानते हैं . दूसरा कोई गारंटी नहीं दे सकता . शायद राहुल गांधी भी नहीं जानते हैं . महागठबंधन की किचकिच के बीच ‘टीम लालू’ सीबीआई से ‘लीगल वार’ की तैयारी में जुटी है . डिप्‍टी चीफ मिनिस्‍टर तेजस्‍वी यादव पिछले कई दिनों से दिल्‍ली में डेरा जमाये हैं . खबर है कि देश के सबसे बड़े और महंगे वकील राम जेठमलानी से तेजस्‍वी यादव की मीटिंग हो चुकी है . लालू प्रसाद स्‍वयं भी समय-समय पर बात कर रहे हैं . 
तैयारी के मुताबिक सबसे पहले सीबीआई की एफआईआर को क्‍वैश कराने की याचिका दिल्‍ली हाई कोर्ट में दायर कराई जाएगी . यह कल सोमवार 24 जुलाई से शुरु होने वाले हफ्ते में होगा . हालांकि, उदाहरण ऐसे महाविरले ही मिलते हैं, जिसमें किसी कोर्ट ने सीबीआई की एफआईआर को क्‍वैश करने का निर्णय दिया हो . फिर भी ‘टीम लालू’ कोर्ट में लड़ने को तैयार है . दरअसल, लीगल लड़ाई के बहाने कोशिश इस बात की होगी कि याचिका के निष्‍पादन तक किसी भी प्रकार की दंडात्‍मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक का आदेश अभी कोर्ट से प्राप्‍त हो जाए . फिर आगे का आगे देखा जाएगा . तेजस्‍वी पूरी तैयारी के साथ दिल्‍ली गये हैं . स्‍वयं लालू प्रसाद ने मानीटरिंग की है . वे खुद से अधिक केस में राबड़ी देवी और तेजस्‍वी यादव का नाम आने से परेशान हैं . तेजस्‍वी का पूरा कैरियर ‘डेंजर जोन’ में चला गया है . दिल्‍ली में ‘लीगल वार’ की तैयारियों के बाबत लालू प्रसाद ने सीबीआई की एफआईआर के एक-एक बिंदु को समझने की कोशिश की है . 
समझ के इसी प्रयास में ‘टीम लालू’ ने पाया कि जमीन के बदले रेलवे के होटल के मामले के अलावा भी आरोप है . वैसे इस आरोप की शुरुआत बिहार भाजपा के वरिष्‍ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने की थी,जो बाद में सीबीआई की एफआईआर में भी कलमबंद दिखी है . आरोप यह है कि पटना में चाणक्‍या होटल वाले कोचर बंधुओं से जो तीन एकड़ जमीन प्राप्‍त की गई है,उसमें बिहार सरकार के राजस्‍व को भी नुकसान पहुंचाया गया है . कहने का आशय यह कि सीबीआई ने पाया है कि जमीन की रजिस्‍ट्री सरकार के निर्धारित सर्किल रेट से कम में हुई . एफआईआर में मार्केट वैल्‍यू का जिक्र भी दिखता है .
अब इसका काट निकालने को ‘टीम लालू’ ने बड़ी मेहनत की है . खबर है कि पिछले हफ्ते ‘टीम लालू’ के सदस्‍यों ने अंचल और निबंधन कार्यालयों में डेरा डाल रखा था . संबंधित अधिकारियों से कहा गया कि उन्‍हें लालू प्रसाद और फैमिली की जमीन का तो पता ही है . अब वे आसपास की जमीन की रजिस्‍ट्री को देखना चाहते हैं . विशेषकर आरोप की अवधि में पड़ोस/आसपास की जो जमीन बिकी है .
पड़ोस/आसपास की जमीन और इसकी खरीद-बिक्री का पता कर वैसे सेल डीड को प्राप्‍त कर लिया गया है, जिसकी रजिस्‍ट्री सर्किल रेट से कम पर हुई थी . बड़ी संख्‍या में ऐसे डीड मिले हैं . असल में,बिहार में यह होता आया है कि जमीन की वास्‍तविक कीमत कम और सर्किल रेट अधिक दिखाया गया है . ऐसे में,सर्किल रेट के हिसाब से स्‍टांप ड्यूटी का भुगतान तो जरुर किया गया है,पर जमीन की खरीदगी के लिए सेलर को पेमेंट कम दिखाया गया है .
‘टीम लालू’ के पास पड़ोस/आसपास के पास ऐसे अब अनेक सेल डीड हैं . सभी पुराने हैं . इस प्राप्ति से लालू प्रसाद और प्रेम गुप्‍ता कोर्ट को यह बताना चाहेंगे कि तब जमीन का रेट ही वैसा था,जैसा रजिस्‍टर्ड डीड में दर्ज है . विश्‍वास न हो,तो दूसरे सबों का सेल डीड देखें,जो उसी अवधि के हैं .

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