बाप रे बाप ! पटना में 125 रुपये प्रति बोरा बालू और वह भी मुश्किल से मिलेगा

पटना : दाल-सब्‍जी महंगी होती है,तो खूब हल्‍ला होता है . सीधे तौर पर सरकारों को ताना मारती है पब्लिक . पर बालू,125 रुपये प्रति बोरा मिले,तो पब्लिक क्‍या करे और किससे कहे . आज के हाल में कहना बहुत मुश्किल है . कारण कि 40 रुपये टीना और 125 रुपये प्रति बोरे का बालू भी चुपके-चुपके/चोरी-चोरी मिल रहा है . बहुत अधिक पैसे लेकर बालू दे रहा व्‍यक्ति भी डरा रहता है कि न जाने कब पुलिस धमक पड़े .

बालू कहां मिलेगा,यह पता करना भी बिग रिसर्च वर्क जैसा हो गया है अभी बिहार में . 125 रुपये प्रति बोरा मिल गया तो ढ़ुलाई का खर्चा अलग से . घर आते-आते बालू और महंगा हो गया . दरअसल,बिहार का यह हाल पिछले कई महीनों से बना है . बिहार सरकार ने बगैर वैकल्पिक तैयारी बालू खनन और बालू माफिया पर अटैक किया . पब्लिक और इंडस्‍ट्री की परेशानी का क्‍या होगा,तनिक भी ख्‍याल नहीं रखा गया .

बालू माफिया की कमर तोड़ दी गई,अभी तक ऐसा भी देखने को नहीं मिला है . कारण कि चाहे जैसे भी,कोई बड़ा बालू माफिया,जिसने धंधे में करोड़ो कमाये हैं,अभी तक जेल नहीं पहुंचा है . हां,धंधा अभी जरुर बैठा हुआ है . बिहार में बालू माफिया के खिलाफ इस लड़ाई का पोलिटिकल कलर भी है . डिप्‍टी सीएम सुशील कुमार मोदी कहते रहे हैं कि बालू माफिया लालू प्रसाद की पार्टी राजद की फंडिंग करते हैं . इस बारे में उन्‍होंने कई बड़े खुलासे भी किये हैं . लेकिन,सच है कि खुलासे के बाद सरकार में रहते हुए भी किसी बड़े को जेल में ठूंस नहीं पाये हैं . और दूसरी बात यह कि माफिया भले खत्‍म हो जाए,पर बालू मिलने में पब्लिक और कंस्‍ट्रक्‍शन इंडस्‍ट्री को कोई तकलीफ न हो,इसके लिए बातों की खेती के अलावा कोई मुकम्‍मल व्‍यवस्‍था अब तक नहीं हो सकी है .

परिणाम यह निकला है कि कंस्‍ट्रक्‍शन इंडस्‍ट्री का भट्ठा बैठा हुआ है . इस कारण सभी रिलेटेड इंडस्‍ट्री और मैन पावर भी डिस्‍टर्ब है . बालू 125 रुपये प्रति बोरा मिलेगा,पब्लिक को बिहार के सबसे बड़े लोक आस्‍था के महापर्व छठ के वक्‍त मालूम हो रहा है . कारण कि गंगा और दूसरी नदियों की मैली होने के बाद बड़ी संख्‍या में लोगों ने नदी किनारे जाकर छठ करना बंद कर दिया है .

ऐसे लोग अपने घरों में छठ के लिए घर की छत पर व्‍यवस्‍था करते हैं,ताकि डूबते और उगते सूर्य को अर्ध्‍य दे सकें . अब जब छठ के दिन आ गए,तो लोगों ने घर की छत पर बनी व्‍यवस्‍था देखी . कुछ मरम्‍मती की जरुरत महसूस हुई . जरुरत बालू और सीमेंट की थी . सीमेंट मिलने में तो कोई परेशानी नहीं है,पर बालू ने आंखों से आंसू निकाल दिए . सोर्स-सिफारिश लगाकर बालू कहां मिलेगा,पता करना पड़ रहा है . आगे टीना और बोरे का भाव बताकर चुपके से डिलेवरी की बात की जा रही है . तो है न सिचुएशन,बाप रे बाप वाली . अब दोष किसे दें,बहरहाल प्रायोरिटी तो छठ पर्व की है .