डॉक्टर हिमांशु से ठगे थे एक करोड़ से अधिक रुपए, साढ़े तीन साल बाद जारी हुआ अरेस्ट वारंट

पटना : ठगी और फ्रॉडगिरी के एक बड़े मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश आया है. मामले की सुनवाई करते हुए करीब साढ़े तीन साल बाद आरोपी के खिलाफ कोर्ट ने गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया है. आरोपी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है. ठगी का ये मामला एक करोड़ रुपए से अधिक का है. दरअसल, ये पूरा मामला जुड़ा पटना के प्रख्यात डॉक्टर हिमांशु रॉय और उनकी वाइफ डॉक्टर सारिका रॉय से. पटना के पत्रकार नगर थाना में केस नंबर 226/14 दर्ज है. इस केस को डॉक्टर हिमांशु रॉय ने दरभंगा जिले के कमातौल के करजापत्ति के रहने वाले सुशील कुमार के बेटे अभिषेक कुमार के खिलाफ दर्ज कराया था. उस वक्त अभिषेक पटना में कंकड़बाग में रहता था. जबकि उसके पहले वो दिल्ली के रोहिणी में सेक्टर 7 में रहता था.
— कुछ इस तरह से हुई थी मुलाकात
बात साल 2012 की है. डॉक्टर हिमांशु की मानें तो अभिषेक की वाइफ को बच्चा नहीं था. वाइफ की इलाज कराने वो उनके पास आया था. अभिषेक कोचिंग में पढ़ाता भी था. उस टाइम डॉ. हिमांशु का बेटा उसी कोचिंग में पढ़ता था. आरोप है कि अभिषेक ने उस वक्त उनके बेटे को अपने ग्रिप में लिया और पिता को कोचिंग खुलवाने के लिए रुपए इंवेस्ट करने को समझाया. फिर उसने डॉ. सारिका रॉय को भी समझाया था. इसी तरह बात आगे बढ़ती गई. फिर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर इंवेस्टमेंट करने के लिए डॉ. हिमांशुतैयार हो गए थे.
— ऐसी की थी ठगी
कोचिंग के लिए प्रज्ञाकर एजुकेशन के नाम से एक कंपनी बनाई गई थी. जिसमें 6500 शेयर डॉ. हिमांशु का था. जबकि 3000 शेयर अभिषेक का और 500 शेयर डॉ. अश्विनी कुमार की वाइफ मीरा नारायण का था. कंपनी में डॉ. हिमांशु ने 60 लाख रुपए, अभिषेक ने 30 लाख और मीरा ने 50 हजार रुपए इंवेस्ट किए थे. चौंकाने वाली बात ये है कि अभिषेक ने जो 30 लाख रुपए इंवेस्ट किए थे, वो रुपए भी उसने डॉ. हिमांशु से ही लोन पर लिया था. इसके एवज में उसने एक एग्रीमेंट भी बनाया था. उस वक्त अभिषेक ने ये भरोसा दिलाया था कि लोन के 30 लाख रुपए वो अपनी ​दिल्ली वाली प्रोपर्टी को बेचकर चुका देगा. इस बात पर डॉ. हिमांशु अभिषेक के झांसे में आ गए थे. कंकड़बाग और बोरिंग रोड में कोचिंग का बिजनेस चल रहा था. एडमिनिस्ट्रेशन, स्टूडेंट्स की फिस और एकाउंट सब कुछ अभिषेक ही देखा करते थे. कुछ महीने बाद ही अभिषेक ने कंपनी को लॉस में बताना शुरू कर दिया. कंपनी को रुपयों की जरूरत है बता कर फिर से उसने डॉ. हिमांशु से अक्टूबर 2013 से मार्च 2014 के बीच 51 लाख 5 हजार रुपए लिया था. फिर ​15 लाख रुपए उनकी वाइफ डॉ. सारिका रॉय से भी लिया था. फिर धीरे—धीरे अ​भिषेक के उपर शक गहराने लगा. बाद में गबन का मामला सामने आया. जिसके बाद सभी के होश उड़ गए.
— उस वक्त पुलिस ने नहीं की थी कार्रवाई
जब गबन का मामला पकड़ा गया तो अभिषेक के भी होश उड़ गए थे. 25 सितंबर 2014 को डॉ. हिमांशु राय ने अभिषेक कुमार के खिलाफ ठगी और धोखधड़ी का एफआईआर पत्रकार नगर थाना में दर्ज कराया था. लेकिन उस टाइम थाने की पुलिस टीम ने कोई कार्रवाई नहीं की थी. उस वक्त पटना सदर के डीएसपी से लेकर सिटी एसपी तक डॉ. हिमांशु ने ​अभिषेक के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई थी. लेकिन उस दौरान पटना पुलिस ने उनकी एक न सुनी थी. आपको बता दें कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था. सुप्रीम कोर्ट ने पटना के लोअर कोर्ट को सुनवाई कर कार्रवाई करने का आदेश दिया था.
— पटना पुलिस पर टिकी नजरें
मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कोर्ट ने अभिषेक के खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश दे दिया. गिरफ्तारी का वारंट भी जारी कर दिया गया है. अब सबकी निगाहें पटना पुलिस पर टिकी है. देखना ये है कि इस बार पुलिस का रवैया किस प्रकार का रहता है. साल 2014 से ही अभिषेक फरार है. अब पुलिस उसे खोज कर गिरफ्तार करेगी या फिर कोर्ट के आदेश के बाद भी  लापरवाही वाला रवैया अपनाए रखेगी.
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