कोचस में किसानों ने जलाया कृषि बिल की प्रतियां, जविपा सुप्रीमो अनिल कुमार ने किया समर्थन, बिल को बताया देश विरोधी

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : केंद्र सरकार के कृषि बिल के खिलाफ दिल्‍ली बॉर्डर पर चल रहे राष्ट्रव्‍यापी आंदोलन के समर्थन में किसान संकल्‍प दिवस के रूप में मनाते हुए आज महात्‍मा गांधी चौक, कोचस में स्‍थानीय किसानों ने तीनों बिल की प्रतियां जलाई. जिसका समर्थन जनतांत्रिक विकास पार्टी ने भी किया. इस मौके पर जविपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ने अपना समर्थन देते हुए कहा कि मोदी सरकार का कृषि बिल किसान ही नहीं, भारत का आवाम विरोधी बिल है, जिसकी हम पुरजोर खिलाफत करते हैं.

अनिल कुमार ने कहा कि आज कोचस में जिस तरह से किसानों ने तीनों कृषि बिल की प्रतियां जलाईं हैं, वो बिहार में किसानों की ओर से उन बिलों के खिलाफ पहला ठोस कदम है. हमें लगता है कि यह बिहार के किसानों के अंदर जोश भरने के लिए काफी है. उन्‍होंने कहा कि कोचस, रोहतास का क्षेत्र धान का कटोरा कहा जाने वाला क्षेत्र है, लेकिन जब से बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनी है, तब से उन्‍होंने बाजार समिति को खत्‍म कर दिया है. इसका नतीजा यह हुआ कि किसान 11 सौ से 12 सौ रूपए में धान बेचने को मजबूर हुए. अब यही हाल देश की एनडीए सरकार इन तीन कृषि बिल के जरिये हर राज्‍य में करना चाहते हैं.



उन्‍होंने कहा कि कृषि बिल के खिलाफ दिल्‍ली में पंजाब, हरियाण और यूपी के किसानों के साथ देश भर से आये किसान अपने अस्तित्‍व के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं. कोचस में शुरू हुआ यह आंदोलन उन किसानों को भी नैतिक बल देगा और उन्‍हें हौसला‍ मिलेगा. उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरानी जातते हुए कहा कि माननीय न्‍यायालय ने आदेश पारित कर कुछ दिनों तक कृषि बिल को सुला देने का काम किया और फिर जब अडानी – अंबानी को जरूरत होगी, तब यह कानून लागू कर दिया जायेगा. क्‍योंकि जो कमेटी में लोग हैं, वे अंध भक्‍त हैं और पहले से ही वे कृषि कानून को लागू करने के पक्षधर रहे हैं. 

कृषि बिल को जलाने के मौके पर जविपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जगनारायन सिंह, गुप्तेश्वर पटेल ,आर के सिंह,विनय पटेल ,जानकी भगत,रामाशंकर सरकार ,संजय सिंह ,विनोद कुमार चौधरी, डॉ गौरीशंकर सिंह ,रामचंद्र सिंह, सतीश पटेल ,अरविंद पटेल , मुन्ना ठाकुर समेत अन्य किसान नेता मौजूद रहे.  कोचस प्रखंड के किसान नेता के  अध्यक्ष कमलेश सिंह, रामाशंकर सरकार के नेतृत्व में कोचस के तमाम किसान नेता आंदोलन कर रहे थे.