प्रधानाध्यापक के पद पर प्रोन्नति में गड़बड़ी : हाई कोर्ट नाराज, डीईओ व डीपीए के विरुद्ध जांच के निर्देश

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पटना (एहतेशाम) : सरकार के आदेश को दरकिनार करते हुए प्रोन्नति में छूट का लाभ दिये जाने से नाराज पटना उच्च न्यायालय ने नवादा जिला के जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिला कार्यक्रम के विरुद्ध जांच कर दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया. न्यायधीश  एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने भरत कुमार एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

गौरतलब है कि पूर्व में इस मामले की सुनवाई के क्रम में इस बात का खुलासा हुआ था कि वर्ष 2016 में नवादा जिला में प्रधानाध्यापक के पद पर प्रोन्नति दिये जाने में सरकार के निर्णय को दरकिनार करते हुए अनियमितता बरती गयी है, जिसपर अदालत ने नवादा जिला के जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को अदालत में हाजिर होकर जवाब देने का निर्देश दिया था. शुक्रवार को सुनवाई के क्रम में दोनों पदाधिकारी अदालत में उपस्थित हुए. सुनवाई के क्रम में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया की वर्ष 2011 में सरकार ने यह अधिसूचना प्रकाशित की थी कि प्रधानाध्यापक के पद पर प्रोन्नति हेतु शिक्षक के पद पर चार वर्षों का अनुभव अनिवार्य है.

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अधिसूचना में यह भी उल्लेखित किया गया कि यदि वांछित योग्यता वाले अभ्यर्थी नहीं मिल पाते हैं तो चार वर्षों के अनुभव की अनिवार्यता में एक वर्ष की छूट का लाभ जिला में केवल एक बार दी जाएगी. अधिसूचना के आधार पर छूट का लाभ देते हुए वर्ष 2013 में प्रधानाध्यापक के पद पर प्रोन्नति की प्रक्रिया पूरी की गयी. इसके बाद वर्ष 2016 में की गयी प्रोन्नति में सरकार के वर्ष 2011 कि अधिसूचना को दरकिनार करते हुए नियमों के प्रतिकूल पुनः एक वर्ष के छूट का लाभ देते हुए प्रोन्नति प्रदान कर दी गयी, जो कि सरकार के निर्णय का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है.

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अदालत ने  इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को अदालत में हाजिर होकर जवाब देने का निर्देश दिया. प्रधान सचिव के पटना में नहीं रहने के कारण शिक्षा विभाग के सचिव सह प्रभारी जितेन्द्र श्रीवास्तव ने अदालत में उपस्थित होकर मामले की जांच अपने स्तर से करने का भरोसा अदालत को दिया.