फर्जी गणेश का काला सच : उम्र-42 साल, 2 बच्चों का बाप, चिटफंड कंपनी का पुराना स्टाफ

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पटना : बिहार के 12वीं के नतीजे में इंटर आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार के झोल का सबसे पहले खुलासा लाइव सिटीज ने करना प्रारंभ किया. हर बिंदु की जांच की. जब नतीजे के दिन 30 मई को गणेश की खोज-खबर पूरे देश की मीडिया नहीं तलाश पाई थी, लाइव सिटीज की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ने यह खोज निकाला था कि गणेश फर्जी है.

30 मई की रात को ही लाइव सिटीज की टीम ने गणेश के मार्कशीट को सबसे पहले तलाशा. देखा कि संगीत के नतीजे में झोल है. समस्तीपुर के देहात के स्कूल में संगीत की ऐसी विशिष्ट पढ़ाई कहां से? फिर रात को ही लाइव सिटीज की समस्तीपुर टीम ने गणेश के दूसरे रिकॉर्ड को खोजा. यह खोज मुश्किल थी. पर इस खोज से गणेश की तस्वीर मिली और उम्र का पता चला.

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रिकॉर्ड कहता था कि गणेश की अभी उम्र 24 साल है. 2 जून 1993 की जन्मतिथि दर्ज थी. पर तस्वीर कह रही थी कि गणेश की उम्र और भी अधिक है. लाइव सिटीज ने रात को ही फोटो की जांच करनेवाले लोगों से दिल्ली में संपर्क साधा. उधर से जवाब आया कि उम्र 24 से बहुत अधिक होगी. और भी जालसाजी साफ़ होती गई. सबसे बड़ा सवाल था कि वह झारखंड के गिरिडीह से समस्तीपुर के उस देहाती स्कूल में पढ़ने क्यों आया? रामनंदन सिंह जगदीश नारायण इंटर स्कूल समस्तीपुर के ताजपुर के चकहबीब गांव में है. समस्तीपुर से यहां आने को 22 किलोमीटर की सवारी करनी होती है. पहले बस से और फिर फटफटिया गाड़ी से.

31 मई को लाइव सिटीज की सुबह की पहली जांच में गणेश के फर्जीवाड़े का और भी राज खुला. स्कूल का दावा तो नियमित छात्र का था, लेकिन फॉर्म में गिरिडीह का यह छात्र समस्तीपुर में कहां रहता था, कुछ भी दर्ज नहीं था. एडमिशन की तारीख भी गायब थी. एडमिशन फॉर्म में पहले होम साइंस सब्जेक्ट को चुना गया था, जिसमें गणेश बाद में परीक्षा में शामिल नहीं हुआ.

लाइव सिटीज की टीम के सदस्य 31 मई को ही झारखंड के गिरिडीह में गणेश के घर पहुंचे. गणेश वहां नहीं था. हैरत की बता तो यह थी कि परिवार को गणेश की परीक्षा की कोई जानकारी ही नहीं थी. जब जानकारी दी गई, तब परिवार ने कुछ-कुछ अच्छा कहना शुरु किया. बताया गया कि गणेश के पिता का निधन हो चुका है और वह मजदूरी कर आगे की पढ़ाई कर रहा है. गणेश का कोई नंबर भी नहीं दे रहा था. दोस्तों के कुछ नंबर दिए गए.

आखिरकार गिरफ्तार हुआ गणेश –

31 मई की रात तक गणेश का पता नहीं चला. दोस्त कहते रहे कि पटना आनेवाला है. यह भी बताया गया कि वह बंगाल में मुर्शिदाबाद चाचा के देहांत की सूचना पाकर गया है. दोस्त भी गणेश के टैलेंट पर चुप्पी साध लेते. पर इतना जरुर बताते कि संगीत तो नहीं आता था. इस बीच और देर रात को गणेश के कई छुपे राज लाइव सिटीज की टीम को प्राप्त हुए.

पता चला कि गणेश की उम्र 24 नहीं, 42 साल है. दो बच्चों का बाप है. गिरिडीह में कई वर्षों तक किसी चिटफंड कंपनी का स्टाफ रह चुका है. और तो और, 1990 में ही वह मैट्रिक की परीक्षा पास कर चुका था. अब तो वह नई जालसाजी उम्र घटाने और सरकारी नौकरी पाने के लिए कर रहा था. स्कूल ने फर्स्ट क्लास दिलाने का ठेका ले रखा था, लेकिन हो गया टॉपर. टॉपर होते ही गणेश की किस्मत हुई खराब, क्योंकि अब उसकी पड़ताल हो रही थी.

30-31 मई को गायब रहनेवाला गणेश 1 जून को अचानक समस्तीपुर के स्कूल में प्रकट हो जाता है. लाइव सिटीज की टीम मौजूद है. चाचा की मौत के बहाने गणेश ने सिर के बाल मुड़ा रखे हैं. लाइव सिटीज की टीम समझ जाती है कि यह उम्र छुपाने की कवायद भी है. देश-दुनिया की पूरी मीडिया टीम भी पहुंची हुई है. गणेश से संगीत के बारे में बेसिक सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन उसे ठीक से पता नहीं है. खुद मानता है कि संगीत तो सिर्फ अधिक नंबर के लिए लिया था.

1 जून की शाम बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड कुछ और कहना शुरु करता है. कहता है – गड़बड़ी नहीं हुई है. विशेष राजनीतिक दल दलित कार्ड खेलते हैं. कहा जाता है कि दलित होने के कारण सभी गणेश के पीछे लगे हैं. इसके बाद देर रात को लाइव सिटीज की टीम और खुलासे करती है. 15 मार्कशीट जारी किये जाते हैं.

अब आज 2 जून को गणेश को पटना कॉल किया जाता है. बोर्ड वाले पूछताछ करते हैं और फिर कार्रवाई का रास्ता निकालते हैं. उम्र की धोखाधड़ी सबसे सहज मार्ग दिखता है. फिर कोतवाली पुलिस को बुलाकर गिरफ्तार करा दिया जाता है व टॉपर का रिजल्ट रद कर दिया जाता है.

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