सुप्रीमकोर्ट ने साफ कह दिया है- मोबाइल को आधार से लिंक करने का निर्देश कभी नहीं दिया

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सुप्रीम कोर्ट

लाइव सिटीज डेस्क : आधार कार्ड पर किच-किच अभी ख़त्म नहीं हो रहा है. कहां जरुरत है, कहां नहीं, अभी इस पर भी बहस जारी है. एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल नंबर को आधार के साथ जोड़ने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि यूजर्स के अनिवार्य सत्यापन को लेकर कोर्ट के आदेश को ‘टूल’ के तौर पर इस्तेमाल किया गया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान बेंच आधार को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रही है.

 मोबाइल नंबर से आधार को जोड़ने का निर्देश नहीं दिया

आधार मामले की सुनवाई कर रही देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि उसने कभी भी मोबाइल नंबर से आधार को जोड़ने का निर्देश नहीं दिया. पिछले काफी समय से बैंकिंग से लेकर तमाम सेक्टर्स की तरफ से उपभोक्ताओं पर आधार से मोबाइल नंबरों को जोड़ने का दबाव बनाने की बात सामने आई है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को काफी अहम माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने 6 फरवरी 2017 को दिए गए उसके आदेश की गलत व्याख्या की है.

राष्ट्र सुरक्षा के हित में सत्यापन की जरूरत है

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि ‘लोकनीति फाउंडेशन’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर उसके आदेश में कहा गया था कि मोबाइल के उपयोगकर्ताओं को राष्ट्र सुरक्षा के हित में सत्यापन की जरूरत है. यह पीठ आधार और इसके 2016 के एक कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

दरअसल, UIDAI के वकील उन आरोपों के संदर्भ में अपनी बात रख रहे थे जिसके तहत कहा जा रहा रहा कि सरकार नागरिकों के सर्विलांस की कोशिश कर रही है. वकील ने कहा कि टेलिग्राफ ऐक्ट के सेक्शन 4 के तहत सरकार के पास आधार को मोबाइल से लिंक करने का लीगल आधार था. उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम राष्ट्रीय हित के लिए भी उचित है. वरिष्ठ वकील ने सुनवाई की शुरुआत में ही आरोप लगाया कि आधार स्कीम को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा था. ऐसा इसलिए क्योंकि कोई भी बैंकों और टेलिकॉम फर्मों को जानकारी एकत्रित करने पर सवाल नहीं उठा रहा था.

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वकील ने जोर दिया कि बैंकों और टेलिकॉम कंपनियों के पास नागरिकों का ज्यादा बड़ा डेटा बेस है. उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए वोडाफोन के पास आधार के बिना भी सूचनाओं का एक बड़ा डेटा बेस है. उन्होंने कहा कि ऐसे में आधार डेटा उनके लिए महत्वहीन है. उन्होंने कहा कि बैंकों के पास भी बहुत ज्यादा सूचनाएं हैं. बैंक के पास किसी शख्स के हर ट्रांजैक्शन की खबर है. किसी ने अपने कार्ड से कब और कहां क्या खरीदा, बैंक सब जानता है. आधार यह सब जानकारी नहीं देता. यह जानकारी पहले से बैंकों के पास है और इसका कमर्शल इस्तेमाल भी किया जा रहा है.

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