GSLV मार्क-3 रॉकेट लांच कर भारत ने रचा इतिहास

लाइव सिटीज डेस्क : भारत ने अंतरिक्ष में अपने योगदान से एक बार फिर इतिहास रच दिया है . भारत के वैज्ञानिकों ने GSLV मार्क-3 का सफल परीक्षण कर इसको श्री हरिकोटा से अंतरिक्ष में पहुंचा दिया है. भारत का यह सबसे वजनी रॉकेट पूरी तरह से स्वदेशी है. यह GSAT 19 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा. GSLV मार्क-3 की सफल परीक्षण पर पीएम मोदी ने सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी. उन्होंने कहा यह राष्ट्र के लिए गर्व की बात है.

बता दें कि जीएसएलवी मार्क 3 को फैट ब्वॉय के नाम से भी जाना जाता है. इस रॉकेट का वजन 640 टन है. यह आठ टन वजन अंतरिक्ष में लेकर जा सकता है. इस रॉकेट की सबसे बड़ी बात यह है कि रॉकेट के मुख्य व सबसे बड़े क्रायोजेनिक इंजन को इसरो के वैज्ञानिकों ने भारत में ही विकसित किया है, जो पहली बार किसी रॉकेट को उड़ने की शक्ति प्रदान करेगा. यह 300 करोड़ की लागत से बना है. पहले यह रॉकेट मई के अंत में छोड़ा जाना था.

DD नेशनल से साभार

रॉकेट के साथ छोड़ा जाने वाला संचार उपग्रह जीसैट-19 लगभग 3.2 टन वजनी है. यह किसी घरेलू स्तर पर निर्मित रॉकेट से छोड़ा जाने वाला अब तक का सबसे वजनी उपग्रह होगा. इसरो के अनुसार, जीसैट-19 बहु-तरंगी उपग्रह है, जो का और कू बैंड वाले ट्रांसपोंडर्स अपने साथ लेकर जाएगा. इस उपग्रह की उम्र 15 वर्ष होगी. इसरो इससे पहले 2014 में बिना क्रायोजेनिक इंजन वाला इसी तरह का रॉकेट छोड़ चुका है, जो 3.7 टन भार ले जाने में सक्षम था.

इसरो इससे पहले 2014 में बिना क्रायोजेनिक इंजन वाला इसी तरह का रॉकेट छोड़ चुका है, जो 3.7 टन भार ले जाने में सक्षम था. विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के. सिवन ने कहा था कि, “इस प्रक्षेपण का मुख्य उद्देश्य उड़ान के दौरान रॉकेट के संरचनात्मक स्थिरता और उसकी गतिकी का परीक्षण करना है.” उड़ान के दौरान रॉकेट वायुमंडल में विभिन्न तरह के दबावों से गुजरता है.

यह भी पढ़ें-  भारत पहुंची US निर्मित अल्ट्रा लाइट 145 M-777 हॉवित्जर तोप