निजी स्कूलों की मनमानी से गार्जियन परेशान, लॉकडाउन अवधि की फीस भरने का बनाया जा रहा प्रेशर, करे तो क्या करें…

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार में कोरोना संकट के कारण लगभग नौ माह तक सरकारी व प्राइवेट स्कूल बंद रहे. अब जाकर स्कूल खुल रहे हैं. सरकारी स्कूल चार जनवरी से खुल गए हैं और प्राइवेट स्कूल भी अब धीरे-धीरे अपनी सुविधाओं के अनुसार खुल रहे हैं. हालांकि, अभी भी लोअर क्लासें नहीं खुली हैं. केवल हायर एजुकेशन की कक्षाएं ही खुली हैं. क्लास एक से क्लास आठ ​तक की कक्षाएं मकर संक्रांति के बाद ही खुलेंगी. इतना तो ठीक है. लेकिन असली समस्या फीस को लेकर है. नौ माह की फीस को लेकर यह समस्या है. लॉकडाउन की अवधि में प्राइवेट स्कूलों की ओर से मांगी जा रही फीस ने गार्जियंस की परेशानी डबल कर दी है. एक तो लॉकडाउन के कारण आमदनी बंद हो गयी है, दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल की मनमानी के कारण अब इनके बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ने लगा है. ऐसे में गार्जियनों पर दोहरी मार पड़ी है.

पटना समेत पूरे बिहार के निजी स्कूल की तरफ एक साथ पूरे लॉकडाउन अवधि की फीस मांगी जा रही है. नहीं जमा करने पर बच्चों को परीक्षा से वंचित करने की चेतावनी तक दी जा रही है. जिससे अभिभावक काफी परेशान है. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि करें तो क्या करें. इसे लेकर लाइव सिटीज के पास भी अभिभावकों के लगातार फोन आ रहे हैं. किसी भी जनसरोकार के न्यूज के कमेंट बॉक्स में भी लोग लिख रहे हैं. उधर, स्कूल वाले अपना ही रोना रो रहे हैं. तर्क दे रहे हैं कि उन्हें बिजली बिल देना है, मकान किराया देना है, स्टाफ्स को पैसे देने हैं. ऐसे में सरकार की जिम्मेवारी बढ़ गई है. उसे इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.



स्कूल फीस की चिंता से सबसे ज्यादा परेशानी मिडिल व लोअर क्लास की फैमिली को है. वे टेंशन में हैं. बच्चे कैसे अगली कक्षा में जाएंगे. उनके पास आनलाइन पढ़ाई की भी सुविधा नहीं है. फूड वेंडर्स, स्ट्रीट वेंडर्स समेत अन्य तबकों के कर्मियों की माली हालत कोरोना के कारण पहले से ही खराब है. किसी की दुकान बंद हो गई है तो किसी की नौकरी खत्म हो गई है. जिनकी कमाई बैठ गई है, उनकी स्थिति तो डिप्रेशन जैसी हो गई है. यदि वे टीसी लेकर गांव जाना चाहते हैं तो उन्हें यहां भी फुल पेमेंट करना होगा और नई जगह पर एडमिशन के लिए भी पूरे पैसे देने होंगे. बहरहाल, गार्जियंस का कहना है कि सरकार इस पर अनिवार्य रूप से पहल करें. गंभीरता से विचार करें. समय रहते इसका हल निकालें.