आरजेडी छोड़ जेडीयू में शामिल हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री दसई चौधरी और विधायक निमतुल्लाह, वशिष्ठ नारायण सिंह ने दिलायी सदस्यता

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : आरजेडी से जेडीयू में आने का अभी भी सिलसिला जारी है. पूर्व केन्द्रीय मंत्री व आरजेडी नेता दसई चौधरी, विधायक निमतुल्लाह, सीतामढ़ी आरजेडी जिलाध्यक्ष विमल शुक्ला और सीतामढ़ी कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने जेडीयू का दामन थाम लिया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने सभी को जेडीयू की सदस्यता दिलायी. साथ ही इन सभी का स्वागत करते हुए इनके आने से पार्टी को और मजबूत होने की बात कही.

वहीं पूर्व केन्द्रीय मंत्री दसई चौधरी ने आरजेडी छोड़ने के पीछे के कारणों का जिक्र करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव हम जैसे लोगों को कोई तवज्जों नहीं देते हैं. ना तो उनमें लालू यादव की तरह राजनीतिक इच्छा शक्ति है और ना ही वो अपने पिता की तरह किसी से व्यवहार करते हैं. ऐसे में तेजस्वी के इस व्यवहार से वहां रहना ज्यादा मुनासिब नहीं समझा, और जेडीयू में शामिल हो गया.



वहीं विधायक निमतुल्लाह ने आरजेडी में अपने आप को उपेक्षित महसूस करने की बात करते हुए कहा कि तेजस्वी तानाशाह की तरह किसी से व्यवहार करते हैं. उनसे मिलने के लिए महीनों तक मिन्नत करनी पड़ती है. कांग्रेस पार्टी की तरह आरजेडी में पार्टी नेता से मुलाकात के लिए महीनों पहले अर्जी देनी पड़ती है. फिर भी मुलाकात नहीं हो पाता है. ऐसे में वहां जमीनी नेताओं का कोई कद्र नहीं है.

निमतुल्लाह ने आगे कहा की आरजेडी अल्पसंख्यकों को सिर्फ एक वोट बैंक के रूप में उपयोग करती है. आरजेडी की पूरा सभ्यता बदल चुकी है. 2020 के चुनाव में कई ऐसे लोगों को टिकट दिया गया जो लोग पार्टी के लिए कभी समर्पित नहीं थे. जो लोग पार्टी के अपना खूब पसीना बहाने का काम किया उन्हें दरकिनार कर दिया गया.

जेडीयू में शामिल नेताओं ने कहा कि आरजेडी ने 2020 के चुनाव में कई ऐसे लोगों को टिकट देने का काम किया जिस पर कई मुकदमे दर्ज हैं. साफ छवि वाले और काम करने वाले नेताओँ को वहां कोई नहीं पूछता है. लेकिन इसबार के चुनाव में अल्पसंख्यों को वोट बैंक की तरह उपयोग करने वाली आरजेडी का भ्रम टूट जाएगा.